ईरान ने अमेरिका से बातचीत से इनकार कर संघर्ष विराम उल्लंघन का आरोप लगाया है। होर्मुज़ में तनाव के बीच भारतीय जहाजों पर गोलीबारी के बाद नौसेना ने सुरक्षा बढ़ाई है, जहाँ 14 भारतीय जहाज़ फंसे हुए हैं।

तेहरान: ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी नई बातचीत की संभावना से इनकार कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्बास अराक़ची ने कहा, 'हम पिछली बातचीत के दौरान हुए अमेरिकी हमलों को नहीं भूल सकते।' उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने सीज़फ़ायर लागू होने के पहले दिन से ही इसका उल्लंघन किया है। अराक़ची ने कहा कि अमेरिकी-इज़राइली हमलों से पहले होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पूरी तरह सुरक्षित था। ईरान का कहना है कि अमेरिका ने समुद्री रास्ते पर रोक लगाई और एक ईरानी जहाज़ पर हमला किया, जो कि सीज़फ़ायर और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है।

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ईरान ने यह भी साफ किया कि अगर अमेरिका ने कोई नया हमला करने की कोशिश की, तो उसे करारा जवाब मिलेगा। अराक़ची ने यह बातें आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहीं। इस बीच, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की तरफ से भारतीय जहाज़ों पर गोलीबारी के बाद भारतीय नौसेना ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है। फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से गुज़रने वाले भारतीय झंडे वाले जहाज़ों को हाई अलर्ट पर रहने को कहा गया है। उन्हें ईरान के रणनीतिक रूप से अहम लारक आइलैंड (Larak Island) से दूर रहने और नौसेना से सीधे निर्देश मिलने पर ही आगे बढ़ने की सलाह दी गई है।

इस तनावपूर्ण माहौल के बावजूद, अब तक 11 भारतीय जहाज़ सुरक्षित रूप से इस रास्ते को पार कर चुके हैं। 18 अप्रैल को 'देश गरिमा' नाम का टैंकर इस इलाके को पार करने वाला आखिरी जहाज़ था। लेकिन उसी दिन, 'जग अर्णव' और 'सन्मार हेराल्ड' नाम के दो भारतीय जहाज़ों पर ईरानी सेना ने गोलीबारी की, जिसके बाद उन्हें वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ा। फिलहाल 'देश गरिमा' अरब सागर में पहुंच चुका है और भारतीय नौसेना उसे सुरक्षा दे रही है। उम्मीद है कि यह जहाज़ 22 अप्रैल तक मुंबई पहुंच जाएगा।

ईरान का लारक आइलैंड, जो उसके तेल एक्सपोर्ट और एनर्जी सेक्टर का केंद्र है, होर्मुज़ जलडमरूमध्य के सबसे संकरे हिस्से में मौजूद है। यह एक हाई-सिक्योरिटी ज़ोन है, जहां रडार सिस्टम और बंकरों का मज़बूत नेटवर्क है। यहां ईरान के सैनिक अड्डे भी हैं, जो तेज़ रफ्तार वाली बोट्स से जहाज़ों पर हमला करने की क्षमता रखते हैं। दुनिया का 20% तेल इसी अहम रास्ते से होकर गुज़रता है, और अब यहां से यात्रा करना बेहद खतरनाक हो गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 14 भारतीय जहाज़ फिलहाल फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। भारतीय नौसेना लगातार इन जहाज़ों के संपर्क में है और उन्हें बिना 'हरी झंडी' के आगे न बढ़ने का निर्देश दिया गया है। फारस की खाड़ी के पास भारतीय नौसेना के सात युद्धपोत तैनात हैं। ये युद्धपोत जलडमरूमध्य पार करके आने वाले भारतीय जहाज़ों को सुरक्षा कवर मुहैया करा रहे हैं। नौसेना इस इलाके में बढ़ते तनाव पर बहुत गंभीरता से नज़र बनाए हुए है।