दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी शब्बीर अहमद लोन को गिरफ्तार किया, जो बांग्लादेश से भारत में हमलों की साजिश रच रहा था। पहचान बदलने के लिए गुरुग्राम में हेयर ट्रांसप्लांट और डेंटल ट्रीटमेंट का खुलासा, जांच में बड़ा नेटवर्क, पोस्टर मॉड्यूल और विदेशी कनेक्शन सामने। 

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की गिरफ्त में आए लश्कर-ए-तैयबा के खूंखार आतंकी शब्बीर अहमद लोन उर्फ 'राजा' को लेकर एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा हुआ है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। अमूमन आतंक की दुनिया के खूंखार चेहरे खुद को छिपाने के लिए कंदराओं और अंधेरी गलियों का सहारा लेते हैं, लेकिन लश्कर का यह मास्टरमाइंड दिल्ली-NCR की चकाचौंध के बीच बैठकर अपनी 'खूबसूरती' निखारने में मसरूफ था। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, भारत के खिलाफ बड़ी तबाही की साजिश रचने के साथ-साथ यह आतंकी अपनी दिखावट (Looks) को लेकर इस कदर पागल था कि उसने दिल्ली के पास साइबर सिटी गुरुग्राम में न सिर्फ हेयर ट्रांसप्लांट कराया, बल्कि अपने दांतों को चमकाने के लिए महंगा इलाज भी लिया।

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पहचान बदलने का 'अंडरग्राउंड' प्लान: 1.5 लाख में खरीदे घने बाल

सुरक्षा एजेंसियों की तफ्तीश में सामने आया है कि श्रीनगर के कंगन का रहने वाला शब्बीर अहमद लोन उर्फ 'कश्मीरी' अपनी असली पहचान को पूरी तरह मिटा देना चाहता था। वह भूमिगत रहते हुए एक बिल्कुल नया चेहरा अख्तियार करना चाहता था ताकि देश की टॉप खुफिया एजेंसियां उसे कभी पहचान न पाएं। इसी गहरी साजिश के तहत उसने गुरुग्राम के एक नामी डॉक्टर से संपर्क किया। सूत्रों के मुताबिक, उसने अपने सिर पर घने बाल उगाने यानी हेयर ट्रांसप्लांट की जटिल प्रक्रिया के लिए करीब 1.5 लाख रुपये कैश खर्च किए। जांचकर्ता इस बात से हैरान हैं कि जब एजेंसियां उसकी तलाश में खाक छान रही थीं, तब वह गुरुग्राम के क्लिनिक में बैठकर अपना हुलिया बदल रहा था।

चमकीले दांतों के पीछे छिपा था खौफनाक कातिल

हुलिए में बदलाव की कहानी सिर्फ सिर के बालों तक ही सीमित नहीं रही। स्पेशल सेल के सूत्रों ने बताया कि लोन ने अपने दांतों की बनावट को ठीक करने और उन्हें चमकीला बनाने के लिए गुरुग्राम के ही एक नामी डेंटिस्ट से भी इलाज करवाया था। इस कॉस्मेटिक सर्जरी और डेंटल ट्रीटमेंट के पीछे मुख्य मकसद सिर्फ सुंदर दिखना नहीं, बल्कि लश्कर के नेटवर्क को बिना किसी रोक-टोक के चलाना था। सुंदर और कॉरपोरेट लुक अपनाकर वह सुरक्षा जांच चौकियों (Check-posts) और सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की नजरों में धूल झोंककर आसानी से वीआईपी मूवमेंट करना चाहता था।

हाफ़िज़ सईद का खासमखास: 2005 के फिदायीन हमले से बांग्लादेश कनेक्शन

शब्बीर अहमद लोन का इतिहास बेहद खौफनाक रहा है। वह एक समय लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक और वैश्विक आतंकी हाफिज सईद के सीधे संपर्क में था और पाकिस्तान में बकायदा हथियारों की ट्रेनिंग ले चुका था। साल 2005 में वह पहली बार सुरक्षा एजेंसियों के हत्थे तब चढ़ा था, जब वह देश की राजधानी दिल्ली को फिदायीन (आत्मघाती) हमले से दहलाने की फिराक में था। जेल की सजा काटने और रिहा होने के बाद, वह चकमा देकर बांग्लादेश भाग गया। बांग्लादेश की सरजमीं का इस्तेमाल उसने भारत-केंद्रित आतंकी गतिविधियों को फिर से जिंदा करने और दिल्ली तथा कोलकाता समेत दक्षिण भारत के कई हिस्सों में स्लीपर सेल (Modules) तैयार करने के लिए किया।

पोस्टर से लेकर बारूद तक: स्पेशल सेल ने ऐसे किया 'राजा' का शिकार

हाल ही में दिल्ली और कोलकाता में कई संवेदनशील जगहों पर भारत-विरोधी पोस्टर लगाए गए थे, जिसने सुरक्षा महकमे में हड़कंप मचा दिया था। जब स्पेशल सेल की NDR यूनिट और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने इस जमीनी नेटवर्क की कड़ियां जोड़ीं, तो तार सीधे बांग्लादेश में बैठे शब्बीर अहमद लोन से जुड़े। इसके बाद एक बेहद गोपनीय ऑपरेशन के तहत घेराबंदी की गई और दिल्ली सीमा के पास से इस 'कश्मीरी' आतंकी को दबोच लिया गया।

फिलहाल, दिल्ली पुलिस ने इस कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट वाले खुलासे पर कोई आधिकारिक लिखित बयान जारी नहीं किया है, लेकिन गिरफ्तार लश्कर कमांडर से पूछताछ जारी है। पुलिस अब उन डॉक्टरों और क्लिनिक स्टाफ से भी पूछताछ करने की तैयारी में है, जिन्होंने अनजाने में या जानबूझकर देश के सबसे बड़े दुश्मन का चेहरा बदलने में उसकी मदद की।