PM मोदी की फ्यूल सेविंग अपील के बाद MP पॉलिटिक्स में बड़ा मोड़! CM मोहन यादव ने VIP काफिले में 13 से 8 गाड़ियां भरीं, मंत्री ई-स्कूटी और ई-रिक्शा से निकले, जज साइकिल पर हाईकोर्ट पहुंचे। लेकिन इसी बीच BJP विधायक के बेटे का 200 गाड़ियों वाला काफिला वायरल होते ही सियासी पाखंड, VIP कल्चर और डबल स्टैंडर्ड पर बड़ा विवाद छिड़ गया।

MP VIP Convoy: पेट्रोल-डीजल की बढ़ती खपत और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच अब सियासत की सड़क पर भी बदलाव दिखाई देने लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की ईंधन बचाने की अपील के बाद सीएम मोहन यादव (Mohan Yadav) के नेतृत्व वाली मध्यप्रदेश सरकार ने वीआईपी संस्कृति पर बड़ा ब्रेक लगाने का ऐलान किया है। अब मुख्यमंत्री और मंत्रियों के लंबे-चौड़े काफिले सीमित होंगे, सरकारी दौरों में वाहन रैलियों पर रोक लगेगी और सादगी को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार के इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या यह वास्तव में ईंधन बचत की गंभीर पहल है या फिर जनता के बीच संदेश देने की राजनीतिक रणनीति?

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13 से घटकर सिर्फ 8 गाड़ियां: CM काफिले में बड़ा बदलाव

अब तक मुख्यमंत्री के काफिले में करीब 13 वाहन शामिल रहते थे। Z+ सुरक्षा श्रेणी होने के कारण सुरक्षा घेरा बेहद बड़ा रखा जाता था। लेकिन नए आदेश के बाद भोपाल में स्थानीय भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री के कारकेड में सिर्फ 8 वाहन ही शामिल होंगे। इनमें पायलट वाहन, मीडिया कार, एस्कॉर्ट वाहन, वीआईपी कार, स्पेयर बुलेटप्रूफ कार, एंबुलेंस और टेल कार शामिल रहेंगी। अतिरिक्त वाहनों को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। सरकार का दावा है कि इससे ईंधन की बचत होगी और जनता के बीच सादगी का संदेश जाएगा।

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“ईंधन बचत सिर्फ सरकार नहीं, हर नागरिक की जिम्मेदारी”

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि राष्ट्रहित में ईंधन की खपत कम करना समय की मांग है और इसकी शुरुआत सरकार खुद करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नवनियुक्त निगम-मंडल पदाधिकारी भी सादगी के साथ कार्यभार संभालेंगे। मुख्यमंत्री के इस बयान को सरकार की नई “सिंपल गवर्नेंस” छवि से जोड़कर देखा जा रहा है। लेकिन इसी बीच कुछ तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे, जिन्होंने पूरे अभियान पर सवाल खड़े कर दिए।

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ई-रिक्शा की सवारी… लेकिन पीछे कारों की लाइन!

भोपाल में मध्य प्रदेश लघु उद्योग निगम के नवनियुक्त अध्यक्ष सत्येंद्र भूषण सिंह ई-रिक्शा से पदभार ग्रहण करने पहुंचे। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर (Pradyumn Singh Tomar) भी ई-स्कूटी से मंत्रालय पहुंचे। कई भाजपा नेता और विधायक भी ई-रिक्शा में सफर करते दिखाई दिए। लेकिन इसी दौरान समर्थकों के बड़े-बड़े कार और बाइक काफिले भी नजर आए। यही तस्वीरें विपक्ष के हाथ बड़ा मुद्दा बन गईं।

भाजपा विधायक के बेटे का 400 गाड़ियों वाला काफिला वायरल

जहां सरकार ईंधन बचत का संदेश दे रही थी, वहीं भाजपा विधायक प्रीतम लोधी के बेटे का करीब 400 गाड़ियों के साथ निकला काफिला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में लंबी वाहन रैली और रील शूट होती दिखाई दी। इसके बाद कांग्रेस ने सरकार और भाजपा नेताओं पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने कहा कि “जनता को त्याग का संदेश दिया जा रहा है, लेकिन सत्ता में बैठे लोगों के लिए अलग नियम हैं।”

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साइकिल पर हाईकोर्ट के जस्टिस, सड़क पर संदेश

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा जबलपुर हाईकोर्ट के जस्टिस डीडी बंसल की हुई। वे करीब 3 किलोमीटर साइकिल चलाकर हाईकोर्ट पहुंचे। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल बचाना सिर्फ सरकार का काम नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। जस्टिस बंसल ने साफ कहा कि “यह सोच गलत है कि हाईकोर्ट के जज साइकिल से नहीं जा सकते।” उनकी इस पहल की सोशल मीडिया पर जमकर सराहना हुई।

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क्या यह केवल एक दिन का प्रदर्शन है या स्थायी बदलाव?

बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने विश्वास जताया है कि प्रधानमंत्री की अपील का असर गहरा होगा। हालांकि, चुनौती उन समर्थकों को नियंत्रित करने की है जो नेताओं के स्वागत में सैकड़ों गाड़ियाँ लेकर सड़कों पर उतर आते हैं। सरकार ने अब रैलियों और शक्ति प्रदर्शन पर रोक लगाने की बात कही है।

क्या बदल जाएगी VIP संस्कृति?

मध्यप्रदेश सरकार की यह पहल देशभर में चर्चा का विषय बन गई है। एक तरफ सरकार सादगी और ईंधन बचत का संदेश दे रही है, दूसरी तरफ नेताओं और समर्थकों के बड़े काफिले सवाल भी खड़े कर रहे हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि यह अभियान सिर्फ कुछ दिनों की प्रतीकात्मक कवायद बनकर रह जाता है या सचमुच सत्ता की चमक-दमक वाली VIP संस्कृति पर स्थायी ब्रेक लगता है।