मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में श्री महाकाल वन मेला 2026 का शुभारंभ किया। मेले में वन उत्पाद, जड़ी-बूटियां, बांस व काष्ठ शिल्प और ‘महाकाल वन प्रसादम्’ आकर्षण का केंद्र हैं। सरकार जनजातीय विकास और आयुर्वेद को बढ़ावा दे रही है।

उज्जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को धार्मिक नगरी उज्जैन में पहली बार आयोजित ‘श्री महाकाल वन मेला-2026’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विंध्य हर्बल के प्राकृतिक रंग-गुलाल, महाकाल स्मृति उपहार किट और ‘महाकाल वन प्रसादम्’ का लोकार्पण किया।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

मुख्यमंत्री ने पन्ना जिले के वनरक्षक श्री जगदीश प्रसाद अहिरवार को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया। वे वन औषधियों से उपचार पद्धति के विशेष जानकार हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 जनवरी को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में उनके द्वारा वनौषधियों के देशज ज्ञान के संरक्षण के प्रयासों की सराहना की थी।

वन उत्पाद और जनजातीय शिल्प को बाजार: Ethnic Craft और Bamboo Products आकर्षण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मेले में प्रदर्शित काष्ठ और बांस से बने एथनिक क्रॉफ्ट आइटम्स पारंपरिक शिल्पकला के बेहतरीन उदाहरण हैं। ये उत्पाद घरों की सुंदरता भी बढ़ाते हैं।

उन्होंने उज्जैनवासियों से अपील की कि वे वन मेले का लाभ उठाएं और प्रदेश की वन संपदा तथा जनजातीय उत्पादों को अपनाकर स्थानीय शिल्पकारों को प्रोत्साहित करें। सरकार ‘महाकाल वन मेला’ के माध्यम से स्थानीय वन उत्पादों और कारीगरों को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल कर रही है। उज्जैन के दशहरा मैदान में आयोजित यह वन मेला 16 फरवरी तक चलेगा।

जैव विविधता और वन संरक्षण: श्री महाकाल वन मेले की विशेष पहचान

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन हमारी धरती की धरोहर और राष्ट्रीय संपदा हैं। उनका संरक्षण और संवर्धन हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि वन मेले प्रदेश की जैविक और वानस्पतिक विविधता को प्रदर्शित करने का प्रभावी माध्यम हैं। इसके जरिए जनजातीय भाई-बहनों को अपने वनोत्पाद और काष्ठ शिल्प बेचने का अवसर मिलता है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि ‘श्री महाकाल वन मेला’ जल्द ही अपनी अलग पहचान स्थापित करेगा।

वनौषधि और आयुर्वेद: प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा

मेले में प्रदर्शित जड़ी-बूटियां और अकाष्ठीय लघु वनोत्पाद आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चिकित्सा में उपयोगी हैं। वनौषधियां कई बीमारियों के इलाज में कारगर साबित हो रही हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्रीय बजट-2026 में एम्स की तर्ज पर तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान खोलने की घोषणा की गई है। इनमें से एक संस्थान उज्जैन में स्थापित करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है।

मेडिकल और आयुर्वेदिक कॉलेजों का विस्तार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में मेडिकल और आयुर्वेदिक कॉलेजों की संख्या तेजी से बढ़ाई जा रही है। पिछले वर्ष विभिन्न जिलों में 8 नए आयुर्वेदिक कॉलेज शुरू किए गए। इस वर्ष इस दिशा में और तेजी लाई जाएगी।

जनजातीय विकास और महाकाल वन प्रसादम् की विशेष पहल

मुख्यमंत्री ने कहा कि भोपाल और उज्जैन जैसे वन मेले प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी लगाए जाने चाहिए, ताकि जनजातीय और वनांचल क्षेत्रों को आर्थिक मजबूती मिल सके। महाशिवरात्रि और विक्रमोत्सव के अवसर पर आयोजित यह वन मेला विशेष आकर्षण का केंद्र है। वन विभाग द्वारा तैयार ‘महाकाल वन प्रसादम्’ में काष्ठ से बने गमले में एक पौधा लगाया गया है। यह गमला भगवान महाकाल को भेंट किया जाएगा। वापस मिलने पर इसे सीधे जमीन में रोपा जा सकेगा। काष्ठ का गमला खाद में बदल जाएगा और पौधा बिना किसी बाधा के बढ़ता रहेगा।