LPG Crisis India: ईरान-इजराइल युद्ध के बीच भारत में ईंधन संकट की चर्चा तेज हो गई है। उत्तराखंड में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी पर सरकार ने होटल-रेस्टोरेंट को जलौनी लकड़ी देने का सुझाव दिया है। इस फैसले पर सोशल मीडिया और विधानसभा में बहस शुरू हो गई है।

ईरान-इजराइल युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ रही है। इसका असर भारत के कई हिस्सों में भी दिखने लगा है। इसी बीच उत्तराखंड में रसोई गैस और ईंधन की संभावित कमी को लेकर सरकार के एक बयान ने नई बहस छेड़ दी है।

उत्तराखंड के संसदीय कार्य और वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा है कि अगर कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी बढ़ती है तो होटल और रेस्टोरेंट को वैकल्पिक ईंधन के तौर पर जलौनी लकड़ी उपलब्ध कराई जा सकती है। मंत्री ने अधिकारियों को वन निगम के जरिए लकड़ी की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए हैं।

होटल-रेस्टोरेंट को लकड़ी देने का सुझाव

सरकार का कहना है कि फिलहाल घरेलू गैस की आपूर्ति सामान्य है, लेकिन अगर कॉमर्शियल सिलेंडर की कमी बढ़ती है तो दूसरे विकल्प भी तलाशने होंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि जरूरत पड़ने पर होटल-रेस्टोरेंट जैसे गैर-औद्योगिक कॉमर्शियल सेक्टर के लिए जलौनी लकड़ी की व्यवस्था की जाए। मंत्री का तर्क है कि इससे ईंधन की संभावित कमी से निपटने में मदद मिल सकती है।

पीएनजी और सीएनजी जैसे आधुनिक ईंधनों के दौर में होटल-रेस्टोरेंट के लिए लकड़ी उपलब्ध कराने का सुझाव सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया है। कई लोग इसे सरकार का वैकल्पिक समाधान बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे पुराने समय की व्यवस्था की ओर लौटने जैसा बता रहे हैं। इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

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विधानसभा में विपक्ष ने उठाया सवाल

यह मामला उत्तराखंड विधानसभा में भी उठाया गया। विपक्षी दलों ने सरकार के इस सुझाव पर सवाल खड़े किए। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि अगर प्रदेश में गैस की कमी हो रही है तो सरकार को इसकी आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए। लकड़ी देने की बात करना समस्या का समाधान नहीं है। वहीं विधायक काजी निजामुद्दीन ने भी कहा कि सरकार को गैस की व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए, न कि लोगों को लकड़ी के इस्तेमाल की ओर ले जाना चाहिए। विपक्ष ने इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग भी की।

विपक्ष के सवालों के बीच संसदीय कार्यमंत्री ने सदन में स्पष्ट किया कि फिलहाल राज्य में घरेलू रसोई गैस की कोई बड़ी कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए प्राथमिकता के आधार पर शैक्षिक संस्थानों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संस्थानों को कॉमर्शियल गैस सिलेंडर दिए जा रहे हैं। अगर होटल-रेस्टोरेंट जैसे अन्य क्षेत्रों में ईंधन की समस्या आती है, तो उसके लिए सकारात्मक समाधान निकाला जाएगा।

लकड़ी की सप्लाई बढ़ाने की तैयारी

सरकार ने यह भी कहा है कि जरूरत पड़ने पर नॉन-इंडस्ट्रियल कॉमर्शियल सेक्टर में लकड़ी को वैकल्पिक ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए वन विभाग को लकड़ी के उत्पादन और सप्लाई बढ़ाने की योजना बनाने को कहा गया है, ताकि किसी भी स्थिति में ईंधन की कमी से कामकाज प्रभावित न हो।

देहरादून में गैस की कमी की चर्चा

इस बीच देहरादून में घरेलू और कॉमर्शियल गैस की कमी की खबरें भी सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि अगर अगले कुछ दिनों में गैस आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो कई गैस एजेंसियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि सरकार का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए ईंधन संकट से निपटा जाएगा।

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