अमेरिका-ईरान के बीच 14 शर्तों वाले युद्धविराम समझौते का ड्राफ्ट लीक हुआ है। इसमें जंग खत्म करने, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और पाबंदियों में ढील की बात है। ईरान परमाणु हथियार न बनाने का वादा करेगा, बदले में उसे तेल बेचने की इजाजत मिलेगी।

वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग को खत्म करने वाले सीजफायर एग्रीमेंट का ड्राफ्ट लीक हो गया है। अमेरिकी चैनल CNN ने 14 शर्तों वाले इस समझौते का ड्राफ्ट जारी किया है। इसमें जंग को पूरी तरह खत्म करने, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरान पर लगी आर्थिक पाबंदियों में ढील देने जैसी बड़ी बातें शामिल हैं। इस ड्राफ्ट के मुताबिक, ईरान ने वादा किया है कि वो कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।

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CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, ये डॉक्यूमेंट उन्हें एक अमेरिकी अधिकारी से मिला है। फ्रांस में हुए G7 शिखर सम्मेलन में शामिल एक डिप्लोमैट ने भी इस ड्राफ्ट को देखने की पुष्टि की है। इसके अलावा, बातचीत में शामिल दो और डिप्लोमैटिक सूत्रों ने भी इन जानकारियों को सही बताया है।

समझौते के तहत, अमेरिका ईरान को अपना तेल और पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स बेचने की इजाजत देगा। अगर ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम से जुड़े वादे पूरी तरह निभाता है, तो उसे 300 अरब डॉलर के डेवलपमेंट फंड का भी फायदा मिल सकता है। ये फंड अमेरिका और उसके सहयोगी देश मिलकर बनाएंगे। हालांकि, ड्राफ्ट में इस बात का साफ जिक्र नहीं है कि ईरान के पास जो यूरेनियम है, उसका क्या किया जाएगा।

रिपोर्ट में बताया गया है कि इस ड्राफ्ट में वही बातें हैं, जिस पर पिछले रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, उपराष्ट्रपति जे.डी. वान्स और ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने डिजिटली साइन किए थे। फाइनल डॉक्यूमेंट में कुछ बदलाव हो सकते हैं, जिन्हें आने वाले दिनों में पूरा किया जाएगा।

हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक पॉलिटिकल डॉक्यूमेंट है और इसमें उन सीक्रेट मीटिंग्स की बातें शामिल नहीं हैं, जो दोनों देशों के बीच ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर हुई हैं। व्हाइट हाउस ने इस पर कोई भी कमेंट करने से इनकार कर दिया है। वहीं, ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी 'तस्नीम' ने कहा है कि लीक हुआ ड्राफ्ट सही नहीं है। शुक्रवार को इस मेमोरेंडम पर साइन होने के बाद, दोनों देशों को फाइनल एग्रीमेंट की शर्तों पर बातचीत पूरी करने के लिए 60 दिनों का वक्त मिलेगा।

ईरान-अमेरिका के बीच समझौते की 14 शर्तें

1. इस समझौते पर साइन होते ही लेबनान समेत सभी मोर्चों पर तुरंत सीजफायर लागू होगा। दोनों देश दुश्मनी वाली कोई कार्रवाई, धमकी या सैन्य ताकत का इस्तेमाल नहीं करेंगे।

2. दोनों देश एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे और घरेलू मामलों में दखल नहीं देंगे।

3. दोनों पक्ष आपसी सहमति से ज्यादा से ज्यादा 60 दिनों के अंदर एक फाइनल एग्रीमेंट पर पहुंचेंगे। जरूरत पड़ने पर यह समय बढ़ाया जा सकता है।

4. समझौते पर साइन होते ही अमेरिका नौसैनिक नाकाबंदी हटाएगा। 30 दिनों के अंदर जहाजों की आवाजाही को जंग से पहले वाली स्थिति में लाया जाएगा। फाइनल एग्रीमेंट पर साइन होने के 30 दिन के अंदर अमेरिका अपनी सेना वापस बुला लेगा।

5. ईरान 30 दिनों के अंदर फारस की खाड़ी से ओमान की खाड़ी तक जहाजों की आवाजाही को सामान्य करेगा। समुद्री रास्ते से तकनीकी रुकावटें और माइन्स हटाने की निगरानी भी ईरान ही करेगा।

6. अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान के आर्थिक विकास और पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर का एक फंड बनाएंगे। इसे लागू करने की रूपरेखा 60 दिनों में तैयार होगी।

7. अमेरिका, ईरान पर लगी सभी तरह की पाबंदियों को धीरे-धीरे खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी और अमेरिका की एकतरफा पाबंदियां शामिल हैं।

8. ईरान साफ करता है कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। ईरान के पास मौजूद संवर्धित परमाणु सामग्री और अन्य जरूरतों पर फाइनल एग्रीमेंट में फैसला होगा।

9. फाइनल एग्रीमेंट होने तक दोनों पक्ष मौजूदा स्थिति बनाए रखेंगे। ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम का विस्तार नहीं करेगा और अमेरिका कोई नई पाबंदी नहीं लगाएगा या इलाके में सैन्य ताकत नहीं बढ़ाएगा।

10. पाबंदियां पूरी तरह हटने तक, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ईरान को कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट, बैंकिंग, बीमा और ट्रांसपोर्ट के लिए तुरंत छूट देगा।

11. बातचीत की प्रगति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय बैंकों में फ्रीज किए गए ईरान के फंड और संपत्ति को पूरी तरह से जारी कर दिया जाएगा। इस पैसे का इस्तेमाल सेंट्रल बैंक ऑफ ईरान के निर्देशों के अनुसार विकास कार्यों के लिए किया जा सकेगा।

12. फाइनल एग्रीमेंट को सही तरीके से लागू करने और भविष्य की प्रतिबद्धताओं पर नजर रखने के लिए दोनों देशों की भागीदारी वाला एक स्पेशल मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया जाएगा।

13. इस समझौते की शर्त नंबर 4, 5, 10 और 11 (जहाजों की आवाजाही, छूट, फंड रिलीज) के लागू होने के बाद ही दोनों देश बाकी शर्तों पर फाइनल बातचीत करेंगे।

14. दोनों देशों के बीच फाइनल शांति समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक बाध्यकारी प्रस्ताव के जरिए कानूनी रूप से मान्यता देकर लागू किया जाएगा।