मृत घोषित एक व्यक्ति मुर्दाघर के फ्रीजर में जिंदा मिला। घंटों बाद कर्मचारियों ने उसकी चीखें सुनीं और उसे ठंड से कांपते हुए पाया। इस घटना ने मेडिकल जांच प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं और लापरवाही पर चिंता जताई है।

एक ऐसी हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जो किसी हॉरर फिल्म की कहानी लगती है। एक शख्स, जिसे मृत घोषित कर दिया गया था, वो मुर्दाघर के ठंडे फ्रीजर के अंदर जिंदा मिला। इस घटना ने अस्पताल के कर्मचारियों और परिवार वालों को सन्न कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब उस शख्स को लाशों के साथ कोल्ड स्टोरेज में रखने के बाद होश आया, तो यह मामला ऑनलाइन वायरल हो गया।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

रिपोर्ट्स के अनुसार, मेडिकल इमरजेंसी के बाद डॉक्टरों ने उस शख्स को मृत घोषित कर दिया था। यह मानकर कि उसकी मौत हो चुकी है, अधिकारियों ने उसके शरीर को मुर्दाघर के फ्रीजर में रखवा दिया, जहां पोस्टमार्टम या अंतिम संस्कार से पहले शवों को रखा जाता है। कुछ घंटों बाद, कर्मचारियों ने कथित तौर पर रेफ्रिजरेटेड चैंबर के अंदर से चीखने और चिल्लाने की आवाजें सुनीं।

पहले तो मुर्दाघर के डरे हुए स्टाफ को लगा कि शायद यह किसी भूत का काम है। लेकिन, जब उन्होंने स्टोरेज यूनिट का दरवाजा खोला, तो उनके होश उड़ गए। उन्होंने देखा कि वह शख्स जिंदा था, ठंड से बुरी तरह कांप रहा था और मदद के लिए पुकार रहा था। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि उसे तुरंत इमरजेंसी इलाज के लिए वापस अस्पताल ले जाया गया।

एक रिपोर्ट में मुर्दाघर के कर्मचारी के हवाले से बताया गया कि फ्रीजर से आती आवाजों ने कर्मचारियों में दहशत फैला दी थी। वहीं एक अन्य अधिकारी ने इस घटना को 'किसी चमत्कार से कम नहीं' बताया।

इस रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले ने दुनिया भर में उन मामलों पर चिंता फिर से बढ़ा दी है, जहां गलत मेडिकल जांच या कुछ दुर्लभ मेडिकल कंडीशन के कारण लोगों को गलती से मृत घोषित कर दिया जाता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कैटालैप्सी, हाइपोथर्मिया, अस्थमा का गंभीर दौरा या कोमा जैसी स्थितियों में कभी-कभी इमरजेंसी जांच के दौरान भ्रम पैदा हो सकता है।

सोशल मीडिया पर यह कहानी दोबारा सामने आने के बाद यूजर्स ने हैरानी और अविश्वास जताया। एक यूजर ने लिखा, 'सोचकर ही डर लगता है कि कोई मुर्दाघर के फ्रीजर में जाग जाए। यह तो सबसे बुरा सपना है।' एक अन्य ने कमेंट किया, 'यह सचमुच हर किसी का सबसे बड़ा डर है।'

इस घटना ने किसी मरीज को मृत घोषित करने से पहले और ज्यादा कड़े नियमों और प्रक्रियाओं की जरूरत पर भी एक नई बहस छेड़ दी है। अतीत में ऐसे ही मामलों में अधिकारियों ने संभावित लापरवाही और इमरजेंसी रिस्पॉन्स में हुई चूकों की जांच शुरू की है।