भारत-पाक के 117 प्रमुख लोगों ने पीएम मोदी और शहबाज शरीफ से 11 मांगों के साथ रिश्ते सुधारने, बातचीत, व्यापार, वीजा, खेल और हवाई सेवाएं बहाल कर शांति का रास्ता अपनाने की अपील की। 

नई दिल्ली / इस्लामाबाद: दशकों पुरानी दुश्मनी, सरहदों पर गहराता तनाव और कूटनीतिक गतिरोध के बीच एक ऐसी सनसनीखेज खबर आई है जिसने भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। उपमहाद्वीप के इतिहास में शायद पहली बार, दोनों मुल्कों की 117 सबसे रसूखदार और नामचीन हस्तियों ने एक सुर में अपनी-अपनी सरकारों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ को एक बेहद गोपनीय और रणनीतिक संयुक्त पत्र (चिट्ठी) भेजा गया है, जिसमें कड़े शब्दों में कहा गया है-"टकराव का रास्ता छोड़िए, बातचीत शुरू कीजिए!"

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पर्दे के पीछे के चेहरे: कौन हैं ये 117 'शांतिदूत'?

इस चिट्ठी के सामने आते ही सबसे बड़ा सस्पेंस इस बात को लेकर था कि आखिर इस संवेदनशील पहल के पीछे कौन से बड़े नाम शामिल हैं। जब हस्ताक्षर करने वालों की सूची सामने आई, तो कूटनीतिक हलकों में सन्नाटा पसर गया। इस संयुक्त मोर्चे में दोनों देशों के पूर्व नौकरशाह, सैन्य अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और कद्दावर राजनेता शामिल हैं।

  • भारत की ओर से मोर्चा: जम्मू-कश्मीर के दो पूर्व मुख्यमंत्री-फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती, और आरजेडी के प्रखर सांसद मनोज झा समेत 61 दिग्गजों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • पाकिस्तान की ओर से कमान: पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी समेत 56 बेहद प्रभावशाली हस्तियों ने इस कूटनीतिक दस्तावेज पर अपनी मुहर लगाई है।

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भारत-पाकिस्तान के रिश्ते आखिर यहां तक पहुंचे कैसे?

भारत-पाकिस्तान संबंध पिछले एक दशक में लगातार उतार-चढ़ाव से गुजरे हैं। यह पत्र ऐसे वक्त में सामने आया है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्ते पूरी तरह फ्रीज हैं। वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लाहौर यात्रा के बाद रिश्तों में सुधार की उम्मीद जगी थी, लेकिन 2016 के पठानकोट आतंकी हमले के बाद व्यापक वार्ता लगभग रुक गई। इसके बाद 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के फैसले के बाद पाकिस्तान ने कूटनीतिक रिश्तों और व्यापार को सीमित कर दिया। वहीं हाल के वर्षों में आतंकी घटनाओं और सीमा पर तनाव ने दोनों देशों के बीच विश्वास की खाई और गहरी कर दी। 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद नागरिकों की आवाजाही, वीजा सेवाएं और हवाई मार्गों पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए गए, जिससे दोनों देशों के बीच संपर्क लगभग समाप्त हो गया।

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वो 11 'मांगें' जो बदल सकती हैं दोनों देशों का भविष्य

इस रहस्यमयी चिट्ठी में दोनों प्रधानमंत्रियों के सामने 11 ऐसी शर्तें या मांगें रखी गई हैं, जो अगर मान ली गईं, तो दशकों पुरानी दुश्मनी एक झटके में इतिहास बन सकती है। कूटनीति के बंद कमरों से निकलीं वे 11 मांगें इस प्रकार हैं:

