इंदौर के व्यापारियों ने 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर 0.4% एमडीआर (MDR) चार्ज लगाने के प्रस्ताव के विरोध में बुधवार को 'नो यूपीआई डे' मनाया। व्यापारियों का कहना है कि इस चार्ज से महंगाई बढ़ेगी और इसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा।

इंदौर/भोपाल. मध्य प्रदेश में व्यापारी आज बुधवार को सांकेतिक रूप से 'नो यूपीआई डे' (No UPI Day) मना रहे हैं। यानि भोपाल, इंदौर, जबलपुर समेत प्रदेशभर में व्यापारी 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। विरोध जताने के लिए कई दुकानदारों ने अपनी दुकानों के बाहर स्टिकर भी लगाए हैं। इतना ही नहीं वह दो हजार रुपए से ज्यादा का यूपीआई भुगतान भी नहीं ले रहे हैं।

दुकानों के बाहर लगे स्टिकर



इंदौर में व्यापारियों ने दी चेतावनी

  • व्यापारियों का कहना है कि इस नए चार्ज से ग्राहकों के लिए सामान महंगा हो जाएगा और महंगाई बढ़ेगी। उन्होंने सरकार से इस फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की है।
  • साथ ही चेतावनी दी है कि अगर ये चार्ज लागू हुए, तो वे फिर से सिर्फ कैश में लेन-देन शुरू कर देंगे।
  • इंदौर रिटेल गारमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष और अहिल्या चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के संयुक्त सचिव अक्षय जैन ने बताया कि इस विरोध प्रदर्शन को करीब 125 व्यापारिक संगठनों का समर्थन मिला है।
  • अक्षय जैन ने कहा, "आज हम एक सांकेतिक विरोध कर रहे हैं। अहिल्या चैंबर ऑफ कॉमर्स ने 'नो यूपीआई डे' का ऐलान किया है। करीब 125 व्यापारिक संगठनों ने इसका समर्थन किया है और आज सभी सिर्फ कैश में लेन-देन कर रहे हैं।

क्या इससे फिर बढ़ेगी महंगाई

  • इस प्रदर्शन का मकसद व्यापारियों की चिंताओं की तरफ सरकार का ध्यान खींचना है। अगर आप किसी भी तरह का सरचार्ज लगाते हैं, तो इससे लागत बढ़ेगी और लागत बढ़ने पर महंगाई भी बढ़ेगी। हम चाहते हैं कि महंगाई न बढ़े।"
  • उन्होंने आगे कहा कि भले ही सरकार कहे कि यह चार्ज ग्राहकों पर नहीं बल्कि व्यापारियों पर लगेगा, लेकिन आखिर में इसका बोझ ग्राहकों पर ही पड़ेगा। जैन ने समझाया, "व्यापारी पैसे नहीं बनाता है। व्यापारी सामान बेचता है, और अगर सामान की लागत बढ़ती है, तो उसका सीधा असर ग्राहक की जेब पर ही पड़ेगा।"

85 प्रतिशत बिजनेस डिजिटल पेमेंट पर

2016 के बाद डिजिटल पेमेंट की तरफ हुए बदलाव को याद करते हुए जैन ने कहा कि सरकार के डिजिटल इकॉनमी पर जोर देने के बाद व्यापारियों ने इसे अपनाया था। उन्होंने कहा, "हमने सरकार का साथ दिया और डिजिटल पेमेंट को अपनाया। 10 सालों में हम अपने 85 प्रतिशत बिजनेस को डिजिटल पेमेंट पर ले आए हैं। अब जब हम पूरी तरह से डिजिटल हो चुके हैं, तो सरकार को हमारे सपोर्ट से बने इस सिस्टम को नहीं तोड़ना चाहिए। हम सरकार से अपने फैसले पर फिर से विचार करने की अपील करते हैं, क्योंकि इससे महंगाई बढ़ेगी। कीमतों को बढ़ने से रोकने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए।"

15 अक्टूबर के बाद सिर्फ कैश ही लेंगे

  • जैन ने यह भी साफ किया कि व्यापारी 15 अक्टूबर तक यूपीआई पेमेंट लेंगे, लेकिन अगर ये प्रस्तावित चार्ज लागू होते हैं, तो वे मजबूरी में फिर से कैश ट्रांजैक्शन पर लौट आएंगे।
  • इंदौर में रेडीमेड गारमेंट की दुकान चलाने वाले एक अन्य व्यापारी हेमंत दोशी ने कहा कि व्यापारी 2000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित चार्ज का विरोध कर रहे हैं क्योंकि इसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ेगा। दोशी ने कहा, "हम आज 'नो यूपीआई डे' मना रहे हैं। हम 2000 रुपये से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर सरकार के प्रस्तावित चार्ज का विरोध कर रहे हैं क्योंकि इसका सीधा असर ग्राहक पर होगा। हम इसे अपनी जेब से नहीं भर सकते, इसलिए हमें कीमतें बढ़ाकर इसे ग्राहकों से ही वसूलना होगा।"