भारत ने साफ किया है कि पाकिस्तान जब तक सीमा पार आतंकवाद का समर्थन बंद नहीं करेगा, तब तक सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर भारत का फैसला नहीं बदलेगा।
Indus Waters Treaty: भारत ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty-IWT) को लेकर उसका फैसला पाकिस्तान की धमकियों या बयानों से प्रभावित नहीं होगा। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का समर्थन पूरी तरह और भरोसेमंद तरीके से बंद नहीं करता, तब तक संधि को रोके रखने का फैसला जारी रहेगा।

Pahalgam Terror Attack के बाद लिया गया था फैसला
भारत ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को रोके रखने का फैसला लिया था। इस हमले में 26 पर्यटकों की मौत हुई थी। इसके बाद से पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह दावा कर रहा है कि भारत का यह कदम उन देशों के लिए गलत उदाहरण पेश करता है, जो सीमा पार बहने वाली नदियों का साझा उपयोग करते हैं।
MEA का स्पष्ट संदेश: आतंकवाद बंद करो, तभी बदलेगा भारत का रुख
विदेश मंत्रालय (MEA) ने पाकिस्तान के आरोपों का जवाब देते हुए दोहराया कि भारत का रुख पहले जैसा ही है। MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पत्रकारों से कहा कि सिंधु जल संधि को पाकिस्तान द्वारा लगातार सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के जवाब में रोका गया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को आतंकवाद के लिए अपना समर्थन पूरी तरह और भरोसेमंद तरीके से खत्म करना होगा। तभी इस मुद्दे पर कोई बदलाव संभव होगा।
रणनीतिक विशेषज्ञों ने पाकिस्तान के रुख पर उठाए सवाल
रणनीतिक मामलों के जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान इस मामले में खुद बनाई हुई स्थिति का सामना कर रहा है, लेकिन उसे स्वीकार नहीं करना चाहता। विशेषज्ञों के अनुसार, जिस देश में कभी अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन छिपा मिला था, वहां आज भी आतंकवादी संगठनों को भारत, खासकर जम्मू-कश्मीर में हमले करने के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल करने की अनुमति मिलती है।
Ishaq Dar और Bilawal Bhutto के बयानों पर बढ़ा विवाद
सिंधु जल संधि को लेकर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश में पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार ने इस सप्ताह एक कार्यक्रम में कहा कि उनका देश भारत के फैसले को स्वीकार नहीं करता। उनके अनुसार, सिंधु जल संधि आज भी पूरी तरह वैध, बाध्यकारी और लागू है। इसी कार्यक्रम में पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने विवादित बयान देते हुए "परमाणु विकल्प" (Nuclear Option) का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर सिंधु जल संधि बहाल कराने की सभी कोशिशें विफल हो जाती हैं, तो पाकिस्तान को परमाणु विकल्प पर विचार करना चाहिए। रणनीतिक विशेषज्ञों ने इस बयान को गैर-जिम्मेदाराना करार दिया है।
भारत पहले भी IWT पर अपना रुख कर चुका है स्पष्ट
भारत पहले भी साफ कर चुका है कि जब तक सिंधु जल संधि स्थगित रहेगी, तब तक वह इसके तहत आने वाली जिम्मेदारियों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं होगा। जून 2025 में विदेश मंत्रालय ने कहा था कि किसी भी मध्यस्थता अदालत, विशेष रूप से ऐसी आर्बिट्रेशन बॉडी जिसका कानूनी आधार ही मान्य नहीं है, को भारत जैसे संप्रभु देश के फैसलों की वैधता पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है।
Indus Waters Treaty: सिंधु जल समझौता क्या है?
सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) पर भारत और पाकिस्तान ने वर्ष 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हस्ताक्षर किए थे। करीब 9 वर्षों तक चली बातचीत के बाद बनी इस संधि के तहत सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के बंटवारे और उपयोग के नियम तय किए गए थे। पिछले छह दशकों से यह समझौता दोनों देशों के बीच जल प्रबंधन का आधार रहा है।
भारत को मिला जापान का समर्थन
भारत का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब पाकिस्तान के रुख को समझ रहा है। हाल ही में भारत और जापान की ओर से जारी संयुक्त बयान में पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद की स्पष्ट शब्दों में निंदा की गई। दोनों देशों ने राज्य-समर्थित आतंकवादी ठिकानों और आतंकवाद की फंडिंग को खत्म करने के लिए वैश्विक स्तर पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। यह संयुक्त बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद जारी किया गया।
भारत का संदेश साफ
भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि सिंधु जल संधि पर उसका रुख पाकिस्तान के बयानों या दबाव से नहीं बदलेगा। सरकार का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का समर्थन पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक IWT को लेकर भारत के फैसले में कोई बदलाव नहीं होगा। साथ ही भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।


