कर्नाटक में 1 नवंबर से दूध की कीमतों में 8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी होगी। इसमें 7 रुपये किसानों को और 1 रुपया सहकारी समितियों को मिलेगा। सरकारी प्रोत्साहन राशि जोड़ने पर किसानों को कुल 47 रुपये प्रति लीटर मिलेंगे। अब नजर खुदरा कीमतों पर है।

दूध खरीदने वाले परिवारों के बजट पर महंगाई का असर और बढ़ सकता है। कर्नाटक सरकार ने दूध की कीमतों में 8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है। नई दरें 1 नवंबर से लागू होंगी। सरकार के मुताबिक, इस फैसले का बड़ा हिस्सा दूध उत्पादक किसानों को मिलेगा, जबकि एक रुपये प्रति लीटर सहकारी समितियों को दिया जाएगा। हालांकि, ग्राहकों को दुकानों पर दूध किस कीमत पर मिलेगा, यह संबंधित ब्रांडों की नई खुदरा दरों पर निर्भर करेगा।

कर्नाटक में 1 नवंबर से महंगा होगा दूध

कर्नाटक में दूध की कीमतों में 8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का फैसला कैबिनेट की बैठक में लिया गया। राज्य के मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। सरकार के फैसले के अनुसार, बढ़ी हुई राशि में से 7 रुपये प्रति लीटर दूध उत्पादक किसानों को मिलेंगे, जबकि एक रुपये प्रति लीटर सहकारी समितियों को मिलेगा। नई दरें 1 नवंबर से प्रभावी होंगी।

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किसानों को अब दूध के लिए मिलेंगे 42 रुपये

सरकार के मुताबिक, कर्नाटक में दूध उत्पादकों को फिलहाल करीब 35 रुपये प्रति लीटर मिलते हैं। कीमत में 7 रुपये की बढ़ोतरी के बाद यह राशि बढ़कर 42 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी। इसके अलावा, किसानों को मिलने वाली 5 रुपये प्रति लीटर की सरकारी प्रोत्साहन राशि भी जारी रहेगी। इसे जोड़ने पर किसानों को कुल 47 रुपये प्रति लीटर मिलेंगे।

किसान 10 रुपये बढ़ाने की कर रहे थे मांग

दूध उत्पादक किसान लंबे समय से कीमतों में बढ़ोतरी की मांग कर रहे थे। किसानों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्रियों से मुलाकात कर दूध के दाम कम से कम 10 रुपये प्रति लीटर बढ़ाने की मांग रखी थी। किसानों का कहना था कि बढ़ती लागत के बीच मौजूदा कीमतों पर दूध उत्पादन करना आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो रहा है। इस मुद्दे पर किसानों ने प्रदर्शन भी किए थे।

कैबिनेट में चर्चा के बाद लिया गया फैसला

मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा के अनुसार, सरकार ने किसानों की मांग और बढ़ोतरी के आर्थिक प्रभाव पर विचार किया। कैबिनेट में चर्चा के बाद 8 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि पर सहमति बनी। इस फैसले के जरिए सरकार ने किसानों को राहत देने के साथ सहकारी समितियों के लिए भी अतिरिक्त राशि निर्धारित की है। सरकार को उम्मीद है कि इससे दूध उत्पादन से जुड़े परिवारों को आर्थिक मदद मिलेगी।

क्या ग्राहकों को भी देना होगा ज्यादा पैसा?

दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का असर उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। हालांकि, किसानों को मिलने वाली राशि में बढ़ोतरी और दुकानों पर बिकने वाले दूध की खुदरा कीमत एक जैसी होना जरूरी नहीं है। अलग-अलग दूध ब्रांड अपनी नई दरें तय कर सकते हैं। इसलिए ग्राहकों को 1 नवंबर से अपने क्षेत्र में उपलब्ध दूध के पैकेट पर लिखी कीमत और संबंधित कंपनी की घोषणा देखनी चाहिए।

लाखों किसान परिवारों को मिलने की उम्मीद है राहत

कर्नाटक सरकार का कहना है कि दूध की कीमतों में बढ़ोतरी से राज्य के लाखों किसान परिवारों को लाभ मिलेगा। किसानों को मिलने वाली राशि बढ़ने से उन्हें पशुओं के चारे, देखभाल और दूध उत्पादन से जुड़ी लागत संभालने में मदद मिल सकती है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि दूध कंपनियां खुदरा कीमतों में क्या बदलाव करती हैं और इस फैसले का किसानों के साथ आम उपभोक्ताओं पर कितना असर पड़ता है।

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