गाजियाबाद में 4 साल की भतीजी से रेप-हत्या का आरोपी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। उस पर 50,000 रुपये का इनाम था। इस गोलीबारी में दो पुलिसकर्मी घायल हुए और आरोपी के दो साथी फरार हो गए।

गाजियाबाद के टीला मोड़ इलाके में रविवार को एक पुलिस एनकाउंटर में एक शख्स मारा गया। उस पर अपनी ही 4 साल की भतीजी से रेप और हत्या का संगीन आरोप था। यह मुठभेड़ ठीक उस दिन हुई, जिसके एक दिन पहले ही पुलिस ने आरोपी पर इनाम की रकम 25,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये की थी। पुलिस के मुताबिक, क्राइम ब्रांच-SWAT टीम को आरोपी की लोकेशन के बारे में पक्की खबर मिली थी। वह अपने दो साथियों के साथ मोटरसाइकिल पर कहीं जा रहा था। जब पुलिस ने उसे रुकने का इशारा किया, तो बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी। उनकी मोटरसाइकिल फिसलकर गिर गई, लेकिन उन्होंने देसी पिस्तौलों से फायरिंग जारी रखी।

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गोलीबारी और उसके बाद

जवाबी कार्रवाई में यूपी पुलिस ने भी अपनी गाड़ियों की आड़ लेकर गोलियां चलाईं। मुजफ्फरनगर का रहने वाला यह आरोपी, जो कई नकली नामों से अपनी पहचान छुपा रहा था, दोनों पैरों में गोली लगने से घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। अंधेरे का फायदा उठाकर उसके दो साथी भागने में कामयाब रहे। इस गोलीबारी में दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए, जबकि एक पुलिसवाले की जान बुलेटप्रूफ जैकेट ने बचा ली। अधिकारियों ने बताया कि एनकाउंटर के दौरान कुल 15 राउंड फायरिंग हुई।

यह शख्स तब से फरार था, जब इस महीने की शुरुआत में बच्ची का शव एक खड़ी कार के नीचे मिला था। जांच में पता चला कि उसने बच्ची को घर से बहला-फुसलाकर अगवा किया, उसके साथ रेप किया और फिर गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी यौन उत्पीड़न और गला घोंटने से मौत की पुष्टि हुई थी।

इस मामले में भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई थी। पुलिस ने यह भी खुलासा किया कि आरोपी पर पहले से भी आपराधिक मामले दर्ज थे, जिसमें 2025 में अपनी भाभी को चाकू मारना और एक अलग छेड़छाड़ का मामला शामिल है।

परिवार की प्रतिक्रिया

बच्ची के पिता ने कहा कि अब इंसाफ हुआ है। उन्होंने कहा कि ऐसा घिनौना अपराध करने के बाद आरोपी जीने के लायक नहीं था। यह एनकाउंटर ऐसे समय में हुआ है, जब हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक दूसरे रेप-मर्डर केस को संभालने के तरीके को लेकर गाजियाबाद पुलिस और स्थानीय अस्पतालों की खिंचाई की थी। कोर्ट ने उनके रवैये को "उदासीन, अमानवीय और असंवेदनशील" बताया था।