क्या AMCA प्रोजेक्ट भारत को अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों की बराबरी पर खड़ा कर पाएगा? क्या प्राइवेट कंपनियों की एंट्री से भारत का रक्षा उत्पादन और तेज़ व आत्मनिर्भर बनेगा? क्या भारतीय वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन संख्या को AMCA जैसे पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट से बड़ा सहारा मिलेगा?
नई दिल्ली: भारत ने अपने लड़ाकू विमान उद्योग को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को एक रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी किया है। इसमें प्राइवेट कंपनियों को एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के प्रोटोटाइप बनाने के लिए न्योता दिया गया है। यह भारत का पांचवीं पीढ़ी का पहला स्टील्थ फाइटर जेट बनाने का प्रयास है।

रक्षा मंत्रालय के तहत काम करने वाली एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) ने क्वालिफाइड बोली लगाने वालों से AMCA के पांच उड़ने वाले प्रोटोटाइप और एक स्ट्रक्चरल टेस्ट स्पेसिमेन बनाने के लिए कहा है। AMCA एक ट्विन-इंजन, मीडियम वेट, मल्टी-रोल और कम पकड़ में आने वाला एयरक्राफ्ट है, जिसे भारतीय वायु सेना (IAF) की जरूरतों को पूरा करने के लिए विकसित किया जा रहा है।
RFP के मुताबिक, जो भी कंपनी ये बोली जीतेगी, उसे मैन्युफैक्चरिंग का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा, एडवांस्ड सिस्टम्स को इंटीग्रेट करना होगा, फ्लाइट टेस्टिंग में मदद करनी होगी और आखिरकार, देश के भविष्य के लड़ाकू विमान उत्पादन की रीढ़ बनना होगा।
AMCA आखिर है क्या?
AMCA को अमेरिका के F-35 रैप्टर, चीन के J-35 और रूस के Su-57 जैसे पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों का भारत का जवाब माना जा रहा है। इसकी डिजाइनिंग ऐसी है कि यह दुश्मन के रडार से आसानी से छिपा रह सकता है। इसके लिए इसमें रडार सोखने वाले मैटेरियल और खास बनावट का इस्तेमाल किया गया है। यह एक ट्विन-इंजन वाला विमान होगा जो अपने हथियारों को अंदर छिपाकर ले जा सकता है - जो कि स्टील्थ डिजाइन की एक बड़ी पहचान है। यह हवा में अपनी बादशाहत कायम करने से लेकर जमीन पर हमला करने तक, कई तरह के मिशन को अंजाम दे सकता है।
AMCA का डेवलपमेंट ADA ने किया है। यह वही बेंगलुरु की एजेंसी है जिसने तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट को डिजाइन किया था। तेजस को मुख्य रूप से सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने बनाया था, लेकिन AMCA प्रोग्राम में एक बड़ा बदलाव है। सरकार प्रोटोटाइप बनाने के लिए एक प्राइवेट सेक्टर पार्टनर की तलाश कर रही है। यह रक्षा उत्पादन को भारतीय प्राइवेट इंडस्ट्री के लिए खोलने की एक बड़ी पॉलिसी का संकेत है।
क्या-क्या काम करना होगा?
चुनी गई इंडस्ट्री पार्टनर पर प्रोटोटाइप को शुरू से आखिर तक तैयार करने की जिम्मेदारी होगी। इसमें एयरक्राफ्ट का ढांचा बनाना, एवियोनिक्स, इंजन, हाइड्रोलिक, फ्यूल, इलेक्ट्रिकल और फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम को असेंबल और इंटीग्रेट करना, और टेस्टिंग की सुविधाएं और ग्राउंड सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करना शामिल है।
टाइमलाइन और माइल्सटोन्स
AMCA प्रोग्राम को 14 जरूरी और सांकेतिक कॉन्ट्रैक्चुअल माइल्सटोन्स में बांटा गया है, जो परचेज ऑर्डर की तारीख से 84 महीने - यानी सात साल - तक चलेगा। बोली जमा करने की आखिरी तारीख 27 जुलाई, 2026 है। RFP के अनुसार, पहले प्रोटोटाइप के स्ट्रक्चरल मॉड्यूल की डिलीवरी और पहली उड़ान 30 महीनों के भीतर हो जानी चाहिए, जबकि सभी पांचों प्रोटोटाइप को परचेज ऑर्डर की तारीख से 64 महीनों के भीतर उड़ान भर लेनी चाहिए। 84 महीनों के भीतर 1,800 फ्लाइट टेस्ट सॉर्टीज को पूरा करना होगा। खास बात यह है कि जीतने वाले बोली लगाने वाले को विजेता घोषित होने के तीन महीने के भीतर एक पूरी तरह से नई कंपनी बनानी होगी।
रणनीतिक महत्व
AMCA प्रोग्राम का रणनीतिक महत्व बहुत ज्यादा है। भारतीय वायुसेना के पास अभी पुराने सोवियत-युग के MiG-29 के साथ-साथ सुखोई Su-30MKI, राफेल, मिराज 2000 और स्वदेशी तेजस Mk1A का मिश्रण है। वायुसेना लंबे समय से अपनी स्क्वाड्रन की घटती संख्या को लेकर चिंता जताती रही है। स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन की संख्या घटकर लगभग 30 रह गई है।
AMCA जैसी क्षमता वाला पांचवीं पीढ़ी का विमान भारत को उन चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल कर देगा जो ऐसे प्लेटफॉर्म को डिजाइन और प्रोड्यूस कर सकते हैं। हालांकि, इस प्रोग्राम को फंडिंग की मंजूरी और डिजाइन को फाइनल करने में कई सालों की देरी का सामना करना पड़ा है।
