France Protest: फ्रांस में स्कूलों की बदहाली से शुरू हुआ प्रदर्शन अब महंगाई, वेतन और पेंशन के मुद्दे तक पहुंच गया है। 8 लाख लोग सड़कों पर हैं और 6 हजार से ज्यादा गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।

फ्रांस में जो गुस्सा स्कूलों की बदहाल व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ था, वह अब सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। करीब 8 लाख लोगों के सड़कों पर उतरने और 6 हजार से ज्यादा गिरफ्तारियों के बावजूद प्रदर्शन थमता नहीं दिख रहा। कई शहरों में आगजनी और पुलिस-प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पों ने हालात और गंभीर कर दिए हैं।

स्कूलों की समस्या से शुरू हुआ था आंदोलन

इस आंदोलन की शुरुआत 17 सितंबर को पेरिस के पास क्रेतै के एंटोनी डी सेंट-एक्जुपेरी हाईस्कूल से हुई थी। शिक्षक स्टाफ और संसाधनों की कमी के खिलाफ हड़ताल पर थे और छात्र भी उनके समर्थन में उतर आए। देखते ही देखते विरोध दूसरे स्कूलों तक पहुंच गया। महज 8 दिनों में करीब 410 स्कूल इसकी चपेट में आ गए। छात्रों की शिकायत सिर्फ शिक्षकों की कमी तक सीमित नहीं है। भरी हुई कक्षाएं, खराब स्कूल भवन, पीने के पानी की कमी, भीषण गर्मी और लंबे स्कूल शेड्यूल ने नाराजगी बढ़ाई है।

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महंगाई, वेतन और पेंशन ने बढ़ाया गुस्सा

धीरे-धीरे यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था से निकलकर महंगाई, वेतन और पेंशन जैसे बड़े आर्थिक मुद्दों से जुड़ गया। प्रदर्शनकारी बेहतर सरकारी सुविधाओं और बढ़ती महंगाई के बीच आय बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। 29 सितंबर को एक स्कूल में अतिरिक्त स्टाफ, डिप्टी प्रिंसिपल और नर्स उपलब्ध कराने पर सहमति बनी, लेकिन इससे आंदोलन खत्म नहीं हुआ। विश्वविद्यालयों के छात्र, अभिभावक, शिक्षक और मजदूर संगठन भी इससे जुड़ते चले गए।

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पुलिस कार्रवाई के बाद भड़का आंदोलन

5 अक्टूबर को लेंस में पुलिस कार्रवाई के दौरान 15 वर्षीय लड़के का हाथ गंभीर रूप से घायल हुआ और बाद में उसे काटना पड़ा। इस घटना ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर गुस्सा और बढ़ा दिया। फ्रांस 24 के मुताबिक, कई शहरों में आगजनी हुई। लिमोज की 143 साल पुरानी इमारत में आग लगाने की खबर सामने आई, जबकि लिली और मार्सिले में प्रदर्शनकारियों के सरकारी इमारतों में घुसने की रिपोर्ट है। राष्ट्रपति भवन के करीब तक प्रदर्शनकारी पहुंच गए।

रिपोर्टों के अनुसार, झड़पों में 200 से ज्यादा छात्र, 85 स्कूल कर्मचारी और करीब 700 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। ऐसे में अब यह सिर्फ स्कूल सुधार का आंदोलन नहीं रह गया, बल्कि महंगाई, सरकारी नीतियों और पुलिस कार्रवाई के खिलाफ व्यापक जनआक्रोश का रूप ले चुका है।

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