Khan Sir Firing Case: खान सर के खिलाफ पुलिस ने किन धाराओं में FIR दर्ज की है और इसकी वजह क्या बताई जा रही है? फायरिंग मामले में खान सर ने आत्मरक्षा को लेकर क्या सफाई दी है और पुलिस की जांच किस दिशा में बढ़ रही है? पटना में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के पीछे क्या कारण है और वे प्रशासन से क्या मांग कर रहे हैं?

Khan Sir Arrest: पटना में शिक्षा जगत से जुड़ा एक विवाद अब कानून, सुरक्षा और छात्र राजनीति के बड़े सवालों के केंद्र में आ गया है। चर्चित शिक्षक और खान ग्लोबल स्टडीज के संस्थापक फैसल खान उर्फ खान सर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह कोई शैक्षणिक पहल या छात्रों के लिए अभियान नहीं, बल्कि उनके कोचिंग संस्थान पर हुए हमले के बाद सामने आया फायरिंग का वीडियो है, जिसने पूरे मामले को नई दिशा दे दी है।

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पुलिस ने वीडियो के आधार पर कार्रवाई करते हुए खान सर के खिलाफ हत्या के प्रयास और शस्त्र अधिनियम की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है। वहीं, उनके दो सुरक्षाकर्मी पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं। दूसरी ओर, हजारों छात्र सड़कों पर उतरकर निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग कर रहे हैं।

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क्या है पूरा मामला?

2 जून की रात पटना के कदमकुआं इलाके में स्थित खान ग्लोबल स्टडीज कोचिंग संस्थान में हंगामे की खबर सामने आई थी। आरोप है कि कुछ लोग संस्थान परिसर में घुस आए, वहां तोड़फोड़ की, पत्थरबाजी की और सुरक्षाकर्मी के साथ मारपीट की। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया। शुरुआत में खान सर ने दावा किया था कि हमलावरों की ओर से कई राउंड गोलियां चलाई गई थीं। हालांकि बाद में उन्होंने इस दावे से दूरी बना ली। इसी बीच एक वीडियो सामने आया, जिसमें कोचिंग संस्थान के बाहर दो सुरक्षाकर्मी फायरिंग करते दिखाई दिए। यही वीडियो अब पुलिस जांच का सबसे महत्वपूर्ण आधार बन गया है।

सुरक्षाकर्मियों की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा बढ़ा

वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने दोनों सुरक्षाकर्मियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान दोनों सुरक्षाकर्मियों ने दावा किया कि फायरिंग खान सर के निर्देश पर की गई थी। इसी बयान के आधार पर जांच का दायरा बढ़ाया गया और बाद में खान सर के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई। बताया जा रहा है कि पुलिस उनकी संभावित लोकेशन पर लगातार छापेमारी कर रही है और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

खान सर की सफाई: "यह आत्मरक्षा में उठाया गया कदम था"

मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए खान सर ने कहा कि फायरिंग किसी को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से नहीं बल्कि आत्मरक्षा के लिए की गई थी। उनका कहना है कि कोचिंग के सुरक्षाकर्मी पर पहले हमला किया गया था और हालात तेजी से बिगड़ रहे थे। ऐसे समय में पुलिस के मौके पर पहुंचने में समय लग सकता था, इसलिए सुरक्षाकर्मियों ने चेतावनी देने के लिए फायरिंग की। खान सर ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी संस्थान पर हमला हो और सुरक्षा कर्मियों पर जानलेवा हमला किया जाए, तो सुरक्षा व्यवस्था का औचित्य क्या रह जाता है।

छात्रों को संबोधित कर जारी किया वीडियो संदेश

विवाद के बीच खान सर ने छात्रों के नाम एक वीडियो संदेश भी जारी किया। इसमें उन्होंने दावा किया कि उनके एक सुरक्षाकर्मी को 20 से 25 लोगों ने मिलकर बेरहमी से पीटा था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के वास्तविक दोषियों की गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई है और पूरे मामले को दूसरी दिशा में मोड़ने की कोशिश की जा रही है। खान सर ने अपने संस्थान की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि यदि उनका कोचिंग संस्थान प्रभावित होता है या बंद होता है, तो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। उनके अनुसार उनका उद्देश्य शिक्षा को सुलभ और किफायती बनाना है।

ज्ञान बिंदु जीएस अकादमी का नाम भी आया सामने

इस मामले में ज्ञान बिंदु जीएस अकादमी के निदेशक रौशन आनंद का नाम भी चर्चा में है। खान सर की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कोचिंग संस्थान पर हुए हमले के पीछे ज्ञान बिंदु से जुड़े लोगों की भूमिका हो सकती है। इसके बाद पुलिस ने रौशन आनंद और उनके दो सहयोगियों अभिषेक तथा गौरव को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। हालांकि रौशन आनंद ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए खुद को निर्दोष बताया है।

सड़क पर उतरे छात्र, निष्पक्ष जांच की मांग

मामले ने केवल कानूनी ही नहीं बल्कि सामाजिक और छात्र आंदोलन का रूप भी लेना शुरू कर दिया है। बड़ी संख्या में छात्र रौशन आनंद की रिहाई और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए। पटना के विभिन्न इलाकों से छात्रों ने मार्च निकाला और कारगिल चौक पहुंचकर मोमबत्तियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को जांच पूरी होने से पहले दोषी नहीं माना जाना चाहिए और पुलिस को निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए।

जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर

फिलहाल पुलिस वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, डिजिटल साक्ष्यों और जब्त हथियारों की तकनीकी जांच के आधार पर मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या फायरिंग वास्तव में आत्मरक्षा के लिए की गई थी या फिर यह कानून का उल्लंघन था। इस सवाल का जवाब जांच पूरी होने और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

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