बेंगलुरु की एक वकील ने दोस्त को 5 लाख रुपये उधार दिए, जो वापस नहीं मिले। खुद वकील होने के बावजूद, उन्होंने लंबी कानूनी प्रक्रिया और वसूली की अनिश्चितता के कारण केस न करने का फैसला किया। इसे वे एक सबक मानती हैं।

Viral social media story: कहते हैं कि दोस्तों को पैसे उधार देने से दोस्ती खराब हो सकती है। बेंगलुरु की एक वकील के साथ कुछ ऐसा ही हुआ, लेकिन उनका अनुभव बहुत बुरा रहा। जोशीबा देव नाम की इस वकील ने अपनी एक दोस्त को 5 लाख रुपये उधार दिए थे। जब उन्होंने पैसे वापस मांगे, तो दोस्त ने देने से साफ इनकार कर दिया। लेकिन खुद वकील होने के बावजूद जोशीबा ने अपनी दोस्त पर केस नहीं करने का फैसला किया है। उनका कहना है कि कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने में लगने वाले समय और परेशानी को देखते हुए, इस रकम के लिए केस लड़ना घाटे का सौदा है।

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जोशीबा ने बताया कि जब उन्होंने अपनी दोस्त से पैसे वापस मांगे, तो दोस्त ने उनके मुंह पर ही चुनौती दे डाली। दोस्त ने कहा, 'जा, केस कर दे। कोर्ट चली जा। मैं तेरे पैसे वापस नहीं दूंगी।' जोशीबा कहती हैं कि हो सकता है उनकी दोस्त सच में आर्थिक तंगी से गुजर रही हो, लेकिन मैं भी मुश्किल में हूं और अपना ही पैसा वापस मांग रही हूं।

एक वकील के तौर पर जोशीबा बताती हैं कि इस मामले में सालों तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ेगी, लेकिन फिर भी पैसे वापस मिलने की कोई गारंटी नहीं है। इसीलिए उन्होंने केस फाइल न करने का फैसला किया। उनके मुताबिक, एक केस को निपटने में दो से तीन साल लग सकते हैं। अगर तीसरे साल में फैसला मेरे हक में आ भी गया, और उस वक्त भी दोस्त की माली हालत खराब हुई या उसने खुद को दिवालिया (insolvency) घोषित कर दिया, तो मैं क्या करूंगी?

उन्होंने आगे समझाया कि कानूनी कार्रवाई के जरिए पैसा वसूलने के लिए यह साबित करना पड़ता है कि दूसरे पक्ष के पास कोई संपत्ति या कमाई का जरिया है। किसी को भी पैसे देने के लिए बहुत ज्यादा मजबूर नहीं किया जा सकता। किसी और की आर्थिक स्थिति को साबित करना एक बड़ी चुनौती है। मुझे यह साबित करना होगा कि उसके पास निवेश है, घर है, या वह घूमने-फिरने जाती है। यह सारी जानकारी इकट्ठा करना बहुत बड़ा काम है।

जोशीबा ने कहा, 'अगर रकम 10 लाख से ज्यादा होती, तो शायद केस करने का कोई मतलब होता, क्योंकि उसमें से कम से कम 5 लाख तो वसूल हो ही जाते। लेकिन जब अदालतों में पहले से ही 4।9 करोड़ केस पेंडिंग हैं, तो सिर्फ 2।5 लाख रुपये वसूलने के लिए इतनी मेहनत करना नुकसान का सौदा है।'

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उन्होंने कहा, 'मैं इसे एक सबक की तरह ले रही हूं। अब से मैं दोस्तों को सिर्फ उतने ही पैसे दूंगी, जितने डूब जाने पर भी मुझे अफसोस न हो।' इस पोस्ट पर कई लोगों ने कमेंट किया है। ज्यादातर लोगों का कहना है कि इतने पक्के दोस्त को भी बिना किसी गारंटी के इतनी बड़ी रकम उधार नहीं देनी चाहिए।