महान शूटर जसपाल राणा के 12 जून को निधन के बाद, उनके परिवार पर एक और त्रासदी हुई। 28 जून को, जसपाल के जन्मदिन पर, उनकी माँ श्यामा देवी का भी निधन हो गया। इस दोहरी क्षति से परिवार गहरे सदमे में है।
नई दिल्ली/देहरादून: भारतीय शूटिंग के दिग्गज जसपाल राणा के 12 जून को हुए अचानक निधन के सदमे से देश अभी उबरा भी नहीं था। भारत के महानतम पिस्टल शूटरों में से एक, 49 साल के राणा का कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया था। उनका अंतिम संस्कार वाराणसी में किया गया था। राणा का परिवार अभी इस दुख से उबर भी नहीं पाया था कि घर में एक और बड़ी ट्रेजेडी हो गई। कैंसर का इलाज करा रहीं जसपाल राणा की मां श्यामा देवी राणा का दिल्ली में निधन हो गया है। बेटे की मौत के कुछ ही दिनों बाद मां के चले जाने से पूरा परिवार टूट गया है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जताया दुख
श्यामा देवी का 28 जून को नई दिल्ली के आरआर अस्पताल में निधन हुआ। हैरान करने वाली बात यह है कि जिस दिन उनका निधन हुआ, उसी दिन उनके बेटे जसपाल का जन्मदिन था। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने 'X' (ट्विटर) अकाउंट पर यह दुखद खबर साझा की। इससे पहले 17 जून को भी उनके निधन की खबर आई थी, लेकिन परिवार ने इसे गलत बताया था।
सीएम धामी ने अपनी पोस्ट में लिखा, "श्री नारायण सिंह राणा जी की धर्मपत्नी एवं प्रसिद्ध भारतीय निशानेबाज, पद्मश्री स्व. जसपाल राणा जी की पूज्य माताजी के निधन का अत्यंत दुःखद समाचार प्राप्त हुआ। इस कठिन घड़ी में मेरी गहरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। ईश्वर पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें और परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति दें। ओम शांति।"
पूरे राजकीय सम्मान के साथ हुआ था जसपाल राणा का अंतिम संस्कार
इससे पहले, 14 जून को वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर जसपाल राणा को अंतिम विदाई देने के लिए सैकड़ों लोग भावुक मन से इकट्ठा हुए थे। उनके पार्थिव शरीर को देहरादून से एयर एम्बुलेंस के जरिए वाराणसी लाया गया था। शूटिंग की दुनिया के इस आइकॉन को अंतिम संस्कार से पहले पूरे राजकीय सम्मान के साथ सलामी दी गई।
जब उनका पार्थिव शरीर वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचा, तो कई गणमान्य लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। आम लोगों के दर्शन के लिए पार्थिव शरीर को एयरपोर्ट के एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स में रखा गया था। इसके बाद एम्बुलेंस से पार्थिव शरीर को राजघाट और फिर कोर्ट परिसर के रास्ते मणिकर्णिका घाट ले जाया गया। वहां जसपाल के बेटे युवराज ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कीं। इस मौके पर जसपाल के भाई सुभाष, परिवार के अन्य सदस्य, शूटिंग जगत की हस्तियां और सैकड़ों आम लोग मौजूद थे। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे और बीजेपी विधायक पंकज सिंह और राज्य मंत्री शंकर गिरि समेत कई राजनीतिक नेता भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे।
मनु भाकर की ओलिंपिक जीत में राणा की थी बड़ी भूमिका
जसपाल राणा सिर्फ एक खिलाड़ी के तौर पर ही नहीं, बल्कि एक कोच के रूप में भी बेहद सफल रहे। 2024 के पेरिस ओलिंपिक में भारत की स्टार शूटर मनु भाकर (Manu Bhaker) के दो ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतने के पीछे कोच के तौर पर जसपाल राणा की बहुत बड़ी भूमिका थी। भारतीय खेल जगत में इतना बड़ा योगदान देने वाले इस महान दिग्गज और अब उनकी मां को खोने के बाद राणा परिवार गहरे सदमे में है।
