India LPG Crisis: गैस की किल्लत से राहत! भारत ने US समेत इन 3 देशों से बढ़ाया इंपोर्ट
भारत ने LPG सप्लाई सोर्स बढ़ाए; US से 176k टन इंपोर्ट हुआ। पश्चिम एशिया से सप्लाई घटकर 89k टन, भारत अब रूस और जापान से भी गैस ले रहा है। तेल मार्केटिंग कंपनियां बाजार को संतुलित करने के लिए नए सोर्स तलाश रही हैं। भारत ने अपनी LPG रणनीति क्यों बदली?

नई दिल्ली: भारत ने अपनी कुकिंग गैस यानी LPG की सप्लाई में बड़ा बदलाव किया है। 19 मार्च को खत्म हुए हफ़्ते में देश का कुल LPG इंपोर्ट घटकर 265,000 टन रह गया, जबकि 5 मार्च को यह 322,000 टन था। S&P Commodities At Sea (CAS) के आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम एशिया से आने वाली सप्लाई सिर्फ़ 89,000 टन रह गई, जो जनवरी 2026 के बाद से सबसे कम है। क्या अब भारत की गैस सप्लाई सुरक्षित है या नए स्रोत की तलाश जरूरी हो गई है?
क्या पश्चिम एशिया सप्लाई में कमी ने भारत को US की तरफ मोड़ा?
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 19 मार्च को खत्म हुए हफ़्ते में दूसरे देशों से सप्लाई बढ़कर 176,000 टन हो गई, जिसमें ज़्यादातर हिस्सा US से आया। इसके पहले यह सप्लाई शून्य थी, जब भारत पूरी तरह से खाड़ी देशों पर निर्भर था। भारतीय तेल मार्केटिंग कंपनियाँ अनुमानित तौर पर 2026 में US से 2.2 मिलियन टन LPG इंपोर्ट कर सकती हैं। CAS के डेटा के मुताबिक, भारतीय तेल मार्केटिंग कंपनियां 2026 में US से 2.2 मिलियन टन LPG इंपोर्ट कर सकती हैं। इससे पता चलता है कि कंपनियाँ लंबे समय तक सप्लाई की कमी को पूरा करने के लिए सक्रिय रूप से नई स्ट्रैटेजी अपना रही हैं।
भारत क्यों कर रहा है सोर्स डायवर्सिफिकेशन?
पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, LPG की उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है। इसलिए भारत रूस और जापान जैसे अलग-अलग सोर्स से भी गैस लाने की तैयारी कर रहा है। इसके पीछे कारण है होर्मुज़ जलडमरूमध्य से सप्लाई में संभावित रुकावट और खाड़ी देशों की सीमित आपूर्ति। पश्चिम एशिया से आने वाले कार्गो को भारत पहुंचने में 7-8 दिन, US से लगभग 45 दिन, और रूस या जापान से 35-40 दिन लगते हैं।
सप्लाई में अंतर कब पूरा होगा?
अधिकारियों के अनुसार, पश्चिम एशिया से LPG भारत पहुंचने में लगभग 7-8 दिन लगते हैं, US से आने वाले कार्गो को लगभग 45 दिन, और रूस या जापान से 35-40 दिन। इसका मतलब है कि नई सप्लाई भारत में धीरे-धीरे पहुंचेगी, लेकिन देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए यह कदम जरूरी था।
क्या भारत की LPG रणनीति बदल रही है?
भारत अब अपने परंपरागत खाड़ी सप्लायरों पर पूरी तरह निर्भर नहीं है। US से आने वाले कार्गो की संख्या पारंपरिक सप्लाई से अधिक हो गई है। अधिकारी मानते हैं कि यह कदम देश में LPG की उपलब्धता बनाए रखने और वैश्विक सप्लाई संकट से निपटने के लिए लिया गया है। भारत अपनी LPG ज़रूरत का लगभग 60% हिस्सा इंपोर्ट करता है, और इसमें से 90% परंपरागत रूप से पश्चिम एशिया पर निर्भर है। लेकिन अब US और रूस जैसे नए सोर्स जोड़ने से यह संतुलन बदल रहा है।
कुकिंग गैस संकट के बीच नई दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह रणनीति आपातकालीन समय में बाजार को संतुलित रखने के लिए अहम है। तेल कंपनियां अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय सोर्स से गैस खरीदकर देश में किसी भी तरह की कमी को रोकने की कोशिश कर रही हैं। अधिकारी यह भी बताते हैं कि कुछ US कार्गो पहले ही भारत पहुंच चुके हैं, और तेल रिफाइनरियां दूसरी सप्लायर कंपनियों के साथ लगातार बातचीत कर रही हैं। इसका मतलब है कि भारत अपनी LPG जरूरतों के लिए सक्रिय कदम उठा रहा है।
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