करवा चौथ का व्रत सुहागन महिलाओं अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं। लेकिन राजस्थान एक ऐसी भी पत्नी है, जिसके पति की 8 साल पहले मौत हो चुकी है, लेकिन वह हर साल यह व्रत रखती है। इतना ही नहीं हर साल चांद में हसबैंड का चेहरा देख व्रत को तोड़ती भी है। आइए जानते हैं यह कैसे...

करवा चौथ पर सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। लेकिन राजस्थान के सीकर जिले की सुमन देवी के लिए यह त्योहार अपने शहीद पति को याद करने का मौका है। उनके पति महेश कुमार निठारवाल 18 अक्टूबर 2018 को जम्मू-कश्मीर के द्रास में देश की सेवा करते हुए शहीद हो गए थे। इसके बावजूद सुमन हर साल करवा चौथ का व्रत रखती हैं। वह पति की प्रतिमा की पूजा करती हैं और उनकी यादों के साथ यह दिन बिताती हैं।

शादी के बाद पहला करवा चौथ पति के बिना मनाया

  • सीकर जिले के श्रीमाधोपुर की बिजांवाली ढाणी में रहने वाली सुमन की शादी 18 मार्च 2017 को महेश कुमार से हुई थी। शादी के बाद जब पहला करवा चौथ आया, तब महेश ड्यूटी पर तैनात थे। सुमन ने सोलह श्रृंगार किया, पूजा की और चांद को देखकर व्रत पूरा किया।
  • लेकिन अगले ही साल उनकी जिंदगी बदल गई। 18 अक्टूबर 2018 को द्रास में ड्यूटी के दौरान बर्फ में दबने से महेश शहीद हो गए। शादी के करीब 20 महीने बाद ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। महेश की शहादत दूसरे करवा चौथ से महज 9 दिन पहले हुई थी।

दीपावली पर बेटी के साथ आने का किया था वादा

  • सुमन के मुताबिक, महेश ने हादसे से पहले कहा था कि इस बार दीपावली अपनी बेटी के साथ मनाएंगे। लेकिन उनका यह वादा पूरा नहीं हो सका। उस समय उनकी बेटी अनुष्का सिर्फ 7 महीने की थी।
  • पति के जाने के बाद सुमन ने 2019 में पहली बार उनकी याद में करवा चौथ का व्रत रखा। वह कहती हैं कि चांद को देखकर उन्हें अपने पति का चेहरा याद आता है। उनके लिए यह त्योहार सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि साथ बिताए पलों को याद करने का दिन है।

घर के पास लगाई शहीद पति की प्रतिमा

  • 18 अक्टूबर 2023 को घर के पास कल्याणपुरा रोड पर महेश की प्रतिमा लगाई गई। अब सुमन हर साल करवा चौथ पर वहां जाकर तिलक लगाती हैं और आरती उतारती हैं।
  • महेश के पिता गिरधारी लाल के मुताबिक, उनके बेटे मार्च 2016 में सेना में भर्ती हुए थे और 6 राजपूताना राइफल्स में तैनात थे। उनकी बेटी अनुष्का अब 8 साल की है और तीसरी कक्षा में पढ़ती है।
  • सुमन के लिए हर करवा चौथ पति की यादों से जुड़ा है। महेश आज उनके साथ नहीं हैं, लेकिन उनका प्यार और देश के लिए दिया गया बलिदान परिवार के जीवन का अहम हिस्सा बना हुआ है।