Abbas Araghchi Controversy: अमेरिका के साथ प्रस्तावित शांति समझौते का ईरान में विरोध क्यों हो रहा है? अमेरिका के साथ प्रस्तावित शांति समझौते का ईरान में विरोध क्यों हो रहा है? अमेरिका के साथ प्रस्तावित शांति समझौते का ईरान में विरोध क्यों हो रहा है?

Iran US Agreement 2026: ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित शांति समझौते को लेकर जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उम्मीदें जताई जा रही हैं, वहीं ईरान के भीतर यह मुद्दा अब गंभीर राजनीतिक विवाद का रूप लेता दिखाई दे रहा है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची के एक हालिया टीवी इंटरव्यू के बाद देश के कट्टरपंथी गुटों ने खुलकर विरोध शुरू कर दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई शहरों में उनके इस्तीफे की मांग तक उठने लगी है।

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मशहद में विदेश मंत्रालय कार्यालय के बाहर प्रदर्शन

उत्तर-पूर्वी ईरानी शहर मशहद में विदेश मंत्रालय के स्थानीय कार्यालय के बाहर दर्जनों प्रदर्शनकारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने विदेश मंत्री अब्बास अराघची के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उन पर राष्ट्रीय हितों से समझौता करने का आरोप लगाया। स्थानीय मीडिया में सामने आए वीडियो में काले चादर पहने महिलाएं और अन्य प्रदर्शनकारी लाल तथा काले झंडे लेकर प्रदर्शन करते दिखाई दिए। भीड़ लगातार "अराघची इस्तीफा दो" और "बेइज्जती करने वाले अराघची मुर्दाबाद" जैसे नारे लगा रही थी।

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कट्टरपंथी गुटों को क्यों है समझौते से आपत्ति?

ईरान के कट्टरपंथी राजनीतिक धड़ों का आरोप है कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित समझौते की मौजूदा शर्तें देश के सामरिक हितों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। उनका मानना है कि इस समझौते से होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का प्रभाव कमजोर पड़ सकता है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के बड़े हिस्से का परिवहन इसी मार्ग से होता है। ऐसे में ईरान लंबे समय से इसे अपनी रणनीतिक ताकत के रूप में देखता रहा है।

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एक इंटरव्यू से भड़का पूरा विवाद

राज्य संचालित टेलीविजन को दिए गए इंटरव्यू में विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था कि प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने का प्रावधान शामिल है। यह नाकेबंदी अमेरिका ने उस समय लागू की थी जब ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में कुछ विवादित कदम उठाए थे। इंटरव्यू के दौरान अराघची ने यह भी कहा कि भविष्य में "होर्मुज स्ट्रेट का प्रशासन पहले जैसा नहीं रहेगा।" हालांकि उन्होंने इसे ईरान की प्रतिरोधक रणनीति का हिस्सा बताते हुए राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा का दावा भी किया, लेकिन उनके इस बयान ने राजनीतिक विरोधियों को सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया।

तेहरान में भी विरोध की खबरें

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो में राजधानी तेहरान स्थित विदेश मंत्रालय मुख्यालय के बाहर भी विरोध प्रदर्शन होने का दावा किया गया है। हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इन कथित प्रदर्शनों में प्रदर्शनकारी केवल अराघची ही नहीं, बल्कि संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ के खिलाफ भी नारे लगाते दिखाई दिए। गालिबाफ इस वार्ता प्रक्रिया में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं और समझौते के पक्षधर माने जाते हैं।

समझौते की समयसीमा पर अलग-अलग दावे

इस बीच समझौते को अंतिम रूप देने की संभावित समयसीमा को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के कुछ अधिकारियों ने दावा किया है कि समझौते को जल्द अंतिम रूप दिया जा सकता है और इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर समारोह की तैयारियां चल रही हैं। हालांकि ईरानी नेतृत्व इस मामले में अधिक सतर्क नजर आ रहा है और आधिकारिक स्तर पर किसी तय तारीख की पुष्टि नहीं की गई है।

ईरानी विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने तत्काल समझौते की संभावना को खारिज करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है और "यह कल नहीं होगा।" हालांकि उन्होंने यह संकेत जरूर दिया कि वार्ताएं अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं और आने वाले दिनों में समझौते को लेकर कोई महत्वपूर्ण घोषणा सामने आ सकती है।

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