माइक्रोसॉफ्ट की $200,000 सालाना नौकरी छोड़ ऑस्ट्रेलिया पहुंचे क्रिश्चियन हार्म्स ने बताया कि कंटेंट क्रिएटर बनने का सफर आसान नहीं रहा और कई बार उन्हें अपने फैसले पर शक हुआ।

माइक्रोसॉफ्ट के पूर्व कर्मचारी क्रिश्चियन हार्म्स (Christian Harms) ने अपनी अच्छी-खासी सैलरी वाली नौकरी छोड़ने के बाद के संघर्ष को खुलकर साझा किया है। क्रिश्चियन ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि उन्होंने स्विट्जरलैंड में माइक्रोसॉफ्ट की सालाना 2 लाख डॉलर (1.90 करोड़ रुपए) वाली नौकरी छोड़ दी और अपना नया सफर शुरू करने के लिए ऑस्ट्रेलिया चले गए। हार्म्स का सपना कंटेंट क्रिएटर बनना, अपना बिजनेस खड़ा करना और एक स्टार्टअप फाउंडर बनना था। लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि चीजें उनकी योजना के मुताबिक नहीं हुईं।

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Microsoft की नौकरी छोड़ने का फैसला क्यों लिया?

क्रिश्चियन हार्म्स ने बताया कि उनके मन में हमेशा यह विश्वास था कि माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी छोड़ना सही फैसला था। इसके बावजूद कई बार उन्हें अपने फैसले पर शक होने लगता है। उन्होंने एक वीडियो शेयर किया, जिसका टाइटल "My Museum of Failures as a 27 year old who quit his dream job" है। इसमें उन्होंने कहा, "माइक्रोसॉफ्ट छोड़ना शायद मेरे जीवन का सबसे बेवकूफी भरा फैसला था। अच्छी सैलरी, नौकरी की स्थिरता और कॉर्पोरेट लाइफ आपको ऐसा महसूस कराती है कि नौकरी छोड़ना गलत है। मुझे पता है कि मैं सही रास्ते पर हूं, लेकिन कुछ दिन ऐसे आते हैं, जब खुद पर इतना शक होता है कि दम घुटने लगता है।"

$200,000 की सैलरी छोड़कर शुरू किया नया सफर

हार्म्स ने बताया कि माइक्रोसॉफ्ट में काम करते समय उन्हें अच्छी सैलरी के साथ कई सुविधाएं भी मिल रही थीं। उन्होंने अपने एक पुराने वीडियो में बताया था कि स्विट्जरलैंड में नौकरी करने के कारण उन्हें पूरे यूरोप में घूमने का भी मौका मिला। इसके बावजूद उन्होंने 26 साल की उम्र में यह नौकरी छोड़ दी और ऑस्ट्रेलिया जाने का फैसला किया। उन्होंने कहा, "मैंने 26 साल की उम्र में माइक्रोसॉफ्ट की 2 लाख डॉलर सालाना सैलरी वाली नौकरी छोड़ दी ताकि इंटरनेट पर ब्रांड्स के लिए वीडियो बना सकूं। मुझे लगा था कि अब तक मैं अपना स्टार्टअप शुरू कर चुका होऊंगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कई बार ऐसा लगता है कि मैंने उस इंसान को निराश कर दिया जिसने इतना बड़ा कदम उठाया था, जबकि मुझे पता है कि मैं सही दिशा में आगे बढ़ रहा हूं।"

बिना किसी सॉलिड प्लानिंग के पहुंचे ऑस्ट्रेलिया

क्रिश्चियन हार्म्स ने बताया कि जब वे ऑस्ट्रेलिया पहुंचे, तब उनके पास कोई तय योजना नहीं थी। उन्होंने खुद को नए रास्ते तलाशने के लिए पांच महीने का समय दिया। क्रिश्चियन के मुताबिक, "घर लौटने वाली फ्लाइट से सिर्फ एक हफ्ते पहले मैंने ऑनलाइन अपनी पहली कमाई की। डेडलाइन ने वह काम कर दिया जो महीनों की प्लानिंग नहीं कर पाई थी। तब मुझे एहसास हुआ कि मैं अक्सर तभी पूरी मेहनत से काम करता हूं, जब मेरे सामने कोई बड़ी चुनौती होती है।"

बिजनेस बनाने की कोशिश, लेकिन दिशा नहीं थी

हार्म्स ने बताया कि उन्होंने कई महीनों तक अपना बिजनेस बनाने की कोशिश की। बाद में उन्हें महसूस हुआ कि उन्होंने कभी खुद से यह सवाल ही नहीं पूछा कि जिस बिजनेस पर वे काम कर रहे हैं, उसकी वास्तव में जरूरत भी है या नहीं। उन्होंने लिखा, "मैंने महीनों तक एक बिजनेस बनाने में समय लगाया, लेकिन यह नहीं सोचा कि मुझे इसे बनाना भी चाहिए या नहीं। मैंने इसे 'ड्यू डिलिजेंस' का नाम दिया, लेकिन असल में यह सिर्फ डर था, जिसे मैं एक टू-डू लिस्ट के पीछे छिपा रहा था। मैं महीनों तक बिना किसी स्पष्ट दिशा के काम करता रहा और आखिर में कोई खास नतीजा नहीं निकला।"

अब इंस्टाग्राम पर शेयर कर रहे अपना पूरा सफर

क्रिश्चियन हार्म्स ने बताया कि अब वे इंस्टाग्राम पर अपने पूरे सफर को लोगों के साथ साझा कर रहे हैं। उनका मकसद यह दिखाना है कि एक स्थिर और सुरक्षित नौकरी छोड़कर अपने सपनों के पीछे भागना वास्तव में कैसा अनुभव होता है। उनके मुताबिक, वे अपनी यात्रा को इसलिए डॉक्यूमेंट कर रहे हैं ताकि लोग सिर्फ सफलता ही नहीं, बल्कि संघर्ष, असफलताओं और आत्म-संदेह के उन पलों को भी समझ सकें, जिनका सामना नए रास्ते चुनने वाले लोगों को करना पड़ता है।