रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत के लिए मनोवैज्ञानिकों की मदद ली। टीम ने ट्रंप के व्यवहार का विश्लेषण कर ईरानी पक्ष को रणनीति बनाने में मदद की, जिसे ईरान ने सफल बताया।
तेहरान: ये किसी फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि कूटनीति का एक दिलचस्प किस्सा है। खबर है कि ईरान ने अमेरिका के साथ अहम बातचीत के दौरान तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दिमाग को पढ़ने के लिए मनोवैज्ञानिकों (साइकोलॉजिस्ट्स) की एक टीम लगा दी थी। एक सीनियर ईरानी अधिकारी के हवाले से अंतरराष्ट्रीय मीडिया में ये खबर छपी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन एक्सपर्ट्स का काम था ट्रंप के हाव-भाव, उनके बोलने के तरीके और उनके फैसलों का विश्लेषण करना। इसका मकसद ये था कि बातचीत की टेबल पर ईरान अपनी बात इस तरह रखे कि ट्रंप उसे आसानी से मान लें या उस पर पॉजिटिव रिएक्शन दें।
बताया जा रहा है कि ईरान ने इन मनोवैज्ञानिकों और बिहेवियरल एक्सपर्ट्स की मदद आधिकारिक तौर पर लेना तब शुरू किया, जब पिछले साल अप्रैल में इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच पहली द्विपक्षीय बातचीत हुई। एक्सपर्ट्स ने ट्रंप के व्यवहार को बारीकी से स्टडी किया और ईरानी टीम को ऐसे मैसेज तैयार करने में मदद की, जिससे ट्रंप की तरफ से बेहतर प्रतिक्रिया मिले।
ईरान का तो ये भी दावा है कि ये मनोवैज्ञानिक रणनीति खूब काम आई। इस नई कम्युनिकेशन स्टाइल को अपनाने के बाद ट्रंप ईरान के प्रस्तावों पर पहले से ज्यादा पॉजिटिव तरीके से रिएक्ट करने लगे थे।
ये हैरान करने वाली जानकारी अमेरिका और ईरान के बीच एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने से ठीक पहले सामने आई है। हालांकि, व्हाइट हाउस हमेशा से कहता आया है कि ट्रंप पूरी तरह से स्वस्थ हैं, भले ही उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हों।
