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LRAShM क्या है? 15 मिनट में 1,500Km! जिसे रडार भी नहीं पकड़ पाएंगे-DRDO की नई मिसाइल कितनी खतरनाक?
Defence Update: क्या भारत ने समुद्र में युद्ध का नियम बदल दिया है? DRDO की 1,500 किमी रेंज वाली LRAShM हाइपरसोनिक मिसाइल गणतंत्र दिवस 2026 पर पहली बार सामने आएगी। 15 मिनट में दुश्मन के युद्धपोत तबाह करने वाली यह मिसाइल क्या रडार से भी अदृश्य है?

India Hypersonic LRAShM Missile: जैसे-जैसे गणतंत्र दिवस 2026 नज़दीक आ रहा है, भारत की एक नई मिसाइल ने रक्षा जगत में हलचल मचा दी है। इस मिसाइल का नाम है LRAShM (Long Range Anti-Ship Missile)। इसे DRDO ने खास तौर पर भारतीय नौसेना के लिए तैयार किया है। 26 जनवरी को कर्तव्य पथ परेड में इसके पहली बार सार्वजनिक रूप से दिखाए जाने की तैयारी है। यह मिसाइल इतनी खास क्यों मानी जा रही है?
LRAShM आखिर है क्या और यह बाकी मिसाइलों से अलग कैसे है?
LRAShM एक हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है, यानी यह आवाज़ से कई गुना तेज़ रफ्तार से उड़ती है। इसकी सबसे बड़ी ताकत है इसकी 1,500 किलोमीटर की रेंज। इतनी लंबी दूरी से यह दुश्मन के युद्धपोतों को निशाना बना सकती है, वो भी बिना सीमा के पास जाए। DRDO के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ए. प्रसाद गौड़ के मुताबिक, यह मिसाइल इतनी तेज़ है कि दुश्मन का रडार भी इसे समय पर पकड़ नहीं पाता। यही वजह है कि इसे “सी ऑफ वॉर का गेम-चेंजर” कहा जा रहा है।
15 मिनट में 1,500 किमी-क्या वाकई इतना तेज़ है यह हथियार?
जी हां। LRAShM की सबसे चौंकाने वाली बात यही है। यह मिसाइल 15 मिनट से भी कम समय में 1,500 किमी दूर मौजूद लक्ष्य को तबाह कर सकती है। इसका मतलब है कि अगर समुद्र में कहीं भी खतरा पैदा होता है, तो भारतीय नौसेना बेहद कम समय में जवाब दे सकती है। यह मिसाइल अलग-अलग तरह के पेलोड और वॉरहेड ले जाने में भी सक्षम है, जिससे यह हर तरह के युद्धपोत-छोटे हों या बड़े-को निशाना बना सकती है।
समुद्र में भारत की ताकत कैसे बदलेगी LRAShM?
हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में LRAShM भारतीय नौसेना को एक निर्णायक बढ़त देती है। यह मिसाइल दुश्मन की हवाई सुरक्षा को चकमा देकर, बिना चेतावनी के हमला कर सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इसके आने से नौसैनिक संतुलन भारत के पक्ष में झुक सकता है, क्योंकि इतनी तेज़ और लंबी दूरी की एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल फिलहाल बहुत कम देशों के पास है।
गणतंत्र दिवस परेड में इसका प्रदर्शन क्या संकेत देता है?
कर्तव्य पथ परेड में LRAShM को DRDO की झांकी में धनुष गन सिस्टम, आकाश (L) लॉन्चर और सूर्यास्त्र रॉकेट सिस्टम के साथ दिखाया जाएगा। यह साफ संकेत है कि भारत अब सिर्फ हथियार आयात करने वाला देश नहीं, बल्कि एडवांस्ड मिसाइल टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर शक्ति बन चुका है।
क्या DRDO इससे भी ज्यादा खतरनाक मिसाइल पर काम कर रहा है?
हां। DRDO हाइपरसोनिक तकनीक को भविष्य मान रहा है। संस्थान हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल और हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल-दोनों पर काम कर रहा है। लक्ष्य है आने वाले समय में 3,000 से 3,500 किमी रेंज तक की मिसाइल विकसित करना।
सिर्फ परेड नहीं, एक बड़ा संदेश
गणतंत्र दिवस 2026 में LRAShM का प्रदर्शन सिर्फ एक झांकी नहीं होगा, बल्कि यह दुनिया को दिया गया साफ संदेश होगा-भारत अपनी समुद्री सुरक्षा को लेकर पूरी तरह तैयार है। यह मिसाइल भारत की तकनीकी ताकत, आत्मनिर्भर रक्षा नीति और भविष्य की युद्ध क्षमता की झलक है।
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