गाजियाबाद में एक परिवार ने अपने बेटे को मृत मानकर अंतिम संस्कार कर दिया। वह व्यक्ति अपनी ही तेरहवीं पर जीवित लौट आया, क्योंकि वह जेल से छूटकर पंजाब चला गया था। पुलिस अब असली मृतक की पहचान की जांच कर रही है।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक ऐसी खबर आई है, जिसे सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। यहां एक परिवार ने जिसे 'मुर्दा' समझकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया, वो शख्स अपनी ही तेरहवीं के दिन घर लौट आया। यह फिल्मी लगने वाली कहानी गाजियाबाद के वैशाली में रहने वाले 40 साल के गिरिधर सिंह की है।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

आखिर हुआ क्या था?

मामला कुछ यूं है कि 16 मई को शैलेश वर्मा नाम के एक शख्स ने गिरिधर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि गिरिधर ने हथौड़े से शैलेश पर हमला किया, जिससे उसके सिर में 12 टांके आए। इस मामले में पुलिस ने FIR दर्ज की और गिरिधर को डासना जेल भेज दिया। कुछ दिनों बाद वह जेल से रिहा हो गया, लेकिन घर नहीं लौटा और अचानक गायब हो गया।

परिवार वालों ने उसे हर जगह ढूंढा। जब वह कहीं नहीं मिला तो उन्होंने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई। पुलिस जांच कर ही रही थी कि तभी मसूरी नहर में एक लाश मिली। पुलिस ने परिवार को जानकारी दी। परिवार ने लाश देखकर कहा कि यह उनका बेटा गिरिधर ही है। वे अपनी पहचान को लेकर इतने पक्के थे कि पुलिस ने डीएनए टेस्ट कराना भी जरूरी नहीं समझा और शव उन्हें सौंप दिया।

इकलौते बेटे को खोने के गम में डूबे परिवार ने उस शव का अंतिम संस्कार कर दिया। तेरहवीं की रस्में भी पूरी हो गईं। ठीक 13वें दिन जब घर पर शोक का माहौल था, किसी ने दरवाज़ा खटखटाया। परिवार ने दरवाज़ा खोला तो उनके होश उड़ गए। सामने उनका बेटा गिरिधर सिंह ज़िंदा खड़ा था। घर में एक पल के लिए खुशी, डर और हैरानी का मिला-जुला माहौल बन गया।

पुलिस का क्या कहना है?

एक पुलिस अधिकारी ने बताया, "परिवार ने खुद कहा था कि शव गिरिधर का है। वे पूरी तरह से निश्चित थे। अगर थोड़ा भी शक होता तो डीएनए टेस्ट कराया जाता। लेकिन अब हम मामले की दोबारा जांच कर रहे हैं और गिरिधर के परिवार से भी पूछताछ करेंगे।" जांच में पता चला है कि जेल से छूटने के बाद गिरिधर पंजाब में राधास्वामी सत्संग ब्यास चले गए थे। अब पुलिस इस एंगल से भी मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि जिस शख्स का अंतिम संस्कार किया गया, वह कौन था।