क्या UNHRC में भारत का "फ्रेंकस्टीन स्टेट" हमला पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर घेर देगा? क्या आतंकियों को समर्थन देने की कथित स्वीकारोक्ति पाकिस्तान के लिए नया संकट बनेगी? PoK में विरोध प्रदर्शनों और मौतों के पीछे आखिर क्या सच छिपा है? क्या कश्मीर पर पाकिस्तान का रुख उसकी घरेलू नाकामियों से ध्यान भटकाने की कोशिश है?

India Pakistan UNHRC: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के मंच पर भारत ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के इतिहास में अब तक की सबसे तीखी और करारी फटकार लगाई है। आतंकवाद को लेकर हमेशा रोना रोने वाले और खुद को पीड़ित बताने वाले पाकिस्तान के पाखंड की परतें भारत ने पूरी दुनिया के सामने उधेड़ कर रख दी हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी अनुपमा सिंह ने बिना किसी झिझक के पाकिस्तान को एक 'फ्रेंकस्टीन स्टेट' (Frankenstein State) करार दिया। भारत के इस आक्रामक रुख और बेहद सख्त बयानों ने वैश्विक मंच पर तहलका मचा दिया है, जिससे नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच का कूटनीतिक तनाव एक नए चरम पर पहुंच गया है।

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खुद का बनाया राक्षस जब खुद को ही काटने दौड़े: 'फ्रेंकस्टीन' का खौफनाक सच

भारत ने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के उस विरोधाभास को बेनकाब किया, जिसे वह सालों से दुनिया के सामने छुपाने की कोशिश कर रहा था। भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह ने सवाल उठाया कि जो देश सरकारी नीति के तहत आतंकवादियों को पालता है, वह खुद को पीड़ित कैसे कह सकता है?

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अनुपमा सिंह ने बेहद तल्ख लहजे में कहा, "यह एक ऐसे 'फ्रेंकस्टीन स्टेट' का जीता-जागता उदाहरण है, जो तब हैरान रह जाता है जब उसका अपना ही बनाया राक्षस (आतंकवाद) उसे ही काटने दौड़ता है।" भारत का यह इशारा साफ तौर पर मैरी शेली के मशहूर उपन्यास 'फ्रेंकस्टीन' की तरफ था, जिसमें एक वैज्ञानिक एक ऐसा राक्षस बना देता है जो बाद में खुद उसी के नियंत्रण से बाहर होकर उसी को तबाह कर देता है। भारत ने साफ किया कि पाकिस्तान ने भारत और दुनिया को नुकसान पहुंचाने के लिए जो आतंकी नेटवर्क तैयार किया था, अब वही नेटवर्क खुद पाकिस्तान की बर्बादी का कारण बन रहा है।

रक्षा मंत्री का वो कबूलनामा: 30 साल तक किया अमेरिका का 'गंदा काम'

भारत ने UNHRC में पाकिस्तान के ही रक्षा मंत्री के पुराने बयानों को हथियार बनाकर उन पर वार किया। हालांकि सिंह ने सीधे तौर पर नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के उस चौंकाने वाले इंटरव्यू की तरफ था जिसने कुछ समय पहले अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बटोरी थीं।

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ख्वाजा आसिफ ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया था कि पाकिस्तान ने तीन दशकों से भी ज्यादा समय तक आतंकवादी संगठनों को न सिर्फ पनाह दी, बल्कि उन्हें ट्रेनिंग और भारी-भरकम फंडिंग भी मुहैया कराई। आसिफ ने बेहद शर्मनाक तरीके से कबूला था कि 9/11 के हमलों के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका और पश्चिमी देशों के इशारों पर उनके लिए "गंदा काम" (Dirty Work) किया था। भारत ने इसी कबूलनामे को दुनिया के सामने रखते हुए पूछा कि जब इनके खुद के रक्षा मंत्री आतंकवाद को पालने की बात गर्व से स्वीकार करते हैं, तो इनका पीड़ित बनने का नाटक अब और कितने दिन चलेगा?

पीओके में रोटी के बदले गोलियां: कश्मीर पर पाकिस्तान को दो टूक संदेश

आतंकवाद के अलावा भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में मानवाधिकारों के क्रूर हनन का मुद्दा उठाकर इस्लामाबाद को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया। हाल ही में रावलकोट और पूरे पीओके में बढ़ती महंगाई, आटे-चावल की किल्लत और बिजली की आसमान छूती दरों के खिलाफ आम जनता सड़कों पर उतर आई थी।

  • बर्बर कार्रवाई: जब भूखी जनता ने सरकार से रोटी और सब्सिडी वाले अनाज की मांग की, तो पाकिस्तानी सेना और पुलिस ने उन पर गोलियां बरसा दीं।
  • खौफनाक आंकड़े: इस दमनकारी कार्रवाई में 16 बेकसूर नागरिकों की मौत हो गई और 40 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
  • संसार से कटे लोग: जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) के मुताबिक, विरोध को दबाने के लिए इंटरनेट और संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप कर दी गई थी। भारत ने साफ कहा कि रोटी मांगने वालों को गोलियां देना ही पाकिस्तान का असली मानवाधिकार रिकॉर्ड है।

कश्मीर पर प्रोपेगैंडा बंद करो, अपना घर संभालो: भारत की अंतिम चेतावनी

भारत का स्पष्ट रुख (India's Stance)पाकिस्तान की जमीनी हकीकत (Pakistan's Reality)
जम्मू-कश्मीर भारत का अटूट और अभिन्न अंग है।घरेलू नाकामियों और आर्थिक तंगाली को छिपाने के लिए कश्मीर का राग अलापना।
एकमात्र अनसुलझा मुद्दा PoK पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है।रावलकोट जैसी त्रासदियां और दमनकारी नीतियां।

 अनुपमा सिंह ने अंत में पाकिस्तान को अपनी हरकतों से बाज आने की सख्त हिदायत दी। उन्होंने कहा कि कश्मीर को लेकर फैलाया जाने वाला झूठ असल में पाकिस्तान की अपनी घरेलू और आर्थिक नाकामियों को छिपाने की एक हताश कोशिश मात्र है। भारत ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी कि पाकिस्तान भारतीय इलाकों पर बेबुनियाद दावे ठोकने के बजाय पहले अपने ढहते हुए घर को संभाले। इस महा-टक्कर के बाद अब देखना यह है कि दुनिया के सामने बेनकाब हो चुका पाकिस्तान वैश्विक बिरादरी को क्या मुंह दिखाता है।