JPSC JSSC Protests: रांची में JPSC-JSSC परीक्षा में धांधली को लेकर छात्रों का प्रदर्शन जारी है। झारखंड सरकार ने कहा है कि वो बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन प्रदर्शनकारी CBI जांच की मांग पर अड़े हैं। इस बीच एक छात्र नेता की भूख हड़ताल भी जारी है।

Jharkhand Student Protest: रांची में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के लंबे समय से चल रहे आंदोलन के बीच, झारखंड की मंत्री दीपिका पांडे और इरफान अंसारी ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार प्रदर्शनकारी छात्रों की जायज मांगों पर बात करने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत से ही इस मसले का हल निकल सकता है।

मंत्रियों का क्या कहना है और क्या हैं आरोप?

मंत्री दीपिका पांडे ने कहा कि सरकार ने प्रदर्शन कर रहे उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की बातचीत की है और उनकी मांगों पर सहमति बनाने की कोशिशें जारी हैं। उन्होंने कहा, "छात्रों की सभी जायज मांगों को पूरा करने के लिए लगातार कोशिशें हो रही हैं। मैं आपके सामने उन बिंदुओं को रखना चाहती हूं जिन पर दो दौर की बातचीत के बाद सहमति बनी थी।"

झारखंड के मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि छात्रों के साथ बातचीत ही किसी भी मुद्दे को सुलझाने का एकमात्र तरीका है। उन्होंने कहा, "कांग्रेस पार्टी युवाओं के साथ है; हमारी सरकार युवाओं के साथ है। उनकी मांगें जायज हैं। सरकार उन पर विचार कर रही है। कुछ बिंदुओं पर अनिश्चितता थी कि सरकार मानेगी या नहीं, लेकिन उन मामलों पर फिर से चर्चा हो रही है। बातचीत ही इस मुद्दे को हल करने का एकमात्र तरीका है... बीजेपी इस मुद्दे को हाइजैक करना चाहती है। इस सब में बीजेपी कहां से आ गई? युवा हमारे हैं; हम उनसे बात कर रहे हैं।"

दोनों मंत्रियों ने बीजेपी पर छात्र आंदोलन का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया। दीपिका पांडे ने आरोप लगाया कि विपक्ष राज्य सरकार पर हमला करने और झारखंड को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाने के लिए छात्रों को "ढाल" के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।

आंदोलन क्यों हो रहा है और अब तक क्या हुआ?

मंत्रियों का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। यह पूरा विवाद झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर है। सरकार ने सोमवार को एक बार फिर बातचीत की पेशकश की, ताकि गतिरोध को तोड़ा जा सके।

यह आंदोलन तीन हफ्तों से ज्यादा समय से चल रहा है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही लाई जाए। उनकी मुख्य मांगों में JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करना और कथित धांधली की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराना शामिल है।

यह विवाद इस महीने की शुरुआत में तब और बढ़ गया जब हजारों नौकरी के उम्मीदवारों ने रांची में झारखंड विधानसभा की ओर मार्च किया। 10 अगस्त को, प्रदर्शनकारियों ने मार्च के दौरान पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ दी, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और पानी की बौछारें कीं। इस टकराव में कई लोग घायल हुए और सरकार व छात्र समूहों के बीच गतिरोध और बढ़ गया।

इस आंदोलन पर अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। बीजेपी ने हेमंत सोरेन सरकार की आलोचना की है और आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। विपक्ष ने सरकार के CBI जांच का आदेश न देने पर भी सवाल उठाए हैं।

एक एक्टिविस्ट की भूख हड़ताल जारी

इस बीच, JLKM नेता और छात्र कार्यकर्ता देवेंद्र नाथ महतो भर्ती से जुड़ी शिकायतों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। 17 अगस्त को उनकी भूख हड़ताल का 15वां दिन था। खबरों के मुताबिक, डिहाइड्रेशन और ब्लड प्रेशर गिरने से उनकी तबीयत बिगड़ गई है।

सरकार का कहना है कि वह प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने को तैयार है, जबकि छात्रों का जोर है कि बातचीत का नतीजा उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई के रूप में निकलना चाहिए। इसलिए, ताजा बातचीत पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि इस लंबे आंदोलन से झारखंड सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है।