Lawrence Bishnoi: लॉरेंस बिश्नोई को साबरमती जेल के हाई-सिक्योरिटी ‘दो सौ खोली’ ब्लॉक में शिफ्ट किए जाने की खबर है। जानिए उसकी कोठरी, दिनचर्या और विदेश से सक्रिय बताए जा रहे गैंग नेटवर्क के बारे में।

जेल की ऊंची दीवारें, सख्त पहरा और बाहरी दुनिया से सीमित संपर्क। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की साबरमती जेल में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किए जाने की खबर सामने आई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उसे जेल के अधिकतम सुरक्षा वाले ‘दो सौ खोली’ ब्लॉक में शिफ्ट किया गया है। यहां उसकी कोठरी करीब 7.5×11 फीट की बताई गई है। इस बदलाव के बीच उसकी दिनचर्या और विदेश से संचालित बताए जा रहे गैंग नेटवर्क पर भी सवाल उठ रहे हैं।

200 कैदियों वाले ब्लॉक में क्यों शिफ्ट हुआ लॉरेंस?

रिपोर्ट के मुताबिक, साबरमती सेंट्रल जेल का ‘ब्लॉक 200’ गंभीर अपराधों के दोषियों के लिए बनाया गया हाई-सिक्योरिटी परिसर है। इसे चार हिस्सों में बांटा गया है और हर हिस्से में करीब 50 कैदी रखे गए हैं। यहां 2008 के सीरियल ब्लास्ट मामले में दोषी ठहराए गए कैदी भी बंद हैं।

इससे पहले लॉरेंस बिश्नोई को जेल के छोटे हाई-सिक्योरिटी परिसर ‘दस खोली’ में रखा गया था, जहां 10 कैदियों की व्यवस्था बताई गई है। नई व्यवस्था का मकसद कैदियों के आपसी संपर्क और आवाजाही को सीमित रखना है।

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ध्यान, हनुमान चालीसा और वकील से बातचीत तक सीमित दिनचर्या?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लॉरेंस सुबह ध्यान करता है, हनुमान चालीसा का पाठ करता है और उपवास भी रखता है। उसका खानपान शाकाहारी बताया गया है। जेल के बाहर संपर्क मुख्य रूप से अदालत की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और वकील के साथ कानूनी मामलों पर चर्चा तक सीमित बताया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जांचकर्ताओं को पिछले दो वर्षों में उसकी ओर से सीधे फोन या संचार का कोई मामला सामने नहीं मिला। हालांकि, यह जानकारी रिपोर्ट में उद्धृत सूत्रों पर आधारित है।

जेल में लॉरेंस, फिर भी विदेश में सक्रिय बताया जा रहा नेटवर्क

रिपोर्ट के मुताबिक, जेल में सख्त निगरानी के बावजूद बिश्नोई गिरोह का नेटवर्क विदेशों से संचालित होने का दावा किया जाता है। इसमें गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा जैसे नामों का भी उल्लेख है। कथित तौर पर विदेश में मौजूद सहयोगी भर्ती, फंडिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे काम संभालते हैं।

हालांकि, जेल के भीतर लॉरेंस की भूमिका और विदेश में नेटवर्क के संचालन से जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। इसलिए इन विवरणों को जांच से जुड़े दावों और मीडिया रिपोर्ट के संदर्भ में ही देखना जरूरी है।

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