क्या सच में MBA और डिग्री आधारित करियर का दौर खत्म हो गया है? क्या AI और ऑटोमेशन अब पारंपरिक नौकरियों को पूरी तरह बदल देंगे? क्या भारत को अब वोकेशनल और ट्रेड स्किल्स की ओर तेजी से बढ़ना चाहिए? क्या स्वास्थ्य और जीवनशैली अब नौकरी और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही है? भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन का बयान क्यों चर्चा में है?
CEA Statement MBA Education India: भारत में हर साल लाखों युवा लाखों रुपये खर्च करके सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस और MBA जैसी भारी-भरकम डिग्रियां हासिल करते हैं। लेकिन भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने देश के पूरे एजुकेशन सिस्टम और करियर के पारंपरिक ढर्रे को हिलाकर रख दिया है। ANI के एक पॉडकास्ट में बोलते हुए उन्होंने साफ कहा कि बदलती हुई अर्थव्यवस्था में अब सिर्फ किताबी डिग्रियों के दम पर नौकरी मिलने की गारंटी बिल्कुल नहीं दी जा सकती। उन्होंने युवाओं को चेताया कि पारंपरिक रास्तों पर बिना सोचे-समझे आगे बढ़ने का समय अब खत्म हो चुका है।

'सॉफ्टवेयर और MBA का सुनहरा दौर खत्म': अब कौन से हुनर दिलाएंगे आपको लाखों का पैकेज?
सीईओ नागेश्वरन ने कड़े शब्दों में कहा, "ग्लोबलाइजेशन की दुनिया ने एक समय पर सॉफ्टवेयर, कंप्यूटर साइंस और MBA की पढ़ाई को बहुत फायदा पहुंचाया, लेकिन वह दौर अब हमेशा के लिए खत्म हो चुका है।" उन्होंने इस बात पर गहरा सस्पेंस खड़ा कर दिया है कि भविष्य आखिर किस करवट बैठने वाला है। उनके मुताबिक, आने वाला समय ट्रेड स्किल्स (व्यावसायिक कौशल), सॉफ्ट स्किल्स और ऐसे अनोखे पेशों का है जहां केवल रोबोट या मशीनें काम नहीं कर सकतीं, बल्कि इंसानी समझ, संवेदना और वास्तविक मौजूदगी की सख्त जरूरत है।
एआई (AI) के युग में बची रहेगी किसकी नौकरी? शेफ से हुई सीक्रेट बातचीत का बड़ा खुलासा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन के इस दौर में जब हर कोई अपनी नौकरी जाने के डर से सहमा हुआ है, तब मुख्य आर्थिक सलाहकार ने एक युवा शेफ के साथ हुई अपनी बातचीत का एक दिलचस्प किस्सा साझा किया। वह शेफ अपने दोस्तों की तुलना में खुद को पीछे महसूस कर रहा था, तब नागेश्वरन ने उसे समझाया कि खाना पकाने की कला (Culinary Skills) की जगह एआई कभी नहीं ले सकता। उन्होंने कहा, "सच्चाई यह है कि आपने एक ऐसा हुनर सीखा है जिसकी नकल कोई भी एडवांस टेक्नोलॉजी आसानी से नहीं कर सकती।" भविष्य में काउंसलिंग, केयरगिविंग (देखभाल) और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में नौकरियों की बाढ़ आने वाली है, क्योंकि यहाँ इंसानी स्पर्श की जरूरत होती है।
विदेशी कूटनीति का कड़वा सच: क्यों बढ़ईगीरी और प्लंबिंग जैसे कामों को भारत में आंका गया कम?
नागेश्वरन ने भारत के सामाजिक नजरिए पर सवाल उठाते हुए कहा कि हमारे देश में वेल्डिंग, प्लंबिंग, बढ़ईगीरी और इलेक्ट्रिकल काम जैसे वोकेशनल पेशों को हमेशा कमतर या छोटा माना गया है। जबकि इसके विपरीत स्विट्जरलैंड, जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे विकसित देश इन ट्रेड स्किल्स को सबसे ज्यादा सम्मान और पैसा देते हैं। उन्होंने भारतीय छात्रों को केवल ग्रेजुएशन के बाद हायर स्टडीज या UPSC जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं की अंधी दौड़ में शामिल होने के बजाय प्रैक्टिकल और वोकेशनल जानकारी बढ़ाने की सलाह दी है।
सबसे बड़ा खतरा: अमीर होने से पहले ही 'अस्वस्थ' हो रहा है भारत, प्रोडक्टिविटी पर मंडराया संकट
करियर के साथ-साथ मुख्य आर्थिक सलाहकार ने देश की सेहत को लेकर भी एक बेहद डरावनी चेतावनी दी है। अमूमन लोग बहस करते हैं कि क्या भारत अमीर बनने से पहले ही बूढ़ा हो जाएगा, लेकिन नागेश्वरन ने कहा कि असली और ज्यादा बड़ी चिंता यह है कि क्या देश खुशहाल बनने से पहले ही गंभीर रूप से 'अस्वस्थ' हो रहा है? नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के चौंकाने वाले आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि बैठे-बैठे काम करने वाली जीवनशैली, कम शारीरिक गतिविधि और देर से खाना खाने की आदतों के कारण सभी आय वर्गों में मोटापा तेजी से बढ़ा है। युवा भारतीयों के लिए उनका अंतिम संदेश बेहद साफ है-प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन के साथ-साथ अपनी शारीरिक और मानसिक सेहत पर ध्यान दें, क्योंकि एक बीमार नागरिक कभी भी देश की आर्थिक तरक्की और खुद की प्रोडक्टिविटी का हिस्सा नहीं बन सकता।


