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EU-India Summit 2026: फ्री ट्रेड, डिफेंस और डेमोक्रेसी-दिल्ली में तय होने वाला है नया रोडमैप
India EU Srategic Partnership: क्या गणतंत्र दिवस सिर्फ समारोह है या रणनीति? EU प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन का भारत दौरा, दिल्ली शिखर से पहले फ्री ट्रेड, रक्षा और वैश्विक राजनीति में भारत-EU के नए युग का संकेत दे रहा है।

Republic Day Chief Guest EU: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के रिश्तों को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। अहम दिल्ली शिखर सम्मेलन 2026 से ठीक पहले यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत दौरे पर पहुंच चुकी हैं। उनका यह चार दिवसीय दौरा सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भारत-EU रणनीतिक साझेदारी के भविष्य से जोड़कर देखा जा रहा है। सबसे खास बात यह है कि 26 जनवरी 2026 के गणतंत्र दिवस समारोह में उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा मुख्य अतिथि होंगे।
उर्सुला वॉन डेर लेयेन का भारत दौरा इतना अहम क्यों है?
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने 24 जनवरी 2026 को भारत की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा शुरू की। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों अस्थिर दौर से गुजर रही हैं। अगले हफ्ते होने वाला 16वां EU-India Summit इस यात्रा का केंद्र बिंदु है, जिसमें भारत और EU अपने रिश्तों को नई दिशा देने की तैयारी में हैं।
#WATCH | President of the European Commission Ursula von der Leyen arrives in New Delhi on a state visit, received by Minister of State for Commerce and Industry, and Electronics and Information Technology Jitin Prasada
European Council President Antonio Luis Santos da Costa and… pic.twitter.com/tnXVpwVq3V— ANI (@ANI) January 24, 2026
27 जनवरी की बैठक में क्या होगा बड़ा फैसला?
27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उर्सुला वॉन डेर लेयेन और एंटोनियो कोस्टा के साथ शिखर वार्ता करेंगे। यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि अमेरिका की बदलती आर्थिक और सुरक्षा नीतियों, खासकर ट्रम्प प्रशासन के प्रभाव, से वैश्विक स्तर पर चिंताएं बढ़ी हैं। ऐसे में भारत और EU मिलकर एक मजबूत रणनीतिक रोडमैप बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
क्या फ्री ट्रेड एग्रीमेंट अब हकीकत बनने वाला है?
इस शिखर सम्मेलन से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल यही है कि भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता (FTA) आखिरकार पूरा होगा या नहीं। इसके अलावा, रणनीतिक रक्षा साझेदारी समझौता, भारतीय पेशेवरों की यूरोप में आवाजाही के लिए नया ढांचा, और टेक्नोलॉजी व सुरक्षा सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर भी ठोस ऐलान की उम्मीद है।
गणतंत्र दिवस पर EU नेताओं की मौजूदगी क्या संकेत देती है?
26 जनवरी को EU नेताओं का गणतंत्र दिवस में मुख्य अतिथि होना भारत-EU रिश्तों में भरोसे और सम्मान का बड़ा संकेत माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने एयरपोर्ट पर उर्सुला वॉन डेर लेयेन का स्वागत किया, जबकि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसे भारत-EU साझेदारी के अगले चरण की शुरुआत बताया।
भारत और EU का व्यापारिक रिश्ता कितना मजबूत है?
कम ही लोग जानते हैं कि EU, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत-EU के बीच कुल वस्तु व्यापार करीब 136 अरब डॉलर रहा, जिसमें 76 अरब डॉलर का निर्यात और 60 अरब डॉलर का आयात शामिल है। यह आंकड़े साफ दिखाते हैं कि दोनों के रिश्ते सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी बेहद मजबूत हैं। आने वाले कुछ दिनों में होने वाले फैसले सिर्फ दोनों पक्षों के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए भी अहम साबित हो सकते हैं।
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