NASA Curiosity Rover: Curiosity के 5000वें मार्सियन दिन पर NASA ने मंगल का एक पैनोरमा साझा किया, जिसमें सुबह को नीला और शाम को पीला रंग दिया गया है। 18 नवंबर 2025 की दो ब्लैक‑एंड‑व्हाइट छवियों से बनी यह कलात्मक रचना बताती है कि मंगल पर सूरज धरती से करीब दो‑तिहाई दिखता है और धुंधलका लगभग दो घंटे रहता है।
NASA Curiosity: मंगल के आसमान में सूर्योदय और सूर्यास्त पृथ्वी से काफी अलग दिखाई देते हैं। यहां सूरज छोटा नजर आता है और सूर्यास्त के बाद भी आसमान में धुंधलका लंबे समय तक बना रह सकता है। इसी खास अंतर को दिखाने के लिए NASA ने Curiosity रोवर के 5000वें मार्सियन दिन के मौके पर एक अनोखी तस्वीर साझा की है, जिसमें मंगल का सूर्योदय और सूर्यास्त एक ही फ्रेम में दिखाई देता है।
एक तस्वीर में मंगल की सुबह और शाम
NASA के मुताबिक, Curiosity ने 18 नवंबर 2025 को अलग-अलग समय पर मंगल की दो ब्लैक-एंड-व्हाइट तस्वीरें ली थीं। इनमें एक तस्वीर सुबह की थी, जबकि दूसरी देर दोपहर की। इन दोनों तस्वीरों को बाद में जोड़कर एक पैनोरमा तैयार किया गया।
तस्वीर को समझने और उसके विवरण को उभारने के लिए सुबह वाले हिस्से को नीले और शाम वाले हिस्से को पीले रंग में दिखाया गया। यही वजह है कि तस्वीर देखने पर ऐसा लगता है जैसे मंगल पर एक ही समय सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों हो रहे हों। NASA ने 16 सितंबर 2026 को Curiosity की 5000वीं मार्सियन सुबह को चिह्नित करते हुए इस संयुक्त तस्वीर को ‘पोस्टकार्ड’ शैली में साझा किया।
मंगल पर सूरज पृथ्वी से छोटा क्यों दिखता है?
मंगल सूर्य से पृथ्वी की तुलना में अधिक दूर है। इसी वजह से मंगल की सतह से देखने पर सूर्य का आभासी आकार पृथ्वी की तुलना में करीब दो-तिहाई दिखाई देता है। यानी लाल ग्रह पर सूरज का दृश्य धरती से थोड़ा अलग और अपेक्षाकृत छोटा नजर आता है।
मंगल का वातावरण भी इस नजारे को खास बनाता है। वहां मौजूद बेहद महीन धूल सूर्य की रोशनी को अलग तरीके से बिखेरती है। इसी कारण सूर्यास्त के आसपास मंगल का आकाश नीला दिखाई दे सकता है, जबकि पीली और लाल रोशनी आसपास के वातावरण में फैली रहती है।
मंगल पर धुंधलका घंटों तक क्यों रहता है?
मंगल के वातावरण में मौजूद धूल सूरज की रोशनी को लंबे समय तक बिखेरती रहती है। इसके कारण सूर्यास्त के बाद रोशनी अचानक खत्म नहीं होती, बल्कि धीरे-धीरे कम होती है। NASA के अनुसार, मंगल पर सूर्यास्त के बाद धुंधलका करीब दो घंटे तक बना रह सकता है। सूर्योदय से पहले भी इसी तरह लंबे समय तक हल्की रोशनी दिखाई दे सकती है। वैज्ञानिक ऐसी तस्वीरों का इस्तेमाल मंगल के वातावरण में मौजूद धूल और बर्फीले बादलों की ऊंचाई तथा उनके फैलाव को समझने के लिए भी करते हैं।
1976 में पहली बार दिखा था मंगल का सूर्यास्त
मंगल के सूर्यास्त की शुरुआती नजदीकी तस्वीरों में से एक NASA के Viking 1 Lander ने 21 अगस्त 1976 को ली थी। यह लैंडर Chryse Planitia क्षेत्र में मौजूद था और उसने सूर्यास्त से करीब 15 मिनट पहले मंगल के क्षितिज की तस्वीर कैद की थी।
इसके बाद अलग-अलग रोबोटिक मिशनों ने मंगल के सूर्योदय और सूर्यास्त को रिकॉर्ड किया। साल 2023 में Curiosity ने मंगल के आसमान में बादलों के बीच से आती सूर्य की किरणों को भी स्पष्ट रूप से कैद किया था। इन किरणों को क्रेपस्क्युलर किरणें कहा जाता है।
मंगल की ये तस्वीरें सिर्फ खूबसूरत नजारे नहीं हैं, बल्कि वैज्ञानिकों के लिए लाल ग्रह के वातावरण, धूल और बादलों को समझने का महत्वपूर्ण जरिया भी हैं।
