मोबाइल की लत में एक बच्ची ने खुद को कमरे में बंद कर लिया। परिवार को उसे बाहर निकालने के लिए दीवार तोड़नी पड़ी। यह घटना बच्चों में स्क्रीन की लत की गंभीर समस्या और इसके खतरों को दर्शाती है।
एक हैरान करने वाली घटना ने बच्चों में स्क्रीन की लत को लेकर चिंता बढ़ा दी है। एक बच्ची ने बिना किसी रोक-टोक के मोबाइल फोन चलाने के लिए खुद को एक कमरे में बंद कर लिया। जब उसने दरवाज़ा नहीं खोला, तो परिवार को उसे बाहर निकालने के लिए दीवार तक तोड़नी पड़ी। यह घटना तेज़ी से वायरल हो गई है, जो बच्चों में स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल और पारिवारिक रिश्तों पर इसके असर को दिखाती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बच्ची ने जानबूझकर खुद को सबसे अलग कर लिया ताकि वो आराम से फ़ोन इस्तेमाल कर सके। बाहर से परिवार वाले लगातार दरवाज़ा खटखटाते रहे, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। जब बच्ची को समझाने की सारी कोशिशें नाकाम हो गईं और उसकी सुरक्षा की चिंता बढ़ने लगी, तो परिवार ने एक बड़ा कदम उठाया। उन्होंने कमरे में घुसने के लिए बगल की दीवार तोड़ दी।
इस घटना ने इंटरनेट पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। कई लोग यह देखकर हैरान हैं कि एक बच्ची सिर्फ़ फ़ोन चलाने के लिए इस हद तक चली गई। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि यह बच्चों में डिजिटल लत की एक बड़ी समस्या को दिखाता है, जहां वर्चुअल दुनिया असल ज़िंदगी और रिश्तों पर हावी हो रही है।
एक्सपर्ट्स अक्सर चेतावनी देते हैं कि बिना रोक-टोक के स्क्रीन टाइम से बच्चों के व्यवहार में बदलाव आ सकता है। वे चिड़चिड़े हो सकते हैं, परिवार से दूर हो सकते हैं और उनका ध्यान भी भटक सकता है। कुछ गंभीर मामलों में, बच्चे इमोशनल तौर पर डिवाइस पर इतने निर्भर हो जाते हैं कि उनसे थोड़ी देर के लिए भी दूर रहना मुश्किल हो जाता है। यह घटना इन्हीं चिंताओं को सच साबित करती है।
माता-पिता की निगरानी बच्चें करें मोबाइल का यूज
यह घटना माता-पिता के लिए भी बड़े सवाल खड़े करती है कि वे बच्चों को टेक्नोलॉजी देने और उसकी हेल्दी सीमाएं तय करने में कैसे संतुलन बनाएं। स्मार्टफोन आज की ज़िंदगी का एक ज़रूरी हिस्सा बन गए हैं, लेकिन बच्चों के लिए इसका इस्तेमाल सीमित और निगरानी में हो, यह बहुत ज़रूरी है।
कुल मिलाकर, यह घटना घर पर टेक्नोलॉजी के सही इस्तेमाल को लेकर एक वेक-अप कॉल की तरह है। यह बताती है कि बच्चों में डिजिटल की अच्छी आदतें डालने और ऐसी नौबत आने से रोकने के लिए परिवार में खुली बातचीत, स्क्रीन टाइम के नियम और माता-पिता की सक्रिय भागीदारी कितनी ज़रूरी है।
