हिज़्बुल्लाह से लड़ने के नाम पर इज़राइल दक्षिणी लेबनान पर कब्ज़ा करके अपना इलाका बढ़ाना चाहता है। वहां के स्थानीय लोगों को जबरन निकालकर और इमारतें गिराकर लेबनान के दसवें हिस्से को हड़पने की योजना है।
"क्या हम कभी अपने घर लौट पाएंगे? और अगर लौट भी गए, तो क्या वहां कुछ बचा होगा?" - यह सवाल हुदा का है।
ईरान के साथ चल रही जंग की आड़ में इज़राइल लेबनान में एक बड़ी सैन्य घुसपैठ कर रहा है। कहने को तो यह कार्रवाई ईरान के करीबी संगठन हिज़्बुल्लाह के खिलाफ है, लेकिन असल मकसद दक्षिणी लेबनान पर कब्ज़ा करके अपने देश का विस्तार करना है। इज़राइल की योजना फ़लस्तीनी इलाकों जैसी ही है- स्थानीय लोगों को खदेड़ो, इमारतें तबाह करो और लेबनान के दसवें हिस्से पर कब्ज़ा कर लो। हैरानी की बात यह है कि इज़राइल के रक्षा मंत्री ने खुद इस योजना का खुलेआम ऐलान किया है।
इज़राइल की नज़र दक्षिणी लेबनान पर है, जो दशकों से हिज़्बुल्लाह का गढ़ रहा है और जहां शिया मुस्लिमों की आबादी ज़्यादा है। इज़राइली चेतावनियों के बाद यहां के गांव खाली और वीरान पड़े हैं। हवाई हमलों में घर और इमारतें मलबे में तब्दील हो चुकी हैं। पुलों को भी नष्ट कर दिया गया है, जिससे आसपास के इलाकों में भी खतरा बढ़ गया है। दक्षिणी लेबनान के कई शहर लगभग पूरी तरह से तबाह हो चुके हैं। इस बीच, इज़राइली ज़मीनी सेना दक्षिणी लेबनान के अंदरूनी इलाकों की ओर बढ़ रही है और पहाड़ी इलाकों में हिज़्बुल्लाह से लड़ रही है।
इज़राइल का प्लान और दुनिया की चुप्पी
इस हफ्ते इज़राइल ने अपनी योजना का खुलासा किया। योजना के मुताबिक, ज़मीनी जंग खत्म होने के बाद सीमा से लेकर लितानी नदी तक दक्षिणी लेबनान के एक बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया जाएगा। इज़राइल का दावा है कि उसका मकसद अपने खिलाफ हमलों को रोकने के लिए एक 'सुरक्षा क्षेत्र' बनाना है। मंगलवार को इज़राइली रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने कहा, "जब तक उत्तरी इज़राइल के निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक दक्षिणी लेबनान से भागे लाखों लोगों को वापस नहीं आने दिया जाएगा।"
लेबनान ने इज़राइल की इस सैन्य कार्रवाई की कड़ी निंदा की है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से दखल देने की अपील की है। पिछले हफ्ते लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को लितानी नदी के दक्षिण में इज़राइली कब्ज़े की आशंका के बारे में चेतावनी दी थी। लेकिन, न तो संयुक्त राष्ट्र और न ही अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने कोई ठोस कदम उठाया है। दुनिया बस चुपचाप देख रही है और इज़राइल अंतर्राष्ट्रीय कानूनों को तोड़कर लेबनान पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रहा है।
गांवों पर हवाई हमले, इमारतें ज़मींदोज़
इज़राइल सीमा पर बसे लेबनानी गांवों को पूरी तरह से तबाह कर रहा है। रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने मंगलवार को दोहराया कि यह दक्षिणी लेबनान पर कब्ज़े की योजना का हिस्सा है। उन्होंने इसकी तुलना गाज़ा के रफ़ाह और बैत हानून में की गई कार्रवाई से की, जहां बुलडोज़र और धमाकों का इस्तेमाल करके पूरे के पूरे मोहल्ले मिटा दिए गए थे।
2024 की जंग में भी इज़राइल ने लेबनान के कई सीमावर्ती गांवों को तबाह कर दिया था। कम से कम छह गांव नष्ट हो गए थे। युद्धविराम के बाद भी इज़राइली हवाई हमले जारी रहे, जिससे गांव वाले अपने टूटे हुए घरों को फिर से नहीं बना सके। इज़राइल ने इन ग्रामीणों को अस्थायी घर बनाने की भी इजाज़त नहीं दी।
