बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर अब हमारे बीच नहीं रहे। गुरुवार सुबह उनका गोवा में निधन हो गया। एक फिल्म में उन्होंने ऐसा हिंसक किरदार निभाया था जिसे देखकर मां बेहद दुखी हुई थीं। जिसे नेशनल अवॉर्ड भी मिला था। लेकिन मां ने गुस्से में पूछा था कि यह अवॉर्ड तुझे किसने दिया।

मुंबई. नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह निधन हो गया। वह बॉलीवुड के उन कलाकारों में गिने जाते हैं, जिन्होंने अपने अभिनय से अलग पहचान बनाई। वह जिस किरदार को पर्दे पर निभाते हैं, उसमें पूरी तरह उतर जाने के लिए जाने जाते हैं। लेकिन एक समय ऐसा भी आया, जब उनकी एक्टिंग देखकर उनकी मां ही दुखी हो गई थीं। कहा जाता है कि नाना की एक फिल्म देखने के बाद उनकी मां ने उनसे ऐसा सवाल कर दिया था, जिसने उन्हें भी सोचने पर मजबूर कर दिया। मां ने पूछा था- ‘किसने तुझे नेशनल अवॉर्ड दिया?’

मां को पसंद नहीं आया था नाना का किरदार

नाना पाटेकर को साल 1990 में फिल्म ‘परिंदा’ के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला था। फिल्म में उन्होंने अनिल कपूर के साथ काम किया था और उनका किरदार काफी हिंसक और कठोर था।

नाना के अभिनय में किरदार की हिंसा और गुस्सा इतना वास्तविक नजर आया कि इसे देखकर उनकी मां परेशान हो गई थीं। उनके लिए यह देखना आसान नहीं था कि उनका बेटा पर्दे पर इतना अलग और खतरनाक नजर आ रहा है।

‘परिंदा’ ने नाना को दिलाई बड़ी पहचान

  • ‘परिंदा’ का निर्देशन विधु विनोद चोपड़ा ने किया था। फिल्म में नाना पाटेकर ने अन्ना नाम के गैंगस्टर का किरदार निभाया था।
  • यह किरदार बेहद खतरनाक था। नाना ने अन्ना के गुस्से, सनक और हिंसक स्वभाव को इतनी मजबूती से पर्दे पर उतारा कि उनका किरदार फिल्म के सबसे यादगार किरदारों में शामिल हो गया।
  • फिल्म में नाना की एक्टिंग को खूब सराहा गया और उन्हें इस भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।

मां के लिए बेटा था, पर्दे पर दिख रहा था खतरनाक आदमी

एक कलाकार के लिए अपने किरदार को प्रभावी बनाना उसकी सफलता होती है, लेकिन परिवार के लिए वही किरदार देखना कभी-कभी मुश्किल हो सकता है। नाना की मां ने भी शायद इसी नजर से उनकी फिल्म देखी थी। पर्दे पर उन्हें अपना बेटा नहीं, बल्कि एक बेहद गुस्सैल और हिंसक किरदार नजर आ रहा था। यही वजह थी कि उनकी प्रतिक्रिया आम दर्शकों से बिल्कुल अलग थी।

नाना की एक्टिंग का यही अंदाज बना उनकी पहचान

  • नाना पाटेकर ने अपने करियर में कई अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय के अलग-अलग रंग देखने को मिले।
  • उनकी खासियत रही कि वह किरदार को सिर्फ संवादों से नहीं, बल्कि चेहरे के भाव, आवाज और बॉडी लैंग्वेज से भी जीवंत कर देते हैं।
  • ‘परिंदा’ में भी उनका अभिनय इतना प्रभावी था कि अन्ना का किरदार लंबे समय तक दर्शकों के जेहन में रहा।

अवॉर्ड मिला, लेकिन मां की नजर में सवाल कुछ और था

  • नाना के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार बड़ी उपलब्धि थी। लेकिन मां के लिए सबसे अहम बात यह थी कि उनका बेटा पर्दे पर कैसा दिख रहा है।
  • यही वजह है कि मां का वह सवाल- ‘किसने तुझे नेशनल अवॉर्ड दिया?’- नाना की कहानी का एक दिलचस्प हिस्सा बन गया।
  • एक तरफ दुनिया नाना की एक्टिंग की तारीफ कर रही थी, उन्हें पुरस्कार मिल रहा था, वहीं दूसरी तरफ उनकी मां अपने बेटे को उस खतरनाक किरदार में देखकर परेशान थीं।
  • यही किस्सा बताता है कि एक कलाकार जब किसी किरदार में पूरी तरह डूब जाता है, तो उसकी एक्टिंग पर्दे और असल जिंदगी के बीच की दूरी भी मिटा देती है।