कभी आपने सुना है कि शादी के बाद हनीमून पर कोई कपल अपने मां-बाप और फैमिली को भी साथ ले गया हो? लेकिन ऐसा एक मामला मेरठ में सामने आया, जिसके बाद नाराज पत्नी ने जिंदगी का सबसे बड़ा कदम उठा लिया। आखिर पत्नी ने ऐसा क्या किया, क्या उसके द्वारा उठाया गया कदम सही है?
Weird Divorce: शादी के बाद हनीमून को आमतौर पर ऐसा समय माना जाता है, जब नवविवाहित जोड़ा एक-दूसरे को बेहतर तरीके से समझता है और शादी की तैयारियों की भागदौड़ के बाद कुछ सुकून के पल साथ बिताता है। लेकिन उत्तर प्रदेश के मेरठ से सामने आया एक मामला इन सबसे बिल्कुल अलग है, जहां हनीमून ही पति-पत्नी के बीच विवाद की बड़ी वजह बन गया और बात तलाक तक पहुंच गई।

मैट्रिमोनियल वेबसाइट के जरिए हुई थी शादी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मामला मेरठ जिले के रामराज क्षेत्र की रहने वाली एक महिला और दिल्ली के पटेल नगर के रहने वाले एक युवक से जुड़ा है। दोनों की शादी एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट के माध्यम से तय हुई थी। परिवारों की सहमति के बाद दोनों विवाह बंधन में बंधे थे।
नैनीताल हनीमून में परिवार को भी साथ ले गया पति
फैमिली काउंसलिंग सेंटर में दी गई जानकारी के अनुसार, शादी के बाद नवविवाहित जोड़ा हनीमून के लिए नैनीताल गया था। हालांकि, पत्नी को उस समय बड़ा झटका लगा जब उसे पता चला कि उसके पति ने अपने माता-पिता, भाई और बहन को भी इस यात्रा में शामिल कर लिया है। पत्नी की उम्मीद थी कि हनीमून केवल पति-पत्नी का प्राइवेट टाइम होगा, लेकिन परिवार के अन्य सदस्यों की मौजूदगी के कारण उसकी यह उम्मीद पूरी नहीं हो सकी।
हनीमून के बाद शुरू हुए लगातार झगड़े
नैनीताल से वापस लौटने के बाद इस मुद्दे को लेकर पति-पत्नी के बीच लगातार बहस और विवाद होने लगे। पत्नी का कहना था कि परिवार के सदस्यों के साथ रहने की वजह से वे दोनों एक-दूसरे के साथ पर्याप्त समय नहीं बिता पाए। उसका मानना था कि हनीमून का उद्देश्य पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत करना होता है, लेकिन परिवार के साथ होने से ऐसा नहीं हो सका।
पति ने कहा- परिवार की खुशी भी जरूरी
दूसरी ओर, सिंगापुर से हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट की पढ़ाई कर चुके पति का नजरिया अलग था। काउंसलर के अनुसार, पति ने कहा कि वह अपने परिवार के सभी सदस्यों को खुश रखना चाहता था, इसलिए उन्हें भी यात्रा में साथ ले गया। उसने यह मानने से इनकार कर दिया कि हनीमून पर परिवार को साथ ले जाना किसी तरह की गलती थी। उसके मुताबिक, इसमें कुछ भी गलत नहीं था।
दुबई ट्रिप को लेकर और बढ़ गया विवाद
रिपोर्ट के अनुसार, बाद में जब दंपति ने दुबई घूमने की योजना बनाई, तब विवाद और ज्यादा बढ़ गया। पत्नी को उम्मीद थी कि इस बार वे दोनों अकेले यात्रा करेंगे। लेकिन पति ने एक बार फिर अपने परिवार के सदस्यों को इस यात्रा में शामिल करने की इच्छा जताई। इसके बाद दोनों के बीच मतभेद और गंभीर हो गए।
मामला पहुंचा पुलिस स्टेशन
लगातार बढ़ते विवाद के बाद मामला स्थानीय पुलिस स्टेशन तक पहुंच गया। पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने और विवाद सुलझाने की कोशिश की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद मामले को पुलिस लाइंस स्थित फैमिली काउंसलिंग सेंटर भेज दिया गया, जहां विशेषज्ञों की मदद से पति-पत्नी के बीच सुलह कराने का प्रयास किया गया।
फैमिली काउंसलिंग के तीन दौर भी रहे बेअसर
फैमिली काउंसलिंग सेंटर के काउंसलर ने दोनों के साथ तीन अलग-अलग काउंसलिंग सत्र किए। इन बैठकों में पति और पत्नी दोनों को अपनी-अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया गया। काउंसलर के मुताबिक, बातचीत के दौरान दोनों ने एक-दूसरे पर कई गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, कई प्रयासों के बावजूद दोनों अपने-अपने रुख पर कायम रहे।
अलग होने के फैसले पर अड़े रहे दोनों
काउंसलिंग के तीन दौर पूरे होने के बाद भी पति-पत्नी के बीच कोई सहमति नहीं बन सकी। समझौते की हर कोशिश नाकाम रही और दोनों ने अपने फैसले में बदलाव करने से इनकार कर दिया। आखिरकार, यह मामला सुलझ नहीं पाया और पति-पत्नी अलग होने के अपने निर्णय पर कायम रहे। यह घटना अब रिश्तों में निजी अपेक्षाओं, पारिवारिक दखल और आपसी समझ की अहमियत को लेकर चर्चा का विषय बनी हुई है।


