Nana Patekar News Today : नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन वह बॉलीवुड के उन कलाकारों में शामिल हैं, जो किसी भी किरदार में जान डाल देते हैं। उनकी आवाज, चेहरे के हाव-भाव और आंखों से अभिनय करने की कला दर्शकों को काफी प्रभावित करती है।उन्होंने ऐसा किरदार निभाया था जो न सुन सकता था और न बोल सकता था? जो भावुक कर देता है।

नाना पाटेकर बॉलीवुड के ऐसे कलाकार थे किरदार को सिर्फ निभाते नहीं, बल्कि उसमें पूरी तरह उतर जाते हैं। उनकी आवाज, आंखों का अंदाज और डायलॉग बोलने का तरीका उनके किरदार को और ज्यादा असरदार बना देता है। उनकी आवाज, चेहरे के हाव-भाव और आंखों से अभिनय करने की कला दर्शकों को काफी प्रभावित करती थी। नाना ने एक ऐसी ही फिल्म की थी, जो भले ही फ्लॉप हो गई, लेकिन उनकी एक्टिंग इतनी शानदार थी जिसे देखकर लोग आज भी रो पड़ते हैं। जिसमें उनका किरदार न सुन सकता था और न बोल सकता था?

  • यह फिल्म थी ‘खामोशी: द म्यूजिकल’। फिल्म में नाना पाटेकर ने ऐनी नाम की लड़की के पिता का किरदार निभाया था। उनके किरदार की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह सुन और बोल नहीं सकते थे।

फिल्म में नाना का किरदार था बेहद भावुक

  • ‘खामोशी: द म्यूजिकल’ साल 1996 में रिलीज हुई थी। फिल्म का निर्देशन संजय लीला भंसाली ने किया था। इसमें नाना पाटेकर के साथ सलमान खान और मनीषा कोइराला मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे।
  • नाना ने फिल्म में जोसेफ ब्रैगांजा का किरदार निभाया था। जोसेफ और उनकी पत्नी फ्लैवी एक ऐसी दुनिया में रहते हैं, जहां दोनों सुन और बोल नहीं सकते। उनकी बेटी ऐनी संगीत की दुनिया में अपना करियर बनाना चाहती है। यहीं से कहानी में भावनाओं का सिलसिला शुरू होता है।

बिना बोले बेटी के दर्द को समझते थे

  • फिल्म में नाना के किरदार की सबसे बड़ी ताकत उनकी खामोशी थी। वह बोल नहीं सकते थे, लेकिन चेहरे के भावों और इशारों के जरिए अपनी भावनाएं जाहिर करते थे।
  • बेटी की जिंदगी में आने वाले उतार-चढ़ाव को देखकर उनके चेहरे पर खुशी, चिंता और दर्द साफ नजर आता है। कई दृश्यों में नाना ने बिना संवाद बोले ही दर्शकों को भावुक कर दिया।

नाना की एक्टिंग ने छोड़ी अलग छाप

  • नाना पाटेकर की अभिनय शैली हमेशा से अलग रही है। ‘खामोशी’ में भी उन्होंने जोरदार संवादों के बजाय साइलेंट एक्टिंग पर भरोसा किया।
  • उनकी आंखों के भाव और चेहरे के एक्सप्रेशन ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं। यही वजह है कि फिल्म देखने वाले दर्शकों को उनके किरदार से भावनात्मक जुड़ाव महसूस हुआ।

बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक नहीं चली फिल्म

  • ‘खामोशी: द म्यूजिकल’ को आज हिंदी सिनेमा की यादगार फिल्मों में गिना जाता है। फिल्म को आलोचकों से काफी तारीफ मिली और इसके संगीत को भी खूब पसंद किया गया। हालांकि रिलीज के समय फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकी।
  • समय के साथ फिल्म की लोकप्रियता बढ़ती गई और आज इसे संजय लीला भंसाली की शुरुआती चर्चित फिल्मों में शामिल किया जाता है।

आज भी याद किया जाता है नाना का किरदार

  • नाना पाटेकर ने अपने लंबे करियर में कई तरह के किरदार निभाए हैं। लेकिन ‘खामोशी’ का जोसेफ उनके अलग तरह के अभिनय के लिए याद किया जाता है।
  • इस फिल्म में उन्होंने यह साबित किया कि एक कलाकार को अपनी बात कहने के लिए हमेशा शब्दों की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी सिर्फ आंखें, चेहरे के भाव और खामोशी ही पूरी कहानी कह देती है।
  • यही वजह है कि बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न करने के बावजूद ‘खामोशी: द म्यूजिकल’ और नाना पाटेकर का किरदार आज भी दर्शकों के दिल में अपनी जगह बनाए हुए है।