पुलों पर बमबारी, जाल में फंसे लोग
सिर्फ इमारतें ही नहीं, पुलों को भी बड़े पैमाने पर निशाना बनाया जा रहा है। इज़राइली सेना ने लितानी नदी पर बने ज़्यादातर मुख्य पुलों को यह कहकर तबाह कर दिया है कि वह हिज़्बुल्लाह को अपनी सेना दक्षिणी लेबनान में लाने से रोकना चाहती है। यह नदी इज़राइली सीमा से लगभग 20 मील दूर है और दक्षिणी लेबनान को देश के बाकी हिस्सों से अलग करती है।
नदी का ज़्यादातर हिस्सा गहरी खाइयों से होकर गुज़रता है, इसलिए ये पुल बहुत ज़रूरी हैं। इन पुलों के ज़रिए ही दक्षिण में फंसे आम लोग बाहर निकल सकते थे और उन तक दवा, भोजन और दूसरी ज़रूरी चीज़ें पहुंचाई जा सकती थीं। अब जब इज़राइल ने उत्तरी और दक्षिणी लेबनान को जोड़ने वाले मुख्य पुलों को तोड़ दिया है, तो लोग छोटे पहाड़ी रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं। अगर इज़राइल ने उन्हें भी बंद कर दिया, तो दक्षिणी लेबनान पूरी तरह से अलग-थलग पड़ जाएगा।
शहरों को घेरती इज़राइली सेना
2024 के अंत में हिज़्बुल्लाह और इज़राइल के बीच युद्धविराम समझौता हुआ था। लेकिन तब भी इज़राइल ने सीमा के पास पांच सैन्य चौकियां अपने कब्ज़े में रखी थीं। अब इज़राइल ने वहां कम से कम 5,000 ज़मीनी सैनिक भेजे हैं। इज़राइल ने यह साफ़ नहीं किया है कि उसकी सेना नदी तक जाएगी या दूर से ही नियंत्रण करेगी, और न ही यह बताया है कि वह वहां कब तक रहेगी।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण करके रिपोर्ट दी है कि इज़राइली सैन्य वाहन सीमा के पास चार लेबनानी कस्बों में तैनात हैं। सीमावर्ती शहर खियाम में, इज़राइली हमलों से कई हिस्से समतल हो गए हैं और इमारतें ढह गई हैं। तस्वीरों में टैंक और बख्तरबंद गाड़ियां साफ दिख रही हैं। पास के मेस अल-जबल कस्बे में भी एक अस्पताल परिसर के आसपास इज़राइली सैन्य वाहन देखे गए हैं।
जंग शुरू होते ही यहां के निवासी सब कुछ छोड़कर भाग गए हैं। खियाम से विस्थापित हुए 78 वर्षीय अली अक्कर ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया, "पिछली जंग में टूटे घरों को हमने हाल ही में दोबारा बनाया था। अब सब फिर से तबाह हो रहा है। पिछली बार लौटने की थोड़ी उम्मीद तो थी, इस बार वो भी नहीं है।"
पेट्रोल पंप भी बन रहे निशाना
इज़राइल घरों, पेट्रोल पंपों, मनी एक्सचेंज दफ्तरों और अन्य नागरिक ठिकानों पर यह आरोप लगाकर हवाई हमले कर रहा है कि हिज़्बुल्लाह उनका इस्तेमाल करता है। इस जंग में, इज़राइल ने 'अल अमाना पेट्रोलियम कंपनी' के चार पेट्रोल पंपों को नष्ट कर दिया। यह एक प्रमुख ईंधन सप्लायर है जिस पर हिज़्बुल्लाह से संबंधों के कारण अमेरिका ने पहले प्रतिबंध लगाया था। इज़राइल का दावा है कि ये पंप हिज़्बुल्लाह की कमाई का एक बड़ा ज़रिया हैं। समाचार एजेंसी AFP ने नखौरा और टायर के बीच एक क्षतिग्रस्त पेट्रोल पंप की तस्वीरें जारी की थीं।
न्यूयॉर्क टाइम्स का कहना है कि ये पेट्रोल पंप आम लेबनानी लोगों के लिए एक बड़ी राहत थे, क्योंकि ईरान युद्ध के कारण बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच यहां सब्सिडी वाले रेट पर ईंधन मिलता था।
खियाम शहर के पास के एक गांव से विस्थापित 28 वर्षीय हुदा रजब ने न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा, "इस बार की तबाही और लड़ाई पिछली बार से कहीं ज़्यादा है। इस जंग का खतरा बहुत बड़ा है। क्या हम कभी अपने घर लौट पाएंगे? और अगर लौटे भी, तो क्या वहां कुछ बचा होगा?"
