उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की 28 विधान परिषद (MLC) सीटों पर वोटों की गिनती चल रही है। इन सीटों के लिए 23 अक्टूबर को वोट डाले गए थे। बता दें कि इन चुनावों में एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच सीधी टक्कर है।
लखनऊ/पटना. MLC यानी विधान परिषद सदस्य का नाम आपने कई बार सुना होगा। लेकिन क्या MLC, विधायक (MLA) और सांसद (MP) से ज्यादा ताकतवर होता है? उसे कितनी सैलरी मिलती है और उसका चुनाव कैसे होता है? आइए आसान भाषा में समझते हैं।
MLC, MLA और MP में कौन ज्यादा ताकतवर?
- MLC को विधान परिषद सदस्य कहा जाता है। यह राज्य की विधान परिषद का सदस्य होता है, जबकि MLA यानी विधायक विधानसभा का सदस्य होता है। MP यानी सांसद संसद में जनता का प्रतिनिधित्व करता है।
- ताकत की बात करें तो MLC, विधायक से ज्यादा पावरफुल नहीं होता। विधायक के पास राज्य सरकार के कामकाज, बजट और सरकार के बहुमत से जुड़े मामलों में अहम भूमिका होती है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य सरकार विधानसभा के प्रति जवाबदेह होती है।
- MLC भी सरकार से सवाल पूछ सकता है और कानूनों पर चर्चा कर सकता है। लेकिन विधानसभा से पास हुए विधेयकों को विधान परिषद अनिश्चितकाल तक नहीं रोक सकती। धन विधेयक के मामले में भी विधान परिषद की शक्तियां सीमित हैं।
- वहीं, सांसद केंद्र सरकार और राष्ट्रीय स्तर के कानूनों से जुड़े मामलों में भूमिका निभाता है। इसलिए तीनों की ताकत उनके पद और जिम्मेदारियों के हिसाब से अलग-अलग होती है।
MLC की कितनी होती है सैलरी?
- MLC की सैलरी पूरे देश में एक जैसी नहीं होती। संविधान के अनुच्छेद 195 के तहत राज्य अपने कानूनों के अनुसार विधायकों और विधान परिषद सदस्यों का वेतन और भत्ते तय करते हैं।
- इसके अलावा उन्हें नियमों के मुताबिक यात्रा, दैनिक भत्ता और अन्य सुविधाएं भी मिल सकती हैं। इसलिए किसी MLC की सही सैलरी जानने के लिए संबंधित राज्य के वेतन और भत्तों के नियम देखना जरूरी है।
कैसे होता है MLC का चुनाव?
- MLC बनने के लिए हर बार आम जनता के वोट लेना जरूरी नहीं है। विधान परिषद की सीटें अलग-अलग तरीकों से भरी जाती हैं।
- संविधान के अनुच्छेद 171 के अनुसार, लगभग एक-तिहाई सदस्य स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि चुनते हैं। लगभग एक-बारहवां हिस्सा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और एक-बारहवां हिस्सा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुना जाता है। लगभग एक-तिहाई सदस्यों का चुनाव विधायक करते हैं। बाकी सदस्यों को राज्यपाल मनोनीत करते हैं।
- MLC का कार्यकाल छह साल होता है और हर दो साल में करीब एक-तिहाई सदस्य रिटायर होते हैं।







