मुंबई बारिश का कहर: चॉल हादसे, करंट और पेड़ गिरने से कई लोगों की मौत हुई। स्कूल बंद और उड़ानें व ट्रेनें प्रभावित। IMD रेड अलर्ट और ऑरेंज के बीच जानिए क्यों हाई अलर्ट पर है पूरा शहर?
मुंबई: जब मायानगरी मुंबई पर बादलों का पहरा बैठता है, तो रफ्तार के लिए मशहूर यह शहर सहम जाता है। लेकिन इस बार मॉनसून ने जो रौद्र रूप दिखाया है, उसने पूरी मुंबई को घुटनों पर ला दिया है। महज 12 घंटों के भीतर आसमान से बरसे करीब 200 मिलीमीटर पानी ने शहर के ड्रेनेज सिस्टम और दावों की पोल खोलकर रख दी है। सड़कों पर समंदर का नजारा है, रेल की पटरियां जलमग्न हैं, और आसमान में उड़ते विमानों के पहिए थम गए हैं। लेकिन यह सिर्फ जलभराव की कहानी नहीं है, इस आसमानी आफत ने मुंबई और उसके आस-पास के इलाकों में कई हंसते-खेलते परिवारों को हमेशा के लिए उजाड़ दिया है। मौत के इस तांडव के बीच पूरी प्रशासनिक मशीनरी हाई अलर्ट पर है।

आधी रात का वो खौफनाक मंजर: जब ताश के पत्तों की तरह ढह गई बहुमंजिला चॉल
रविवार की शाम (5 जुलाई) करीब 8:30 बजे मानखुर्द इलाके में एक ऐसी चीख गूंजी जिसने पूरे इलाके को दहला दिया। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के दबाव को न झेल पाने के कारण एक ग्राउंड-प्लस-थ्री-मंजिला चॉल का एक बड़ा हिस्सा अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस जर्जर इमारत के गिरने से उसके नीचे मौजूद दो-तीन झोपड़ियां भी मलबे के ढेर में तब्दील हो गई हैं।
रेस्क्यू का लाइव सस्पेंस: मुंबई फायर ब्रिगेड ने इसे लेवल-1 की इमरजेंसी घोषित किया और नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) के साथ मिलकर आधी रात को ही कंक्रीट के पहाड़ों के बीच जिंदगी की तलाश शुरू की। इस दर्दनाक हादसे में अब तक कम से कम छह लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। मृतकों में चार महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं, जिन्हें शताब्दी और राजावाड़ी अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मलबे के नीचे अब भी कुछ और जिंदगियों के दबे होने की आशंका है, जिसके लिए रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है।
पानी में दौड़ता अदृश्य काल: करंट और गिरते पेड़ों का जानलेवा जाल
मुंबई में छाए इस संकट के बीच सिर्फ चॉल का गिरना ही एकमात्र त्रासदी नहीं थी। सड़कों पर जमा घुटनों तक पानी के नीचे एक अदृश्य काल दौड़ रहा था—बिजली का करंट। पिछले एक हफ्ते के भीतर मुंबई और उसके सैटेलाइट शहरों में करंट लगने से छह मासूम जिंदगियां खत्म हो चुकी हैं। मुंब्रा की एक 17 वर्षीय लड़की, डोंबिवली की एक बेबस मां और नालासोपारा का एक होनहार कॉलेज छात्र-ये सब उन खुले और लावारिस बिजली के तारों की भेंट चढ़ गए जो जलभराव के कारण पानी के संपर्क में आ चुके थे। इसके साथ ही, तेज हवाओं के कारण हुए ट्री-फॉल (पेड़ गिरने) हादसों ने भी तीन लोगों की जान ले ली। कुर्ला वेस्ट में एक दुकान पर अचानक भारी पेड़ गिर गया जिससे एक युवक की मौत हो गई, जबकि गोरेगांव ईस्ट में बाइक से जा रहे 18 साल के एक लड़के पर पेड़ की टहनी गिरने से उसका सफर हमेशा के लिए खत्म हो गया।
रनवे पर छाया सन्नाटा: 75 मिनट का इंतजार और हवा में मंडराते विमान
आसमान से बरसती आफत का सीधा असर छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट (CSMIA) पर भी देखने को मिला। तेज हवाओं और बेहद कम विजिबिलिटी के कारण रविवार को एयरपोर्ट के रनवे का संचालन लगभग एक घंटे के लिए पूरी तरह ठप करना पड़ा। यह केवल एक घंटे का सन्नाटा नहीं था, बल्कि इसके बाद जो एविएशन क्राइसिस शुरू हुआ उसने हजारों यात्रियों की सांसें अटका दीं। एयरपोर्ट प्रशासन के मुताबिक, लगभग 90% उड़ानें औसतन 75 मिनट की देरी से संचालित हुईं। हवा में चक्कर काट रहे कई विमानों में ईंधन खत्म होने की कगार पर पहुंच गया था, जिसके बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत कई उड़ानों को नजदीकी हवाई अड्डों पर डायवर्ट करना पड़ा।
सोमवार का सस्पेंस: स्कूल-कॉलेज बंद, क्या थमेगी आसमानी आफत?
हालात की गंभीरता को भांपते हुए बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (BMC) ने देर रात एक बड़ा फैसला लिया। सोमवार (6 जुलाई) को मुंबई के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों को एहतियातन बंद रखने का आदेश जारी किया गया। मुंबई की देखादेखी पुणे, ठाणे और नवी मुंबई के स्थानीय प्रशासनों ने भी छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए शिक्षण संस्थानों में ताले लटका दिए हैं। जलभराव से निपटने के लिए सड़कों पर 448 डी-वॉटरिंग पंप और 19 मिनी पंपिंग स्टेशन दिन-रात पानी खींचने में लगे हैं।
अगले कुछ दिन भी रहेंगे चुनौतीपूर्ण
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मुंबई के लिए 'रेड', 'ऑरेंज' और 'येलो' अलर्ट का त्रिशूल जारी किया है, जिसका साफ मतलब है कि आने वाले कुछ दिन मुंबईकरों के लिए और भी भारी होने वाले हैं। लगातार हो रही बारिश, जलभराव, इमारतों की कमजोर स्थिति और बिजली से जुड़े खतरे को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा, राहत कार्यों में तेजी और सामान्य जनजीवन को जल्द से जल्द पटरी पर लाना है। प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है-जब तक बहुत जरूरी न हो, घरों से बाहर कदम न रखें, क्योंकि मायानगरी इस वक्त कुदरत के सबसे कड़े इम्तिहान से गुजर रही है।


