बेंगलुरु में कांग्रेस रैली के दौरान ट्रैफिक जाम से कुछ छात्र समय पर NEET री-टेस्ट केंद्र नहीं पहुंच सके। घटना पर BJP और कांग्रेस आमने-सामने हैं।

NEET Re-Test: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में कांग्रेस की एक रैली के कारण हुए भारी ट्रैफिक जाम ने NEET UG री-टेस्ट देने जा रहे कई छात्रों और उनके परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दीं। आरोप है कि ट्रैफिक जाम की वजह से कम से कम 3 छात्र समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच सके और उन्हें परीक्षा में बैठने का मौका नहीं मिला। इसके बाद यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है और BJP तथा कांग्रेस एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।

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NEET री-टेस्ट में शामिल हुए लाखों छात्र

पेपर लीक के आरोपों के बाद पहले आयोजित NEET परीक्षा को रद्द किए जाने के एक महीने से अधिक समय बाद देशभर में लगभग 22 लाख छात्र NEET UG री-टेस्ट में शामिल हुए। परीक्षा दोपहर 2 बजे शुरू हुई थी, जबकि छात्रों को निर्धारित समय से पहले रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, बेंगलुरु में कई इलाकों में ट्रैफिक जाम की स्थिति के कारण बड़ी संख्या में छात्र और अभिभावक समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचने के लिए संघर्ष करते नजर आए।

ट्रैफिक जाम के कारण परीक्षा केंद्र पहुंचने में हुई परेशानी

परीक्षा शुरू होने से पहले शहर की कई सड़कों पर भारी भीड़ और वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। समय निकलता देख कई अभिभावक अपने बच्चों को परीक्षा केंद्र पहुंचाने के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशने लगे। कुछ लोग दोपहिया वाहनों से कारों की कतारों के बीच निकलने की कोशिश करते दिखाई दिए, जबकि कुछ अभिभावकों ने मजबूरी में फुटपाथ का इस्तेमाल भी किया। इसके बावजूद कुछ छात्र समय पर केंद्र नहीं पहुंच सके।

देर से पहुंचे छात्रों को नहीं मिली एंट्री

रिपोर्ट्स के मुताबिक कम से कम तीन छात्र निर्धारित समय के बाद परीक्षा केंद्र पहुंचे। तब तक प्रवेश प्रक्रिया बंद हो चुकी थी। निराश छात्र किसी तरह परीक्षा केंद्र के अंदर पहुंचने की कोशिश करते रहे। कुछ ने मुख्य गेट तक पहुंचकर अधिकारियों से अनुरोध भी किया, लेकिन नियमों के अनुसार उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई। इससे छात्रों और उनके परिवारों में भारी निराशा देखने को मिली।

माता-पिता ने कांग्रेस रैली को ठहराया जिम्मेदार

घटना के बाद कई अभिभावकों ने ट्रैफिक जाम के लिए कांग्रेस की रैली को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना था कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परीक्षा के दिन इस तरह का बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाना चाहिए था। कुछ अभिभावकों ने राहुल गांधी और कर्नाटक सरकार के नेताओं पर नाराजगी जताई। कई छात्रों के भावुक होने और रोने की खबरें भी सामने आईं क्योंकि उनके लिए मेडिकल कॉलेज में प्रवेश का यह महत्वपूर्ण अवसर था।

अभिभावकों ने सुनाई अपनी परेशानी

एक छात्र के पिता कृष्ण मूर्ति ने बताया कि सामान्य दिनों में लगभग 7 किलोमीटर का सफर 20 मिनट में पूरा हो जाता है, लेकिन रैली और ट्रैफिक जाम के कारण उन्हें 35 मिनट से अधिक समय लग गया। उन्होंने कहा कि एक अभिभावक के रूप में वह बेहद चिंतित थे। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उन्हें मजबूरी में फुटपाथ का उपयोग करना पड़ा। उनका मानना है कि बड़े राजनीतिक कार्यक्रम शहर के भीतरी इलाकों के बजाय बाहरी क्षेत्रों में आयोजित किए जाने चाहिए। एक अन्य अभिभावक ने सवाल उठाया कि जब राहुल गांधी छात्रों के मुद्दों पर आवाज उठाते हैं, तो उनकी पार्टी के कार्यक्रम की वजह से परीक्षा देने जा रहे छात्रों को परेशानी क्यों हुई।

सड़क बंद रहने के आरोप

कुछ अभिभावकों ने दावा किया कि परीक्षा केंद्र के आसपास की सड़कें कई घंटों तक प्रभावित रहीं। उनका कहना था कि NEET परीक्षा की तारीख पहले से घोषित थी और सभी को इसकी जानकारी थी। ऐसे में परीक्षा के दिन बड़े राजनीतिक कार्यक्रम के आयोजन को लेकर उन्होंने सवाल उठाए और कहा कि इससे छात्रों के हित प्रभावित हुए हैं।

BJP ने कांग्रेस पर साधा निशाना

इस पूरे मामले को लेकर BJP ने कांग्रेस सरकार पर हमला बोला। BJP नेताओं ने कहा कि छात्रों की परीक्षा से अधिक प्राथमिकता राजनीतिक कार्यक्रमों को दी गई। BJP सांसद तेजस्वी सूर्या ने सोशल मीडिया पर अभिभावकों के बयान साझा करते हुए कहा कि कांग्रेस की रैली के कारण छात्रों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में कठिनाई हुई। उन्होंने इस मामले को छात्रों के हितों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।

कांग्रेस का जवाब, केंद्र पर मढ़े आरोप

BJP के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को पहले परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों और पेपर लीक मामलों पर जवाब देना चाहिए। उनके अनुसार पिछले वर्षों में कई परीक्षाओं में गड़बड़ियों की घटनाएं सामने आई हैं, जिन पर भी चर्चा होनी चाहिए।

ट्रैफिक एडवाइजरी और हेल्पलाइन का किया दावा

प्रियांक खड़गे ने कहा कि प्रशासन की ओर से पहले ही ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की गई थी और छात्रों की सहायता के लिए हेल्पलाइन भी उपलब्ध कराई गई थी। उन्होंने बताया कि परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक जांच और अन्य मानक प्रक्रियाओं का पालन किया गया। साथ ही उन्होंने दावा किया कि कुछ छात्रों के देर से पहुंचने के पीछे अलग-अलग कारण भी थे।

सुधांशु त्रिवेदी ने उठाए सवाल

BJP सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि यदि रैली को पूरी तरह टालना संभव नहीं था, तो उसका समय बदला जा सकता था। उनके मुताबिक परीक्षा की तारीख पहले से तय थी, इसलिए छात्रों की सुविधा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि यह केवल कुछ अभिभावकों का सवाल नहीं है, बल्कि देशभर के छात्रों और उनके परिवारों की चिंता से जुड़ा मुद्दा है।

कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने जताया खेद

कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने उन छात्रों के प्रति संवेदना व्यक्त की जो परीक्षा में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि यदि किसी छात्र को वास्तव में परेशानी हुई है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है और इसके लिए उन्हें खेद है। साथ ही उन्होंने BJP पर भी सवाल उठाए और कहा कि विभिन्न परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों तथा छात्रों की परेशानियों के लिए केंद्र सरकार को भी जवाब देना चाहिए।