फ्रांस के छात्र प्रदर्शनों में ‘Bismillah’ लिखे पोस्टरों ने मुस्लिम कनेक्शन की बहस छेड़ दी है। लेकिन इस नारे की कहानी क्या है? कथित पुलिस घुसपैठ से इसका क्या संबंध है और Trump के दावे पर Macron ने क्या कहा?

फ्रांस में छात्रों के प्रदर्शन के बीच एक अजीब सा नारा अचानक चर्चा में आ गया है—“Bismillah, c’est les ténèbres”। प्रदर्शनकारियों के पोस्टरों पर लिखे इस वाक्य को देखकर सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे कि क्या फ्रांस का छात्र आंदोलन मुस्लिम समुदाय से जुड़ा है? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों के बाद यह चर्चा और तेज हुई।

लेकिन इस नारे की उत्पत्ति की कहानी धर्म से ज्यादा पुलिस पर छात्रों के व्यंग्य से जुड़ी बताई जा रही है। हालांकि, जिस कथित पुलिस घुसपैठ से यह नारा जुड़ा है, उसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

आखिर 'Bismillah' वाला नारा आया कहां से?

रिपोर्टों के मुताबिक अक्टूबर की शुरुआत में Snapchat पर छात्रों के एक ग्रुप में शामिल होने की कोशिश करने वाले “Mamadou” नाम के अकाउंट से एक संदेश वायरल हुआ। इसमें “Bismillah, c’est les ténèbres” के साथ स्कूल ब्लॉकेड को लेकर जानकारी मांगी गई थी और अल्जीरियाई झंडे वाले इमोजी भी थे।

छात्रों को संदेश में अरबी और फ्रेंच स्लैंग का मिश्रण अस्वाभाविक लगा। उन्हें शक हुआ कि यह किसी ऐसे व्यक्ति का अकाउंट हो सकता है, जो छात्रों के निजी ग्रुप में घुसने की कोशिश कर रहा था। इसी शक का मजाक उड़ाते हुए छात्रों ने इस वाक्य को अपने पोस्टरों पर लिखना शुरू कर दिया।

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क्या सच में पुलिस ने छात्रों के ग्रुप में घुसपैठ की?

यही इस पूरी कहानी का सबसे अहम सवाल है। छात्रों का दावा है कि संदेश किसी अंडरकवर पुलिसकर्मी ने भेजा था, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। फ्रांसीसी पुलिस और गृह मंत्रालय ने भी वायरल स्क्रीनशॉट के बारे में सार्वजनिक रूप से यह पुष्टि नहीं की है कि अकाउंट पुलिस का था।

“Bismillah” अरबी में “ईश्वर के नाम पर” के अर्थ में इस्तेमाल होता है। लेकिन प्रदर्शन में छात्रों ने इसे धार्मिक नारे के तौर पर नहीं, बल्कि कथित पुलिस स्टीरियोटाइप और घुसपैठ का मजाक उड़ाने वाले स्लोगन के रूप में अपनाया।

मुस्लिम मुद्दा नहीं, शिक्षा और महंगाई भी प्रदर्शन का केंद्र

फ्रांस का छात्र आंदोलन मूल रूप से स्कूलों में शिक्षकों की कमी, भीड़भरी कक्षाओं, शिक्षा के लिए संसाधनों की कमी और असमान अवसरों जैसे मुद्दों से शुरू हुआ था। बाद में बढ़ती जीवन-यापन लागत और पुलिस कार्रवाई को लेकर असंतोष भी आंदोलन में जुड़ गया।

इसी बीच ट्रंप ने फ्रांस की अशांति को मुस्लिम प्रवासियों से जोड़ते हुए बिना सबूत दावे किए। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ऐसी टिप्पणियों को “अस्वीकार्य” और “बेवकूफी भरा” बताते हुए कहा कि फ्रांस में प्रवासियों और इस्लामिस्टों के “हमले” जैसी बातें गलत हैं।

यानी पोस्टरों पर “Bismillah” दिखना अपने आप में इस बात का सबूत नहीं है कि प्रदर्शन किसी धार्मिक या मुस्लिम संगठन द्वारा चलाया जा रहा है।

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