1 Din Kaam 3 Din Aaram: चीन में Gen Z के बीच ‘गुआबी’ या वॉल-हैंगिंग ट्रेंड बढ़ रहा है, जहां युवा 1 दिन काम और 3 दिन आराम जैसे तरीके से सिर्फ गुजारे लायक कमाते हैं। गुइझोउ में मार्च में 0.6 युआन/घंटा वाले इंटरनेट कैफे की चर्चा हुई। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने 29 वर्षीय गुओ जिहाओ की कहानी भी बताई।
Wall Hanging Youth China: चीन में युवाओं के बीच काम, करियर और जिंदगी को लेकर एक नया नजरिया चर्चा में है। इसे सोशल मीडिया और ऑनलाइन मंचों पर ‘गुआबी’ या ‘वॉल-हैंगिंग यूथ’ जैसे नामों से जोड़ा जा रहा है। इस सोच से जुड़े कुछ युवा कहते हैं कि उन्हें अब लगातार ज्यादा कमाने और करियर की दौड़ में शामिल होने के बजाय सिर्फ इतनी कमाई चाहिए, जिससे रोजमर्रा का खर्च चल सके।
इस प्रवृत्ति का एक चर्चित उदाहरण है- ‘1 दिन काम और 3 दिन आराम’। यह सोच चीन के पुराने ‘सैनहे’ मजदूरों की जीवनशैली से भी जोड़ी जा रही है। हालिया रिपोर्टों में इसे आर्थिक दबाव, अस्थिर रोजगार और मुख्यधारा की सफलता की दौड़ से दूरी के संदर्भ में देखा गया है।
क्या है ‘गुआबी’ और कौन हैं ये युवा?
‘गुआबी’ शब्द का शाब्दिक अर्थ चीनी भाषा में दीवार से लटके रहने से जुड़ा है। ऑनलाइन इस्तेमाल में यह ऐसे लोगों के लिए बोला जा रहा है, जो समाज की मुख्यधारा से काफी हद तक अलग होकर बेहद कम संसाधनों में जीवन गुजार रहे हैं।
इनमें कुछ युवा स्थायी नौकरी या करियर की तलाश छोड़कर छोटे-मोटे काम करते हैं। उनका लक्ष्य ज्यादा पैसा, बड़ा घर या सामाजिक प्रतिष्ठा हासिल करना नहीं, बल्कि न्यूनतम जरूरतों को पूरा करना रह जाता है।
‘सैनहे गॉड्स’ की पुरानी कहानी फिर चर्चा में
‘गुआबी’ की चर्चा के बीच चीन के सैनहे मजदूरों का जिक्र भी सामने आता है। शेनझेन के सैनहे इलाके में कभी ऐसे प्रवासी मजदूरों का समूह चर्चित हुआ था, जो रोजाना मिलने वाले छोटे-मोटे काम करके गुजारा करते थे। उनसे जुड़ा एक चर्चित नारा था एक दिन काम करो और तीन दिन आराम करो। कमाई खत्म होने पर दोबारा काम तलाशना और कुछ समय आराम करना इस जीवनशैली का हिस्सा था।
कॉलेज डिग्री के बाद भी नहीं मिली स्थिर जिंदगी
अब यह चर्चा सिर्फ मजदूरों तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों में ऐसे कॉलेज ग्रेजुएट युवाओं का भी जिक्र है, जिन्हें नौकरी, आर्थिक परेशानी या पारिवारिक संकट के बाद सामान्य जीवन से बाहर होते देखा गया। चीन में बेहद सस्ते इंटरनेट कैफे भी ऐसे लोगों के लिए अस्थायी ठिकाने बन रहे हैं। 2026 में 0.6 युआन प्रति घंटे वाले इंटरनेट कैफे की रिपोर्टों ने इस तरह की जिंदगी को लेकर ऑनलाइन चर्चा तेज की।
29 साल के गुओ जिहाओ की कहानी क्या बताती है?
South China Morning Post की 16 सितंबर 2026 की रिपोर्ट में शेनझेन के 29 वर्षीय गुओ जिहाओ की कहानी सामने आई। हुनान के अपेक्षाकृत संपन्न परिवार से आने वाले गुओ ने अर्थशास्त्र और प्रबंधन की पढ़ाई की थी और कभी एक स्थिर करियर की उम्मीद की थी।
लेकिन परिवार में हुई मौत और निवेश में असफलता के बाद उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। एक समय उनकी जेब में सिर्फ 20 युआन बचे थे। उन्होंने छोटे-मोटे काम किए और कुछ समय शेनझेन के बिलियर्ड्स हॉल जैसे स्थानों में रात गुजारी। बाद में उनकी स्थिति सुधरी और वह सामान्य जीवन की ओर लौटने लगे।
क्या यह सिर्फ आराम करने की सोच है?
‘गुआबी’ को केवल आराम पसंद करने वाले युवाओं के तौर पर देखना तस्वीर का एक हिस्सा ही होगा। उपलब्ध रिपोर्टों में इसके पीछे बेरोजगारी, आर्थिक असुरक्षा, सामाजिक अलगाव और सफलता की पारंपरिक दौड़ से मोहभंग जैसे अलग-अलग कारणों का जिक्र मिलता है।
चीन में इससे पहले ‘लेटिंग फ्लैट’ यानी की अवधारणा भी चर्चा में रही है, जिसमें कुछ युवा अत्यधिक काम, महंगे जीवन और सामाजिक अपेक्षाओं के दबाव के बीच न्यूनतम प्रयास वाली जिंदगी को चुनने की बात करते थे।
बदलती पीढ़ी का संकेत है ‘गुआबी’?
‘गुआबी’ की चर्चा यह सवाल जरूर उठाती है कि चीन की कुछ युवा आबादी सफलता और करियर को किस नजरिए से देख रही है। जहां पहले आर्थिक तरक्की, बेहतर नौकरी और सामाजिक स्थिति को आगे बढ़ने का रास्ता माना जाता था, वहीं कुछ युवाओं की प्राथमिकता अब कम खर्च, कम काम और किसी तरह जीवन चलाने तक सीमित दिखाई दे रही है।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि चीन की पूरी युवा आबादी इसी रास्ते पर चल रही है। यह फिलहाल ऑनलाइन चर्चा और कुछ खास समूहों में दिखाई देने वाली सामाजिक प्रवृत्ति है।
