जज की कुर्सी पर सफेद सरसों के दाने, CCTV में कैद रहस्यमयी हरकत और फिर गिरफ्तारी! आखिर कोर्ट में महिला क्या करना चाहती थी? कर्नाटक का मामला बना चर्चा का विषय।
Karnataka Black Magic Case: सच्चाई कई बार कल्पना से भी ज़्यादा अजीब और हैरान करने वाली होती है। देश के न्याय के मंदिर, जहाँ सिर्फ सबूतों, दलीलों और कानून की बात होती है, वहाँ अगर तंत्र-मंत्र और काले जादू की परछाईं मंडराने लगे, तो किसी के भी रोंगटे खड़े हो सकते हैं। कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर से एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने कानून के रखवालों से लेकर आम जनता तक को हैरान और सन्न कर दिया है। यहाँ एक बुजुर्ग महिला ने किसी अदालती फैसले को प्रभावित करने या शायद जज को अपने वश में करने के लिए सीधे अदालत कक्ष के भीतर ही अपनी तांत्रिक क्रियाओं का जाल बिछा दिया।
बंद कमरे का रहस्य: सीसीटीवी फुटेज ने खोला खौफनाक राज
यह हैरान कर देने वाली घटना चिक्कबल्लापुर के 'प्रथम अतिरिक्त वरिष्ठ सिविल जज और न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) कोर्ट' की है। आम दिनों की तरह ही अदालत की कार्यवाही समाप्त होने के बाद जब सुबह कोर्ट रूम को खोला गया, तो वहाँ सब कुछ सामान्य दिख रहा था। लेकिन कोर्ट के अधिकारियों को कुछ ऐसी संदिग्ध चीजें मिलीं, जिससे उनके मन में शंका पैदा हुई। जब दो दिन पुराने सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को खंगाला गया, तो स्क्रीन पर जो कुछ दिखा उसने सबके होश उड़ा दिए।
CCTV देख अधिकारियों के उड़े होश
कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले के प्रथम अतिरिक्त वरिष्ठ सिविल जज एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) कोर्ट में हुई एक असामान्य घटना ने अदालत प्रशासन को सतर्क कर दिया। कोर्ट परिसर में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच के दौरान अधिकारियों ने देखा कि एक 65 वर्षीय महिला अत्यंत गुपचुप तरीके से कोर्ट रूम के भीतर दाखिल होती है। वह सीधे न्याय की मुख्य गद्दी यानी जज की खाली कुर्सी की तरफ बढ़ती है और वहां एक अजीबोगरीब अनुष्ठान करने लगती है।" महिला ने अपनी जेब से कुछ निकाला और मंत्रोच्चारण करते हुए उसे जज की सीट और उसके आसपास छिड़क दिया। कोर्ट के बंद कमरे में इस तरह के तांत्रिक अनुष्ठान को देखकर कोर्ट प्रशासन में हड़कंप मच गया। बताया गया कि महिला ने सफेद सरसों के दाने कुर्सी पर छिड़का था।
आखिर कौन है वह महिला और क्या है आरोप?
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार की गई महिला की पहचान मंजुला (65 वर्ष) के रूप में हुई है। आरोप है कि उसने एक कथित धार्मिक या तांत्रिक अनुष्ठान के तहत जज की कुर्सी पर मंत्रोच्चारित सफेद सरसों के दाने छिड़के। हालांकि, पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि महिला का उद्देश्य क्या था और वह अदालत में यह कथित अनुष्ठान क्यों कर रही थी। फिलहाल जांच एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं।
मंत्रों से अभिमंत्रित सरसों और मंजुला का खतरनाक इरादा
पुलिस द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई में इस रहस्यमयी महिला की पहचान मंजुला (65 वर्ष) के रूप में हुई। तफ्तीश में जो बातें सामने आईं, वे किसी सस्पेंस थ्रिलर फिल्म जैसी थीं:
- सफेद सरसों का रहस्य: महिला अपने साथ सामान्य सरसों नहीं, बल्कि कथित तौर पर तंत्र-मंत्र से अभिमंत्रित (फूंके हुए) सफेद सरसों के दाने लेकर आई थी।
- निशाने पर न्याय की कुर्सी: महिला का मुख्य निशाना जज की कुर्सी थी। तंत्र विद्या में सफेद सरसों का उपयोग अक्सर किसी को वश में करने, उच्चाटन करने या बाधा डालने के लिए किया जाता है।
- सीधे कोर्ट रूम में घुसपैठ: सबसे बड़ी सुरक्षा चूक और हैरानी की बात यह थी कि महिला इतनी आसानी से न्याय की सबसे संवेदनशील जगह तक पहुँचने में कामयाब रही।
सुरक्षा अधिकारियों के लिए यह केवल अंधविश्वास का मामला नहीं था, बल्कि सीधे तौर पर न्यायपालिका की गरिमा और सुरक्षा में बड़ी सेंधमारी थी।
अंधविश्वास की बेड़ियां और कानून का शिकंजा
जैसे ही यह खौफनाक सच सामने आया, कोर्ट के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी ने तुरंत पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी महिला मंजुला को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने बताया कि उसके खिलाफ बेहद सख्त कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है। महिला पर 'कर्नाटक अमानवीय बुरी प्रथाओं और काले जादू की रोकथाम और उन्मूलन अधिनियम, 2017' (Karnataka Prevention and Eradication of Inhuman Evil Practices and Black Magic Act, 2017) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता और सुरक्षा को देखते हुए आरोपी महिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि विज्ञान और तकनीक के इस दौर में भी अंधविश्वास की जड़ें समाज में कितनी गहरी जमी हुई हैं, जहाँ लोग अपने मुकदमों और कानूनी विवादों को जीतने के लिए दलीलों के बजाय काले जादू का सहारा लेने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं। फिलहाल, पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या मंजुला ने यह कदम किसी तांत्रिक के उकसावे पर उठाया था या इसके पीछे कोई और बड़ी साजिश छिपी है।


