ISRO में एक साथ कई वरिष्ठ अधिकारियों के रिटायर होने का असर भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों पर कैसे पड़ सकता है? गगनयान मिशन और आगामी लॉन्च कार्यक्रमों के बीच नई नेतृत्व टीम के सामने कौन-कौन सी चुनौतियां हैं? विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) और लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (LPSC) की जिम्मेदारी फिलहाल किसे सौंपी गई है?
तिरुवनंतपुरम: ISRO यानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में एक बड़ी लीडरशिप चेंज देखने को मिल रही है। यहां के सबसे ज़रूरी सेंटर्स के डायरेक्टर बदल रहे हैं। तिरुवनंतपुरम के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) और वलियमला के लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम सेंटर (LPSC) में मौजूदा प्रमुखों के रिटायर होने के बाद अभी तक परमानेंट नियुक्ति नहीं हुई है। कुछ डायरेक्टर्स का कार्यकाल बढ़वाने की कोशिशें भी हुईं, लेकिन कामयाब नहीं हो सकीं। इसके साथ ही, भारत की स्पेस एजेंसी के कई बड़े चेहरों ने अब रिटायरमेंट ले लिया है।

विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के प्रमुख ए. राजराजन, श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर के प्रमुख ई. एस. पद्मकुमार और इसरो टेलीमेट्री एंड ट्रैकिंग सेंटर के प्रमुख डॉ. ए. के. अनिलकुमार 31 मई को रिटायर हो गए। इस बार किसी भी सेंटर के प्रमुख को कार्यकाल में विस्तार नहीं दिया गया। स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के प्रमुख नीलेश देसाई और वलियमला लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर के प्रमुख एम. मोहन अप्रैल के आखिर में रिटायर हुए थे। इसका नतीजा यह हुआ कि इसरो के पांच बड़े सेंटरों में एक साथ हेड बदल गए।
अहम मिशन, नई ज़िम्मेदारियां
स्पेस एप्लीकेशन सेंटर में सौम्य सरकार नए प्रमुख बने हैं। उन्हें इसी साल जुलाई में रिटायर होना है, लेकिन उनका कार्यकाल बढ़ाया जाएगा या नहीं, इस पर कोई साफ जानकारी नहीं है। LPSC में एसोसिएट डायरेक्टर एन. जयन और VSSC में आर एंड डी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. यू. पी. राजीव को फिलहाल अस्थायी ज़िम्मेदारी दी गई है। इसरो के मुख्य लॉन्चिंग सेंटर, श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर में एस. मुत्तुचेझियान नए प्रमुख हैं। वहीं, ISTRAC में एम. आर. राघवेंद्र को नया डायरेक्टर बनाया गया है। बेंगलुरु की लेबोरेटरी फॉर इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम्स (LEOS) के प्रमुख डॉ. एन. श्रीराम भी 31 मई को रिटायर हो गए, जिनकी जगह आर. वेंकटेश्वरन ने ली है।
तिरुवनंतपुरम इनर्शियल सिस्टम्स यूनिट और महेंद्रगिरि इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स के प्रमुख भी इसी महीने रिटायर होने वाले हैं। अगर कार्यकाल नहीं बढ़ाया गया तो सैटेलाइट बनाने वाले बेंगलुरु के यू. आर. राव सैटेलाइट सेंटर के प्रमुख एम. शंकरन भी अगस्त में रिटायर हो जाएंगे। हालांकि लीडरशिप में बदलाव एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन इतने अहम सेंटरों में एक साथ इतने लोगों का बदलना बहुत कम देखने को मिलता है। पिछले सालों में देखा गया है कि कुछ प्रमुखों को एक्सटेंशन मिलता था, ताकि नई टीम तैयार हो सके। ए. राजराजन, ई. एस. पद्मकुमार, एम. मोहन और नीलेश देसाई को पहले दो-दो साल का एक्सटेंशन मिल चुका था। IPRC के प्रमुख असीर पक्किराज भी एक्सटेंशन पर ही हैं। इस बार भी कुछ डायरेक्टर्स के लिए एक्सटेंशन की कोशिश हुई, पर बात नहीं बनी।
लीडरशिप में यह बड़ा बदलाव ऐसे समय में हो रहा है, जब इसरो लगातार हुए PSLV की असफलता से उबरने की कोशिश कर रहा है। PSLV-C62 की नाकामी के बाद से इसरो ने कोई भी लॉन्च मिशन नहीं किया है। GSLV लॉन्च के लिए तैयार है, लेकिन उसकी लॉन्चिंग की तारीख आगे बढ़ती जा रही है। देश के गौरव से जुड़े गगनयान मिशन का पहला मानवरहित मिशन भी लेट हो रहा है। अब इन सब चीज़ों को पटरी पर लाने की भारी ज़िम्मेदारी नई टीम के कंधों पर है।
