Bharatpur Election: राजस्थान के भरतपुर में एक बेहद भावुक मामला सामने आया है। यहां एक मां ने अपने बेटे को वोट दिया और कुछ ही देर बाद उनकी मौत हो गई। जब चुनाव के नतीजे आए, तो बेटा सिर्फ एक वोट से जीत गया। माना जा रहा है कि मां का आखिरी वोट ही उसकी जीत की वजह बना।
Jagdish Prasad Nadbai election: राजनीति में कब क्या हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। कभी-कभी चुनाव के नतीजे इतने दिलचस्प होते हैं कि उन पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। ऐसा ही एक मामला राजस्थान के निकाय चुनाव में सामने आया है, जो अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। यहां एक बेटे की जीत की कहानी उसकी मां के आखिरी वोट से जुड़ी है।
यह भावुक कर देने वाली घटना राजस्थान के भरतपुर जिले की नदबई नगरपालिका की है। यहां जगदीश प्रसाद नाम के एक शख्स ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। वोटिंग के दिन उनकी मां ने बेटे के लिए वोट डाला और उसके कुछ ही देर बाद उनका निधन हो गया। जब नतीजे आए तो जगदीश सिर्फ एक वोट से चुनाव जीत गए।
मुकाबला था कड़ा, पर मां ने दिया हौसला
नदबई नगरपालिका चुनाव में जगदीश प्रसाद एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में थे। उनके सामने बीजेपी के मजबूत उम्मीदवार रामशरण थे, जिनकी जीत तय मानी जा रही थी। मुकाबला काफी कड़ा था, लेकिन जगदीश ने भी अपनी जीत के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी।
बेटे के लिए वोट डालने पहुंचीं बीमार मां
वोटिंग वाले दिन जगदीश प्रसाद की मां की तबीयत काफी खराब थी। लेकिन अपने बेटे को पहली बार चुनाव लड़ते देख, वो उसे वोट देने के लिए बेचैन थीं। जगदीश खुद अपनी मां को सहारा देकर पोलिंग बूथ तक लाए। बड़ी मुश्किल से मां ने अपने बेटे के लिए वोट डाला। इसके बाद जगदीश उन्हें घर छोड़कर वापस बूथ पर आ गए।
घर पर परिवार वालों के साथ आराम करते हुए शाम को उनकी तबीयत अचानक और बिगड़ गई। उन्हें फौरन अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। एक तरफ मां का साया सिर से उठ गया, तो दूसरी तरफ बेटे की किस्मत का फैसला होना बाकी था।
जब नतीजे आए तो आंखों में थे आंसू
जब वोटों की गिनती हुई तो नतीजे चौंकाने वाले थे। बीजेपी उम्मीदवार की जीत के सारे अनुमान धरे के धरे रह गए। निर्दलीय उम्मीदवार जगदीश प्रसाद सिर्फ एक वोट से जीत गए। जगदीश को 151 वोट मिले, जबकि बीजेपी के रामशरण को 150 वोट मिले।
यह जीत जगदीश के लिए खुशी से ज्यादा गम लेकर आई। जिस मां ने उन्हें जिताने के लिए अपना आखिरी वोट दिया, वो इस जीत को देखने के लिए जिंदा नहीं थीं। जब समर्थक उन्हें बधाई देने पहुंचे, तो जगदीश अपनी मां को याद कर फूट-फूट कर रो रहे थे। यह एक ऐसी जीत थी, जिसमें जश्न से ज्यादा आंसू थे।
