केरल चुनाव में LDF विकास, UDF सत्ता-विरोधी लहर, और BJP मोदी की छवि पर केंद्रित है। तीनों गठबंधन आंतरिक कलह, सबरीमाला विवाद और आर्थिक संकट जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
केरल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए चुनाव आयोग ने तारीखों का ऐलान कर दिया है। यह चुनाव राज्य की राजनीति में बड़ा मोड़ ला सकता है। चुनाव अधिसूचना 16 मार्च को जारी होगी, नामांकन की अंतिम तिथि 23 मार्च है। नामांकन जांच 24 मार्च को और नाम वापसी 26 मार्च तक। 140 सीटों पर 9 अप्रैल को एक चरण में मतदान होगा, जबकि 4 मई को मतगणना। राज्य में 2.70 करोड़ मतदाता हैं। आइए जानते हैं केरल में पार्टियों की ताकत-कमजोरी, मौका और क्या हैं चुनोतियां…
बीजेपी
ताकत: तिरुवनंतपुरम नगर निगम में पहली बार मिली जीत ने पार्टी को एक मजबूत आधार दिया है। प्रधानमंत्री मोदी की छवि का भी वोटों पर अच्छा असर पड़ने की उम्मीद है। पार्टी के पास जबरदस्त प्रचार करने की क्षमता है।
कमजोरी: दशकों से राज्य की सत्ता पर काबिज विपक्षी गठबंधनों से मुकाबला करना एक बड़ी चुनौती है। केंद्र की बीजेपी सरकार पर केरल के साथ अन्याय करने का आरोप भी एक बड़ा झटका है।
मौका: युवाओं और कुछ समुदायों को साथ लाया जा सकता है। हाल ही में गठबंधन में शामिल हुई 'ट्वेंटी20' पार्टी की वजह से यह मुमकिन लग रहा है। मोदी सरकार के विकास कार्यों को सामने रखकर वोटर्स को मनाया जा सकता है।
चुनौती: अलग-अलग समुदायों को एक साथ लाना मुश्किल है। जो लोग पारंपरिक रूप से विरोधियों के साथ रहे हैं, उन्हें अपनी तरफ खींचना आसान नहीं होगा। बीजेपी शासित राज्यों में ईसाइयों पर हुए हमलों का असर यहां भी देखने को मिल सकता है।
यूडीएफ (UDF)
ताकत: सत्ताधारी सरकार के खिलाफ माहौल का फायदा। उपचुनावों और 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली जीत। कोई बड़ा विवाद या अंदरूनी कलह न होने से ताकत दोगुनी है।
कमजोरी: गठबंधन का हिस्सा कांग्रेस में अंदरूनी गुटबाजी से नुकसान हो सकता है। मुख्यमंत्री के तौर पर पेश करने के लिए किसी बड़े चेहरे की कमी है।
मौका: मुस्लिम और ईसाई जैसे अल्पसंख्यक वोटरों को अपनी तरफ खींच सकते हैं। राज्य में बीजेपी के बढ़ते असर से हिंदू वोटों के बंटवारे का भी फायदा मिल सकता है। सबरीमाला सोने की चोरी के मामले को सरकार के खिलाफ इस्तेमाल करने का मौका है।
चुनौती: LDF विकास के नाम पर जो प्रचार कर रही है, हो सकता है वोटर उसकी तरफ झुक जाएं। जमात-ए-इस्लामी से हाथ मिलाने की वजह से हिंदू वोट कट सकते हैं। पिछड़े वर्गों का पूरा भरोसा जीतने में नाकाम रहे हैं। तिरुवनंतपुरम, पत्तनंतिट्टा और आलप्पुषा में बीजेपी का बढ़ता प्रभाव भी नुकसानदायक है। कांग्रेस से निकाले गए विधायक राहुल मामकुट्टतिल पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोप भी एक दाग हैं।
एलडीएफ (LDF)
ताकत: कई विकास योजनाओं को सामने रखकर खुद को जन-हितैषी सरकार बता सकते हैं। इस बार के बजट में भी कई कल्याणकारी योजनाएं थीं, जिससे वोट खींचना आसान होगा।
कमजोरी: कल्याणकारी योजनाओं के बावजूद स्थानीय चुनावों में जीत नहीं मिली। सबरीमाला मंदिर से सोना गायब होने के मामले में CPM नेताओं का नाम आना एक झटका हो सकता है। गठबंधन के अंदर भी फूट है।
मौका: सबरीमाला मामले के आरोपियों का कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के साथ दिखने को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। राहुल मामकुट्टतिल पर लगे आरोप भी एक मुद्दा बन सकते हैं।
चुनौती: CPI(M) और CPI के बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं। जब विपक्ष महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठा रहा है, ऐसे में राज्य के परिवहन मंत्री के. बी. गणेश कुमार पर उनकी पत्नी द्वारा लगाए गए धोखे के आरोप से नुकसान हो सकता है। वायनाड और इडुक्की में इंसान और जानवरों के बीच बढ़ते संघर्ष से लोगों में नाराजगी है।
केरल चुनाव 2026 के बड़े मुद्दे
- सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश का विवाद
- राज्य का आर्थिक संकट और इंसान-जानवर संघर्ष
- खेती का संकट, बढ़ती लागत और घटती आमदनी
- मेडिकल लापरवाही की बढ़ती घटनाएं
- हिंसा, पुलिस और हिरासत में टॉर्चर जैसी घटनाएं
- केंद्र सरकार द्वारा केरल पर लगाए गए वित्तीय प्रतिबंध
- राज्य की कर्ज लेने की क्षमता पर लगाई गई सीमा
- नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) का मुद्दा


