Jhansi Kalyani Srivastava: झांसी की 16 साल की कल्याणी श्रीवास्तव ने 2017 में महज ₹1,800 में देसी AC का प्रोटोटाइप बनाया था। जानिए कैसे काम करता था यह सस्ता सोलर कूलिंग सिस्टम और क्यों मिली इसे पहचान।
Who is Kalyani Srivastava: गर्मी में AC चलाना आज भी हर परिवार के बजट में नहीं आता। खासकर बुंदेलखंड जैसे इलाकों में जहां तपती गर्मी रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल कर देती है। ऐसे ही हालात के बीच झांसी की 16 साल की छात्रा कल्याणी श्रीवास्तव ने एक ऐसा प्रयोग किया, जिसने खूब सुर्खियां बटोरीं। साल 2017 में उन्होंने महज ₹1,800 में ‘देसी AC’ तैयार करने का दावा किया था।
कौन हैं कल्याणी श्रीवास्तव?
उस समय कल्याणी लोकमान्य तिलक इंटर कॉलेज में कक्षा 12 की छात्रा थीं। उनका आइडिया किसी महंगे AC की नकल करना नहीं था, बल्कि कम कीमत में गर्मी से राहत का रास्ता तलाशना था। बुंदेलखंड की भीषण गर्मी को देखते हुए उन्होंने आसानी से मिलने वाली चीजों और साधारण तकनीक का इस्तेमाल कर यह प्रोटोटाइप तैयार किया।कल्याणी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि बुंदेलखंड के हर व्यक्ति के लिए AC खरीदना संभव नहीं है, इसलिए उन्होंने इस समस्या का हल खोजने की कोशिश की।
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कैसे काम करता था ₹1,800 वाला ‘देसी AC’?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस डिवाइस में थर्माकोल का आइस बॉक्स और 12 वोल्ट का DC फैन इस्तेमाल किया गया था। ठंडी हवा को एक एल्बो शेप वाले आउटलेट से बाहर भेजने की व्यवस्था थी। इसे सोलर पावर से चलाने की बात भी सामने आई थी। बताया गया कि करीब एक घंटे चलाने के बाद कमरे के तापमान में लगभग 4-5 डिग्री सेल्सियस तक कमी आ सकती थी। हालांकि इसे पारंपरिक AC का सीधा विकल्प समझना सही नहीं होगा। यह मूल रूप से बर्फ और हवा के जरिए स्थानीय स्तर पर ठंडक देने वाला कम लागत वाला सिस्टम था।
IIT दिल्ली से लेकर नारी सम्मान तक मिली पहचान
कल्याणी के इस प्रयोग ने उद्योग जगत का भी ध्यान खींचा। RPG Enterprises के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने X पर उनकी तारीफ करते हुए इसे ग्रामीण इलाकों के लिए उपयोगी प्रयास बताया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनका मॉडल IIT दिल्ली से जुड़े राष्ट्रीय स्तर के मॉडल कॉम्पिटिशन में भी चुना गया। 2018 में उत्तर प्रदेश सरकार की ‘नारी सम्मान’ पहल के तहत उन्हें सम्मानित किया गया।
खास बात यह भी थी कि कल्याणी सिर्फ इनोवेशन तक सीमित नहीं थीं। वह गायन में भी सक्रिय थीं और समकालीन रिपोर्टों के मुताबिक इंडियन आइडल के तीसरे राउंड तक पहुंची थीं। उनकी ₹1,800 वाली पहल आज भी इस बात की मिसाल है कि बड़ा इनोवेशन हमेशा बड़ी लैब से ही निकले, यह जरूरी नहीं।
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