आपका बच्चा जिस कोचिंग या लाइब्रेरी में जाता है, क्या वह सुरक्षित है? लखनऊ हादसे के बाद 7 सेफ्टी चेक हर पैरेंट को आज ही बच्चे की कोचिंग जाकर जरूर करने चाहिए। 

Coaching Fire Safety Checklist: लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार दोपहर 'लर्निंग स्पेस' नाम की लाइब्रेरी और कोचिंग में लगी भयानक आग में करीब 14 बच्चों की मौत हो गई। इस हादसे के बाद पैरेंट्स के सामने सबसे बड़ा सवाल आया कि आपका बच्चा जिस कोचिंग या लाइब्रेरी में पढ़ने जाता है, वो कितनी सुरक्षित है? आजकल बड़े और छोटे शहरों की तंग गलियों में, बिना वेंटिलेशन वाले बेसमेंट और कमरों को पूरी तरह पैक करके चमचमाती 'AC लाइब्रेरी' और कोचिंग सेंटर्स खोल दिए गए हैं। ज्यादातर पैरेंट्स का ध्यान पढ़ाई, फीस और रिजल्ट पर तो रहता है, लेकिन सेफ्टी मिस हो जाती है। लखनऊ में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद इस पर फिर से सवाल उठने लगे हैं। ऐसे में पैरेंट्स को तुरंत अपने बच्चे के कोचिंग सेंटर या लाइब्रेरी जाकर 7 बातें खुद चेक करनी चाहिए...

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1. एंट्री और एग्जिट का रास्ता

ज्यादातर कोचिंग और लाइब्रेरी बेसमेंट या संकरी (पतली) गलियों में चल रही हैं। वहां जाकर चेक करें कि क्या वहां एंट्री और एग्जिट (बाहर निकलने) का रास्ता एक ही है? अगर हां, तो यह खतरनाक है। किसी भी इमरजेंसी में भगदड़ मचने पर बच्चे फंस सकते हैं। इमरजेंसी एग्जिट ( इमरजेंसी गेट) का होना बेहद जरूरी है।

2. बेसमेंट का इस्तेमाल किसलिए हो रहा है?

अगर आपके बच्चे की क्लास या लाइब्रेरी बेसमेंट में है, तो नियम के मुताबिक, बेसमेंट का इस्तेमाल सिर्फ पार्किंग या सामान रखने के लिए हो सकता है। वहां बच्चों को बिठाना कानूनन गलत और खतरनाक है। चेक करें कि कहीं बेसमेंट में पानी भरने या शॉर्ट सर्किट होने का खतरा तो नहीं है?

3. सीढ़ियां और गैलरी कितनी चौड़ी हैं?

कई-कई कोचिंग में एक-एक बैच में 100 से 200 बच्चे पढ़ते हैं। जब छुट्टी होती है, तो सब एक साथ बाहर निकलते हैं। आप जाकर चेक करें कि सीढ़ियां इतनी चौड़ी होनी चाहिए कि दो-तीन लोग एक साथ आराम से आ-जा सकें। अगर सीढ़ियां बहुत पतली हैं या वहां सामान भर कर रखा गया है, तो तुरंत कोचिंग मैनेजमेंट से बात करें।

4. आग बुझाने के इंतजाम (Fire Safety)

सिर्फ दीवार पर लाल रंग का सिलेंडर (Fire Extinguisher) टांग देने से सुरक्षा नहीं होती है। पता करें कि क्या वो सिलेंडर चालू हालत में है? उसकी एक्सपायरी डेट क्या है? सबसे जरूरी बात क्या वहां के स्टाफ या बच्चों को उसे चलाना आता है? इसके अलावा, क्या वहां 'स्मोक डिटेक्टर' (धुआं भांपने वाली मशीन) लगी है?

5. बिजली के तारों का जाल

कोचिंग और लाइब्रेरी में दर्जनों एसी, कंप्यूटर और लाइट्स चलती हैं, जिससे बिजली पर बहुत लोड होता है। ऐसे में चेक करें कि कहीं वहां बिजली के तार खुले तो नहीं घूम रहे हैं? क्या मेन स्विच बोर्ड या जनरेटर ऐसी जगह है जहां बच्चे आसानी से छू सकते हैं? तारों की फिटिंग सही होनी चाहिए ताकि शॉर्ट सर्किट का खतरा न हो।

6. वेंटिलेशन का सही इंतजाम

कई कोचिंग में एक छोटे से कमरे में क्षमता से ज्यादा बच्चों को बिठा दिया जाता है। ऐसे में चेक करें कि अगर किसी वजह से एसी बंद हो जाए या बिजली कट जाए, तो क्या उस कमरे में बाहर की हवा और रोशनी आने का कोई रास्ता (खिड़की या रोशनदान) है? सफोकेशन (दम घुटना) बच्चों को बीमार कर सकता है।

7. क्या उनके पास सरकारी परमिशन है?

हर कोचिंग इंस्टीट्यूट को फायर डिपार्टमेंट और लोकल प्रशासन से 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) लेना होता है। मैनेजमेंट से साफ पूछें कि क्या उनके पास फायर सेफ्टी की एनओसी (NOC) है? एक जिम्मेदार पैरेंट होने के नाते यह आपका हक है।