मेरठ जिला जेल में बंद मुस्कान और रविता ने करवाचौथ के लिए चूड़ियां और बिंदी मांगी हैं। संजीवनी महिला संस्था महिला बंदियों को करवे और पूजा का सामान उपलब्ध करा रही है। लेकिन क्या दोनों व्रत रखेंगी? फिलहाल इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

करवाचौथ का त्योहार आते ही बाजारों में चूड़ियों, बिंदियों और सोलह श्रृंगार की रौनक बढ़ जाती है। लेकिन मेरठ की जिला जेल में इस बार करवाचौथ की चर्चा कुछ अलग वजह से हो रही है। चर्चित मामले में जेल में बंद मुस्कान और रविता ने करवाचौथ के लिए चूड़ियां और बिंदी मांगी हैं। संजीवनी महिला संस्था महिला बंदियों को पूजा और श्रृंगार का सामान उपलब्ध करा रही है। हालांकि, दोनों महिलाएं व्रत रखेंगी या नहीं, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है।

करवाचौथ के लिए मुस्कान ने मांगी चूड़ियां और बिंदी

मेरठ जिला जेल में बंद मुस्कान और रविता ने करवाचौथ के लिए श्रृंगार का सामान मांगा है। संजीवनी महिला संस्था की सचिव पारुल बंसल के मुताबिक, दोनों ने चूड़ियां और बिंदी की मांग की थी। संस्था उनकी जरूरत के अनुसार सामान उपलब्ध करा रही है। हालांकि, श्रृंगार का सामान मांगने का मतलब यह नहीं है कि दोनों ने करवाचौथ का व्रत रखने का फैसला भी कर लिया है। फिलहाल इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

महिला बंदियों को मिलेंगे करवे और पूजा का सामान

सोमवार को संजीवनी महिला संस्था की टीम मेरठ जिला जेल पहुंची। संस्था की ओर से महिला बंदियों को करवाचौथ की पूजा के लिए मिट्टी के करवे और श्रृंगार का सामान दिया जा रहा है। टीम ने महिलाओं से उनकी जरूरतों के बारे में भी जानकारी ली, ताकि उन्हें उनकी मांग के मुताबिक सामान उपलब्ध कराया जा सके। इस पहल का उद्देश्य जेल में रह रही महिलाओं को त्योहार मनाने के लिए जरूरी सुविधाएं देना है।

क्या जेल में रहकर रखा जा सकता है करवाचौथ का व्रत?

मेरठ जिला जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, महिला बंदियां अपनी इच्छा से करवाचौथ का व्रत रख सकती हैं। जेल मैनुअल के नियमों के तहत पूजा और फलाहार की व्यवस्था की जाती है। यानी जेल में होने के बावजूद महिलाएं अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार त्योहार मना सकती हैं, बशर्ते इसके लिए निर्धारित नियमों का पालन किया जाए।

पति दूर हो तो कैसे करेंगी पूजा?

जेल प्रशासन के मुताबिक, जिन महिला बंदियों के पति दूसरे शहरों में रहते हैं, वे उनकी तस्वीर या किसी निशानी को सामने रखकर पूजा कर सकती हैं। अगर पति-पत्नी दोनों जेल में बंद हैं, तो नियमानुसार मुलाकात की व्यवस्था की जा सकती है। वहीं, पति के जेल से बाहर होने की स्थिति में भी निर्धारित नियमों के अनुसार मुलाकात कराई जाती है। हालांकि, मुलाकात की सुविधा संबंधित नियमों और प्रशासनिक व्यवस्था पर निर्भर करेगी।

जेल में मुस्कान ने सीखा ब्यूटीशियन का काम

मुस्कान जेल में रहते हुए हुनर सीखने की गतिविधियों में भी शामिल रही है। संजीवनी महिला संस्था की सचिव पारुल बंसल के अनुसार, मुस्कान ब्यूटीशियन का कोर्स सीख चुकी है। उसने जेल में राखी बनाना भी सीखा है। इसके अलावा, जेल में कंडील बनाने का प्रशिक्षण देने की पहल भी की गई, जिसमें मुस्कान ने अपना नाम लिखवाया था। इन गतिविधियों का उद्देश्य महिला बंदियों को नए कौशल सिखाना है, ताकि वे भविष्य में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकें।

महिला बंदियों और उनके बच्चों के लिए भी काम करती है संस्था

संजीवनी महिला संस्था लंबे समय से महिला जेल में सामाजिक कार्य कर रही है। संस्था महिला बंदियों को हुनर सिखाने के साथ उनके बच्चों की पढ़ाई और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी काम करती है। फिलहाल करवाचौथ को लेकर मुस्कान और रविता की मांग चर्चा में है। दोनों व्रत रखेंगी या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। लेकिन जेल में त्योहार मनाने की व्यवस्था और महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण देने की पहल एक बार फिर सुर्खियों में है।