IIT Suicide Cases 2006-2026: IIT में 20 साल में 171 छात्रों की मौत के आंकड़े सामने आए हैं। जानिए किस IIT में कितने मामले दर्ज हुए और 2016 के बाद क्यों ऐसे मामले बढ़े।

IIT Wise Student Deaths: IIT बॉम्बे में 18 सितंबर को एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग ब्रांच के दूसरे वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की हॉस्टल के कमरे में आत्महत्या के बाद, देश के प्रतिष्ठित IIT संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और अकादमिक दबाव को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। साहिल वाकोडे की आत्महत्या का मामला सुर्खियों में है। रिपोर्ट के अनुसार छात्र आत्महत्या से से कुछ घंटे पहले ही परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था। संस्थान के अनुसार छात्र ने एग्जाम क्वेश्चन पेपर AI प्लेटफॉर्म ChatGPT पर अपलोड कर आंसर हासिल करने की कोशिश की थी। इस बीच उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2006 से सितंबर 2026 तक IITs में कम से कम 171 छात्रों की आत्महत्या या अन्य अप्राकृतिक कारणों से मौत हुई। यह आंकड़ा IIT कानपुर के पूर्व छात्र धीरज सिंह ने RTI जवाबों और मीडिया रिपोर्ट्स को जुटाकर तैयार किया है। किस आईआईटी में कितनी मौतें हुईं और 2016 के बाद माले ज्यादा क्यों बढ़ें। जानिए पूरी डिटेल।

किन IITs में सबसे ज्यादा मामले सामने आए?

RTI जवाबों और मीडिया रिपोर्ट्स से उपलब्ध जानकरी के अनुसार IIT खड़गपुर में 29, IIT मद्रास में 26, IIT कानपुर में 21 और IIT दिल्ली में 17 मौतें दर्ज हैं। IIT बॉम्बे और IIT गुवाहाटी में 14-14, जबकि IIT हैदराबाद में 9 और IIT रुड़की में 8 मामले बताए गए हैं। नीचे देंखे डिटेल-

IITदर्ज मौतें
IIT खड़गपुर29
IIT मद्रास26
IIT कानपुर21
IIT दिल्ली17
IIT बॉम्बे 14
IIT गुवाहाटी 14
IIT हैदराबाद 9
IIT रुड़की 8
IIT पटना7
IIT-BHU वाराणसी 6
IIT भुवनेश्वर 5
IIT-ISM धनबाद 4
IIT गांधीनगर3
IIT रोपड़ 2
IIT मंडी 1
IIT जोधपुर 1
IIT तिरुपति 1
IIT धारवाड़ 1
IIT गोवा 1
IIT इंदौर 1

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2006 से 2015 के मुकाबले 2016 के बाद कितनी बढ़ीं मौतें?

आंकड़ों के मुताबिक, 2006 से 2015 के बीच 51 मौतें दर्ज हुई थीं। वहीं 2016 से सितंबर 2026 के बीच यह संख्या बढ़कर 120 हो गई। यानी पिछले करीब एक दशक में दर्ज मामलों की संख्या पहले दशक की तुलना में काफी ज्यादा रही।

क्या ज्यादातर आत्महत्याएं IIT कैंपस में हुईं? धीरज सिंह के विश्लेषण के अनुसार, रिपोर्ट में शामिल आत्महत्या के करीब 82% मामले IIT कैंपस से जुड़े स्थानों पर हुए। उनका कहना है कि इस पैटर्न को देखते हुए कैंपस से जुड़े परिस्थितियों और छात्र सहायता व्यवस्था की अलग से जांच की जरूरत है।

क्या परीक्षाओं और रिजल्ट के समय बढ़ जाता है दबाव?

संकलित आंकड़ों में परीक्षा और रिजल्ट घोषित होने के आसपास छात्र मौतों के मामले ज्यादा दिखाई देने का दावा किया गया है। इसके उलट, सेमेस्टर ब्रेक के दौरान ऐसे मामलों में कमी देखी गई। हालांकि, यह पैटर्न किसी एक कारण को आत्महत्या के लिए जिम्मेदार साबित नहीं करता।

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क्या SC-ST छात्रों के बीच जोखिम ज्यादा दिखा?

रिपोर्ट के अनुमान के मुताबिक, SC और ST छात्रों में आत्महत्या की दर सामान्य वर्ग के छात्रों की तुलना में करीब दोगुनी रही। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कोविड के बाद SC छात्रों की अनुमानित दर करीब 2.6 गुना और ST छात्रों की करीब 4.2 गुना बढ़ी।