भारी बारिश और लैंडस्लाइड से मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे, पुराने हाईवे और रेलवे ट्रैक बाधित हो गए। सड़क-रेल संपर्क ठप होने पर प्रशासन ने यात्रियों से गैर-ज़रूरी यात्रा टालने की अपील की।

मुंबई/पुणे: पश्चिमी घाट की पहाड़ियों से घिरे मुंबई-पुणे कॉरिडोर पर जब भी आसमान से आफत बरसती है, तो सफर सिर्फ सफर नहीं रह जाता, बल्कि एक इम्तिहान बन जाता है। लेकिन इस रविवार जो हुआ, उसने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए। भारी बारिश के साथ आए एक के बाद एक कई लैंडस्लाइड (भूस्खलन) और आसमानी पानी के सैलाब ने महाराष्ट्र के इन दो सबसे बड़े और महत्वपूर्ण महानगरों के बीच की लाइफलाइन को पूरी तरह से काट दिया। मुंबई-पुणे को जोड़ने वाली नसें-चाहे वो चमचमाता एक्सप्रेसवे हो, ऐतिहासिक पुराना हाईवे हो या पहाड़ों को चीरकर निकलने वाला रेलवे नेटवर्क-सब कुछ एक झटके में ठप हो गया। हजारों मुसाफिर रास्ते में फंस गए और प्रकृति के इस भयानक रूप के आगे पूरा प्रशासनिक अमला बेबस नजर आया।

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'मिसिंग लिंक' पर मौत का साया: नई तकनीक भी घुटने टेकने पर मजबूर

इस तबाही की शुरुआत उस हिस्से से हुई जिसे मुंबई-पुणे के सफर को आसान और सुरक्षित बनाने के लिए हाल ही में खोला गया था। इंजीनियरिंग की मिसाल माने जाने वाले नवनिर्मित 'मिसिंग लिंक' सेक्शन पर अचानक पहाड़ों का एक बड़ा हिस्सा ढह गया। भारी भरकम चट्टानें और मलबे का सैलाब सड़क पर आ गिरा। इस घटना ने पूरे इलाके में पहले से ही खराब चल रहे हालात को बदतर बना दिया।

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चश्मदीदों की जुबानी: एक्सप्रेसवे पर सफर कर रहे कुछ ड्राइवरों ने बताया कि पहाड़ों से पत्थर गिरने की आवाज किसी बम धमाके जैसी थी। पलक झपकते ही जो रास्ता चंद मिनट पहले तक पूरी रफ्तार से दौड़ रहा था, वहां सिर्फ मलबे का ढेर और दहशत का सन्नाटा पसर गया।

केवल 'मिसिंग लिंक' ही नहीं, बल्कि पुराने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर भी कुदरत का कहर साफ देखने को मिला। ऐतिहासिक अमृतंजन ब्रिज और खालापुर टोल प्लाजा के पास इतना पानी जमा हो गया कि गाड़ियां तैरने लगीं। इसके बाद पुराने मुंबई-पुणे हाईवे पर भी एक और बड़ा लैंडस्लाइड हो गया, जिसने सड़क मार्ग से कनेक्टिविटी की बची-कुची उम्मीदों को भी जमींदोज कर दिया।

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घाट सेक्शन का त्रिशूल ध्वस्त: जब रेलवे की तीनों लाइनें एक साथ हुईं ब्लॉक

सड़क मार्ग बंद होने के बाद अक्सर लोग रेलवे को आखिरी उम्मीद मानते हैं, लेकिन भोर के अंधेरे में रेल नेटवर्क पर भी काल बनकर मलबा गिरा। पुणे-मुंबई रेलवे लाइन के ठाकुरवाड़ी इलाके में सुबह-सुबह एक भयानक लैंडस्लाइड हुआ। अभी रेलवे की टीमें इस मलबे को हटाने की रणनीति बना ही रही थीं कि सुबह करीब 3:05 बजे खंडाला और मंकी हिल के बीच मिडिल लाइन पर एक और बड़ा भूस्खलन हो गया। इन दोहरी घटनाओं ने कर्जत और लोनावाला के बीच के बेहद संवेदनशील और खूबसूरत घाट सेक्शन में रेलवे के पूरे ढांचे को हिलाकर रख दिया। रेलवे की तीनों महत्वपूर्ण लाइनें-अप लाइन (Up Line), डाउन लाइन (Down Line) और सर्विस लाइन-एक साथ मलबे और पत्थरों की चपेट में आ गईं। पटरियों पर विशालकाय चट्टानें गिरने की वजह से ट्रेनों पहिए जहां के तहां थम गए। घाटों के बीच फंसी ट्रेनों में बैठे मुसाफिरों के लिए वह सुबह किसी दुःस्वप्न से कम नहीं थी।

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'घर में रहें, सफर न करें': प्रशासन की वो सख्त चेतावनी जिसने सबको चौंकाया

हालात की गंभीरता और पल-पल गिरती चट्टानों के खतरे को देखते हुए प्रशासन और पुलिस विभाग को तुरंत कड़े फैसले लेने पड़े। एहतियात के तौर पर पुलिस ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे, पुराने हाईवे और पूरे रेलवे कॉरिडोर पर आम जनता की आवाजाही को पूरी तरह सीमित और अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच राहत और बचाव कार्य में भी भारी दिक्कतें आ रही हैं। मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन ने किसी भी संभावित बड़े हादसे को टालने के लिए जनता से बेहद भावुक और सख्त अपील जारी की है। निवासियों और यात्रियों से साफ कहा गया है कि जब तक कि जीवन-मरण का सवाल न हो या बेहद जरूरी काम न हो, तब तक वे मुंबई और पुणे के बीच यात्रा करने की बिल्कुल भी कोशिश न करें। प्रकृति के इस रौद्र रूप के शांत होने तक लोगों को अपने घरों के भीतर ही सुरक्षित रहने की हिदायत दी गई है। सच तो यह है कि यह रविवार इन दो शहरों के इतिहास में एक ऐसा दिन बन गया, जिसने विकास के दावों के बीच कुदरत की सर्वोच्च ताकत का अहसास करा दिया।