  • 1. बंद पड़े संवाद का ताला खुले: दोनों देशों के बीच आधिकारिक और कूटनीतिक बातचीत को बिना किसी देरी के दोबारा बहाल किया जाए।
  • 2. कश्मीर समेत हर विवाद पर सीधी बात: जम्मू-कश्मीर सहित जितने भी पुराने और उलझे हुए विवादित मुद्दे हैं, उन पर मेज पर बैठकर अंतिम समाधान निकाला जाए।
  • 3. बारूद की गंध कम हो (सैन्य तनाव पर लगाम): एलओसी और सीमाओं पर सैन्य तनाव को कम करने के लिए दोनों सरकारें ठोस और रणनीतिक कदम उठाएं।
  • 4. आवाजाही पर लगी कड़ियां टूटें: दोनों देशों के आम नागरिकों के बीच संपर्क (People-to-People Contact) बढ़ाने के रास्ते साफ किए जाएं।
  • 5. संस्कृति और शिक्षा की जुगलबंदी: कला, संगीत, फिल्मों और विश्वविद्यालयों के स्तर पर शैक्षणिक व सांस्कृतिक संबंधों को फिर से जिंदा किया जाए।
  • 6. मैदान पर 'महामुकाबला' (द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज): क्रिकेट प्रेमियों के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच रुकी हुई द्विपक्षीय खेल सीरीज को फिर से हरी झंडी दिखाई जाए।
  • 7. आसमां से हटे पाबंदी का साया: साल 2025 से दोनों देशों के बीच पूरी तरह बंद पड़े हवाई मार्गों और सीधी उड़ानों को तत्काल प्रभाव से दोबारा चालू किया जाए।
  • 8. आसान हो सरहद पार का सफर: कड़ी पाबंदियों और सस्पेंशन का शिकार हुई वीजा प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए ताकि परिवारों का मिलना आसान हो सके।
  • 9. 'हाई कमिश्नर' की हो घर वापसी: 2019 से खाली पड़े उच्चायुक्तों (High Commissioners) के पदों को दोबारा भरा जाए और कूटनीतिक स्तर को पूर्णकालिक किया जाए।
  • 10. खुलें तरक्की के रास्ते (करतारपुर और वाघा बॉर्डर): दिल्ली-लाहौर बस सेवा, करतारपुर कॉरिडोर और अटारी-वाघा बॉर्डर को आम नागरिकों के लिए पूरी तरह खोला जाए।
  • 11. बंद तिजोरियां फिर से खुलें (कारोबार की बहाली): 2019 से निलंबित पड़े द्विपक्षीय व्यापार को दोबारा शुरू किया जाए ताकि दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिल सके।

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क्या वाकई पिघलेगी दोनों देशों के बीच की बर्फ?

इस पत्र ने एक सबसे बड़ा सस्पेंस यह खड़ा कर दिया है कि क्या पीएम मोदी और शहबाज शरीफ इन 11 मांगों पर विचार करेंगे? हाल के महीनों में लगातार बढ़ी शत्रुता ने आम नागरिकों के हितों और क्षेत्रीय स्थिरता को गहरी चोट पहुंचाई है। जानकारों का मानना है कि यह महज एक चिट्ठी नहीं, बल्कि दोनों देशों के प्रबुद्ध वर्ग का वो बढ़ता दबाव है जो अब सरहदों पर बंदूक के बजाय बातचीत की गूंज सुनना चाहता है। अब देखना यह है कि दिल्ली और इस्लामाबाद के हुक्मरान इस 'शांति पैगाम' का जवाब किस अंदाज में देते हैं!

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खेल, कला और आसमानी पाबंदियों पर 'डेड लॉक' तोड़ने की जिद

इस खत में उन दुखों को कुरेदा गया है जो दोनों देशों के आम नागरिक पिछले कई सालों से झेल रहे हैं। हस्तियों ने मांग की है कि साल 2012-13 से बंद पड़ी भारत-पाकिस्तान द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज को तुरंत बहाल किया जाए। इसके अलावा, साल 2016 के उरी हमले के बाद से सांस्कृतिक और शैक्षणिक आदान-प्रदान पर लगे कड़े प्रतिबंधों को हटाने की वकालत की गई है। सबसे बड़ी बात, हाल ही में 24 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के लिए अपना हवाई क्षेत्र (Airspace) पूरी तरह बंद कर दिया था और वीजा सेवाएं निलंबित कर दी थीं। इस पत्र में इन आसमानी पाबंदियों को हटाने और अटारी-वाघा बॉर्डर, दिल्ली-लाहौर बस सेवा तथा ठप पड़े व्यापार को दोबारा शुरू करने की पुरजोर वकालत की गई है।

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आगे किस पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह संयुक्त अपील केवल एक प्रतीकात्मक पहल बनकर रह जाएगी या दोनों सरकारें भविष्य में संवाद की दिशा में कोई सकारात्मक संकेत देंगी। दक्षिण एशिया की राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यदि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क बढ़ता है, तो यह चिट्ठी उस प्रक्रिया की शुरुआती कड़ी के रूप में भी याद की जा सकती है। फिलहाल सबकी निगाहें नई दिल्ली और इस्लामाबाद की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।