भारत-EU समझौते और लेबर कोड के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा व CITU ने 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल बुलाई है। किसानों को कृषि को नुकसान की आशंका है, जबकि सरकार इसे निर्यात और आर्थिक तरक्की के लिए एक बड़ा कदम बता रही है।

नई दिल्ली: भारत-यूरोपीय संघ समझौते के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन का रास्ता अपना लिया है। 12 फरवरी को आम हड़ताल का ऐलान किया गया है। देशभर में विरोध रैलियां निकाली जाएंगी। मांग है कि भारत इस समझौते से पीछे हटे। संयुक्त किसान मोर्चा ने साफ किया है कि यह समझौता देश के कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ा झटका होगा और फलों के जूस और प्रोसेस्ड फूड के टैक्स-फ्री आयात से भारी नुकसान होगा।

वहीं, केंद्र सरकार के नए लेबर कोड और नए रोजगार गारंटी कानून को वापस लेने की मांग को लेकर CITU ने भी 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। CITU के नेतृत्व में देश के 3000 केंद्रों पर यह हड़ताल होगी। इस हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा और दूसरे किसान संगठनों का भी समर्थन मिलेगा। महासचिव एलमारम करीम ने कहा कि कर्नाटक में मजदूर-विरोधी लेबर कोड लागू करने की कांग्रेस सरकार की कोशिश निंदनीय है।

भारत-यूरोपीय संघ समझौता पर क्या है केंद्र सरकार का रुख

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का दावा है कि भारत-यूरोपीय संघ समझौता दुनिया के 25% व्यापार को मजबूत करेगा। भारत से 99% उत्पाद इस समझौते के दायरे में आएंगे, जिससे निर्यात क्षेत्र को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। पीयूष गोयल ने बताया कि इस समझौते से भारत में ज्वेलरी से लेकर खेल के सामान बनाने वालों तक को फायदा होगा। मंत्री ने यह भी साफ किया कि व्यापार में बड़े बदलावों के साथ-साथ यह समझौता रक्षा सहयोग के क्षेत्र में भी एक बड़ी छलांग लाएगा।

उम्मीद है कि इस समझौते से यूरोपीय बाजार से निर्यात होने वाले लगभग 97% उत्पादों पर टैरिफ कम या खत्म हो जाएगा। विदेश मंत्रालय ने इस समझौते को भारत के कूटनीतिक क्षेत्र में एक अहम मील का पत्थर बताया है। 2030 तक लंबे समय के सहयोग को पक्का करने के लिए कदम उठाए गए हैं। यह समझौता आर्थिक तरक्की के अलावा प्रवासन को बढ़ावा देने और उच्च शिक्षा में नई साझेदारी पक्की करने में भी मदद करेगा। विदेश सचिव ने बताया कि यह यूरोप के भारत का सबसे अहम व्यापारिक भागीदार बनने की शुरुआत है।